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Hyderabad Nizam Museum Facts: हैदराबाद के निजाम म्यूजियम में रखी 25 किलो सोने की कुर्सी आज भी दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करती है. यह कुर्सी आखिरी निजाम नवाब मीर उस्मान अली खान के 25 साल के शासन के जश्न के लिए 1937 में बनाई गई थी. म्यूजियम में दुनिया की सबसे लंबी 176 फीट की अलमारी और हीरों से जड़ा टिफिन बॉक्स भी मौजूद है. यह स्थान हैदराबाद की उस दौर की समृद्धि का प्रतीक है जब यहाँ के निजाम दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में गिने जाते थे. इतिहास प्रेमियों के लिए पुरानी हवेली स्थित यह म्यूजियम एक बेहतरीन गंतव्य है.
हैदराबाद. इतिहास के पन्नों में हैदराबाद की रियासत अपनी बेशुमार दौलत और शान-ओ-शौकत के लिए हमेशा चर्चा में रही है. हैदराबाद के इसी वैभव को समझने के लिए पुरानी हवेली स्थित ‘निजाम म्यूजियम’ एक प्रमुख केंद्र है. यहाँ रखी हर एक वस्तु अपने आप में एक शाही कहानी बयां करती है, लेकिन पर्यटकों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा जिस चीज़ की होती है, वह है आखिरी निजाम नवाब मीर उस्मान अली खान बहादुर का स्वर्ण सिंहासन. यह सिंहासन दरअसल सोने की परत वाली एक ऐसी कुर्सी है, जो निजाम के अथाह वैभव का प्रतीक मानी जाती है.
निजाम म्यूजियम के गाइड के अनुसार, यह कुर्सी महज फर्नीचर का कोई टुकड़ा नहीं है. इसे साल 1937 में निजाम के शासन के 25 साल पूरे होने यानी ‘रजत जयंती’ (Silver Jubilee) के विशेष अवसर पर तैयार करवाया गया था. हैरान करने वाली बात यह है कि दुनिया के सबसे अमीर आदमियों में शुमार निजाम इस कुर्सी पर अपने पूरे जीवन में केवल एक दिन ही बैठे थे. इस विशेष दिन पर उन्होंने अपनी प्रजा और दुनिया भर से आए गणमान्य व्यक्तियों से जो कीमती नज़राने और तोहफे स्वीकार किए थे, वे आज भी म्यूजियम की शोभा बढ़ा रहे हैं. इस कुर्सी के पिछले हिस्से पर सोने की मोटी कोटिंग की गई है, जिसमें लगभग 25 किलो तक सोना लगा हुआ है. कुर्सी के ऊपरी हिस्से में अरबी भाषा में बेहद खूबसूरत नक्काशी की गई है, जो इसकी भव्यता में चार चाँद लगाती है.
300 साल पुरानी हवेली और दुनिया की सबसे लंबी वॉर्डरोब
यह म्यूजियम जिस पुरानी हवेली में स्थित है, वह लगभग 300 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत है. इसे ‘हवेली खादिम’ के नाम से भी जाना जाता है. इसकी वास्तुकला 18वीं सदी की यूरोपीय शैली की झलक पेश करती है. इस हवेली का सबसे आकर्षक हिस्सा दुनिया की सबसे लंबी वॉर्डरोब (अलमारी) है, जो करीब 176 फीट लंबी है. कहा जाता है कि छठे निजाम नवाब मीर महबूब अली खान को कपड़े दोहराने की आदत नहीं थी, इसलिए उनके विशाल संग्रह के लिए यह दो मंजिला अलमारी बनाई गई थी.
आम लोगों के लिए विरासत का दीदार
साल 2000 में आम जनता के लिए खोले गए इस म्यूजियम में हीरों और माणिकों से जड़ा हुआ टिफिन बॉक्स, चांदी के इत्रदान और दुर्लभ हथियारों का संग्रह मौजूद है. यह म्यूजियम शनिवार से बृहस्पतिवार तक सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है. यहाँ प्रवेश के लिए बड़ों का टिकट 100 रुपए और बच्चों का 50 रुपए निर्धारित है. यह जगह आज भी उस दौर की याद दिलाती है जब हैदराबाद रियासत का डंका पूरी दुनिया में बजता था.
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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें


