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मेंटेनेंस में पहले से शामिल, फिर भी नगर निगम मांग रहा अलग से पैसा!

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Ghaziabad News: क्या आप भी किसी हाउसिंग सोसायटी में रहते हैं? अगर हां, तो अपनी जेब जरा संभाल कर रखिए! गाजियाबाद के ट्रांस हिंडन इलाके में रहने वाले हजारों लोग इन दिनों एक अजीब सी मुसीबत में हैं. उन्हें कूड़ा उठाने के लिए एक नहीं, बल्कि दो-दो बार पैसे देने पड़ रहे हैं. एक तरफ सोसायटी मेंटेनेंस के नाम पर मोटी रकम वसूलती है, जिसमें कूड़ा प्रबंधन शामिल है, तो दूसरी तरफ नगर निगम हर फ्लैट से अलग से चार्ज मांग रहा है. जनता परेशान है, सवाल पूछ रही है, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं. आइए जानते हैं आखिर ये ‘डबल वसूली’ का पूरा खेल क्या है?

डबल चार्ज की मार: आखिर क्यों भड़के हैं निवासी?
ट्रांस हिंडन की कई नामी हाउसिंग सोसायटियों में कूड़ा उठाने के शुल्क को लेकर गुस्सा बढ़ता जा रहा है. स्थानीय निवासियों का सीधा आरोप है कि उनके साथ नाइंसाफी हो रही है. दरअसल, जब कोई व्यक्ति किसी अपार्टमेंट या सोसायटी में रहता है, तो वह हर महीने एक ‘मेंटेनेंस चार्ज’ देता है. इस चार्ज में सोसायटी के अंदर साफ-सफाई और कूड़े के प्रबंधन का खर्चा पहले से ही जुड़ा होता है.

लेकिन अब मुसीबत यह है कि नगर निगम ने हर फ्लैट के आधार पर अलग से शुल्क लेना शुरू कर दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लोगों का कहना है कि जब हम पहले ही मेंटेनेंस के रूप में पैसा दे रहे हैं, तो निगम को अलग से पैसे क्यों दें? यह सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर ‘दोहरी आर्थिक मार’ है.

ग्राउंड जीरो पर क्या है असली दिक्कत?
लो-राइज सोसायटियों में रहने वाले लोगों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि तीसरी या चौथी मंजिल से हर बार कूड़ा नीचे लाकर मुख्य कचरा घर तक पहुंचाना आसान काम नहीं होता. शिप्रा रिवेरा के निवासियों का कहना है कि निगम की गाड़ी आती है और एक ही चक्कर लगाकर चली जाती है. ऐसे में ‘डोर-टू-डोर’ कलेक्शन के नाम पर जो अलग से पैसे मांगे जा रहे हैं, वह पूरी तरह अनुचित हैं. निवासियों का तर्क है कि जब स्कूल और अस्पताल जैसी बड़ी इमारतों को एक ‘यूनिट’ माना जाता है (क्योंकि उनका मालिक एक होता है), तो पूरी सोसायटी को एक यूनिट क्यों नहीं माना जा सकता?

फ्लैट नहीं, सोसायटी को मानो एक यूनिट
सोसायटियों की RWA (रेसिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) और प्रबंधन समितियों ने इस मामले में मोर्चा खोल दिया है. कोनार्क एन्क्लेव, पार्श्वनाथ पैराडाइज, लोटस पॉन्ड और एचआरसी प्रोफेशनल जैसी सोसायटियों के निवासियों का कहना है कि वे कूड़ा एक निर्धारित स्थान पर इकट्ठा करके खुद निगम की गाड़ियों को सौंपते हैं. एचआरसी प्रोफेशनल सोसायटी के एओए अध्यक्ष मनवीर सिंह और फेडरेशन ऑफ एओए के सचिव अवनीश कुमार झा का कहना है कि, नगर निगम को पूरी सोसायटी को एक इकाई मानना चाहिए. प्रति फ्लैट चार्ज लेने के बजाय एक फिक्स मासिक शुल्क तय होना चाहिए. निगम जिस एजेंसी से काम करा रहा है, उससे इस तरह मोल-भाव किया जाना चाहिए कि बोझ जनता पर न पड़े.

नालों की सफाई के बाद सड़क पर फैला ‘कीचड़ का साम्राज्य’
कूड़े की समस्या के साथ-साथ एक और बड़ी परेशानी वसुंधरा सेक्टर-17 से सामने आई है. यहां बिजली घर के सामने स्थित नाले की सफाई तो की गई, लेकिन सफाई के बाद निकाली गई सिल्ट (गाद/कीचड़) को सड़क पर ही लावारिस छोड़ दिया गया. इससे न केवल इलाके में बदबू फैल रही है, बल्कि सड़क इतनी संकरी हो गई है कि पैदल चलने वालों और गाड़ियों का निकलना दूभर हो गया है. सड़क पर फिसलन होने के कारण हर वक्त हादसे का डर बना रहता है.

स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि नाले की सफाई के बाद सिल्ट को तुरंत हटाया जाए ताकि आवागमन सुचारू हो सके. फिलहाल ट्रांस हिंडन की जनता इस ‘डबल टैक्स’ और गंदगी के बीच फंसी हुई है. एक तरफ सफाई का दावा है, तो दूसरी तरफ वसूली की जिद. अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन और नगर निगम जनता की इन जायज मांगों पर गौर करते हैं या फिर ‘स्मार्ट सिटी’ के नाम पर आम जनता की जेब ढीली होती रहेगी.



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