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रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारतीय रेलवे की सुरक्षा और संचार व्यवस्था को हाईटेक बनाने के लिए अहम फैसले लिए हैं. पटरियों पर हादसों को रोकने के लिए देशभर में महज 12 घंटे में अंडरपास बनाए जाएंगे. वहीं, ‘कवच’ सिस्टम के विस्तार और ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से रेल सफर अधिक सुरक्षित होगा.
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रेलवे पटरियों को पार करते समय होने वाले जानलेवा हादसों को रोकने के लिए रेल मंत्रालय ने बड़ा फैसला लिया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देशभर में अंडरपास बनाने के निर्देश दिए हैं. सबसे खास बात यह है कि इन सबवे को महज 12 घंटे के रिकॉर्ड समय में तैयार किया जा सकेगा. यह पहल खास तौर पर उन ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के लिए एक बड़ा वरदान साबित होगी, जहां लोगों की बसावट एक तरफ है और उनके खेत, स्कूल, श्मशान या काम की जगह रेलवे लाइन के दूसरी तरफ होती है. अब लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर पटरियां पार नहीं करनी पड़ेंगी. रेल मंत्री ने स्पष्ट किया है कि इन सबवे का डिजाइन पूरी तरह से आम जनता की सहूलियत को ध्यान में रखकर बनाया जाएगा, जिससे लोग अपनी साइकिल, मोटरसाइकिल और काम का अन्य सामान आसानी से आर-पार ले जा सकेंगे.
यात्रियों की सुरक्षा और रेलवे के संचार नेटवर्क को मजबूत करने के लिए भी एक बड़ा फैसला लिया गया है. भारतीय रेलवे ने ‘कवच’ (ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम) के विस्तार और संचार ढांचे को अपग्रेड करने के लिए करीब 1,236 करोड़ रुपये की व्यापक परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है. इस भारी-भरकम बजट के तहत सेंट्रल और वेस्टर्न रेलवे में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने और दक्षिणी रेलवे के अत्यधिक व्यस्त रूट्स पर ‘कवच’ सिस्टम लगाने का काम किया जाएगा.
सेंट्रल रेलवे में बिछेगा फाइबर का जाल
सेंट्रल रेलवे के पांचों मंडलों सोलापुर, नागपुर, पुणे, भुसावल और मुंबई में एक मजबूत दोहरी संचार प्रणाली विकसित करने के लिए 623.63 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. इसके तहत मौजूदा इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन लाइनों पर खास तरह के तार (OPGW) लगाए जाएंगे और साथ ही पटरियों के किनारे अंडरग्राउंड ऑप्टिकल फाइबर केबल भी बिछाई जाएगी. इस दोहरी व्यवस्था से यह सुनिश्चित होगा कि अगर कोई एक लाइन खराब भी हो जाए, तो रेलवे का संचार नेटवर्क ठप न हो.
रेलवे अतिरिक्त कमाई भी करेगा
इसके अलावा, अतिरिक्त फाइबर क्षमता को लीज पर देकर रेलवे अतिरिक्त कमाई भी करेगा. दूसरी ओर, दक्षिणी रेलवे में 548 किलोमीटर लंबे रूट पर ट्रेनों को आपस में टकराने से रोकने वाले ‘कवच’ सुरक्षा तंत्र को स्थापित करने के लिए 310.18 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.
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