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खेतों में बंटाया हाथ, रोजाना 7 से 8 घंटे की सेल्फ स्टडी… किसान की बेटी शुभि ने यूपी बोर्ड में गाड़ा झंडा, हासिल की प्रदेश में 9वीं रैंक

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Shubhi Tiwari Success Story: ‘हौसलों के तरकश में कोशिश का वो तीर जिंदा रख, हार जाए चाहे जिंदगी में सब कुछ, मगर फिर से जीतने की उम्मीद जिंदा रख.’ इस कहावत को गोंडा की एक साधारण किसान की बेटी शुभि तिवारी ने चरितार्थ कर दिखाया है. सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बीच, शुभि ने यूपी बोर्ड हाईस्कूल की परीक्षा में पूरे प्रदेश में नौवां स्थान हासिल कर यह साबित कर दिया कि सफलता किसी सुख-सुविधा की मोहताज नहीं होती, बल्कि यह केवल कठिन परिश्रम और अडिग लक्ष्य से हासिल की जा सकती है.

Shubhi Tiwari Success Story: शुभि तिवारी का परिवार पूरी तरह से खेती-किसानी पर निर्भर है. उनके पिता एक छोटे किसान हैं, जो दिन-रात खेतों में पसीना बहाकर अपने परिवार का पेट पालते हैं. खेती की अनिश्चित आय और आर्थिक तंगहाली के बावजूद, शुभि के माता-पिता ने कभी भी अपनी बेटी की शिक्षा के बीच गरीबी को नहीं आने दिया. शुभि ने भी अपने माता-पिता के त्याग की कीमत समझी और आज अपनी मेहनत से पूरे गोंडा जिले और उत्तर प्रदेश का नाम रोशन कर दिया.

मां ने बताया: पढ़ाई के साथ खेतों में भी बंटाती थीं हाथ
लोकल 18 से खास बातचीत के दौरान शुभि की माता बबली तिवारी अपनी खुशी नहीं छिपा पायीं. उन्होंने बताया कि शुभि बचपन से ही मेधावी रही हैं. स्कूल से लौटने के बाद वह न केवल घर के कामों में मदद करती थीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर खेतों में भी माता-पिता का हाथ बंटाती थीं. हालांकि, काम के बोझ के बीच उन्होंने कभी अपनी पढ़ाई को पीछे नहीं छोड़ा. मां के मुताबिक, शुभि जितनी पढ़ाई में गंभीर हैं, उतनी ही वह स्वभाव से थोड़ी शरारती भी हैं, जो घर के माहौल को खुशमिजाज रखती हैं.

विज्ञान पर रहा है हमेशा से फोकस
शुभि तिवारी गोंडा के श्री कुंज बिहारी स्मारक इंटर कॉलेज सुभागपुर की छात्रा रही हैं. अपनी रुचि के बारे में बात करते हुए शुभि ने बताया कि उन्हें गणित और विज्ञान विषयों से विशेष लगाव है. वह कहती हैं, ‘मेरा मुख्य फोकस हमेशा विज्ञान पर रहा है, लेकिन मैंने अन्य विषयों में भी उतनी ही मेहनत की ताकि ओवरऑल स्कोर बेहतर हो सके.’

रोजाना 7 से 8 घंटे की सेल्फ स्टडी
शुभि की सफलता के पीछे कोई महंगा कोचिंग संस्थान नहीं, बल्कि उनका खुद का बनाया हुआ टाइम-टेबल है. शुभि ने बताया कि वह स्कूल के बाद हर दिन करीब 7 से 8 घंटे पढ़ाई करती थीं. उन्होंने हर विषय के लिए समय निर्धारित कर रखा था और बिना एक भी दिन छोड़े उस शेड्यूल का पालन करती थीं. कठिन टॉपिक्स को समझने के लिए वह अपने स्कूल के शिक्षकों की मदद लेती थीं और बार-बार अभ्यास करती थीं.

सोशल मीडिया और मोबाइल से बना ली थी दूरी
आज के दौर में जहां युवा मोबाइल में व्यस्त रहते हैं, वहीं शुभि ने सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली थी. शुभि के मुताबिक, ‘मैंने मोबाइल का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ पढ़ाई से संबंधित जानकारी जुटाने के लिए किया. इंटरनेट का सही उपयोग आपको सफल बना सकता है, लेकिन सोशल मीडिया अक्सर लक्ष्य से भटका देता है.’ उन्होंने अपनी एकाग्रता को ही अपनी सबसे बड़ी शक्ति बताया.

डॉक्टर बनकर करना चाहती हैं समाज सेवा
शुभि की इस उपलब्धि पर पूरे गांव में जश्न का माहौल है और लोग उनके घर पहुंचकर बधाई दे रहे हैं. अपनी भविष्य की योजनाओं को लेकर शुभि का लक्ष्य स्पष्ट है. वह आगे चलकर एक डॉक्टर बनना चाहती हैं. वह कहती हैं कि वह डॉक्टर बनकर न केवल अपने माता-पिता का नाम ऊंचा करना चाहती हैं, बल्कि समाज के उन गरीब बच्चों की भी मदद करना चाहती हैं जिन्हें इलाज और शिक्षा की बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पातीं.

शुभि तिवारी की यह कहानी हर उस छात्र के लिए मिसाल है जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं. शुभि ने साबित किया है कि अगर इरादे नेक और मेहनत सच्ची हो, तो मंजिल खुद-ब-खुद मिल जाती है.

About the Author

Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें



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