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मुंबई इंडियंस, CSK या किसी और टीम के पास वैभव सूर्यवंशी को पाने के रास्ते क्या हैं?

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IPL का सबसे चर्चित रास्ता है ट्रेड. इसी नियम के जरिए संजू सैमसन राजस्थान रॉयल्स से CSK गए. नियम ये है कि हर सीजन खत्म होने के एक महीने बाद ट्रेडिंग विंडो खुलती है और अगली नीलामी से एक हफ्ते पहले बंद होती है. नीलामी के बाद फिर एक विंडो खुलती है और अगले सीजन के एक महीने पहले तक चलती है.

इस विंडो में तीन तरह के सौदे हो सकते हैं, सिर्फ पैसों में यानी कैश डील, खिलाड़ी के बदले खिलाड़ी, या दोनों का मिला-जुला रूप. लेकिन यहां तीन शर्तें एकसाथ पूरी होनी चाहिए. पहली, राजस्थान रॉयल्स की सहमति. दूसरी, वैभव की खुद की सहमति. तीसरी, BCCI की मंजूरी. ESPNcricinfo और आधिकारिक IPL नियमों के मुताबिक, किसी भी ट्रेड में खरीदने वाली टीम पहले BCCI को एक लेटर भेजती है. उसके बाद बेचने वाली टीम के पास 48 घंटे होते हैं जवाब देने के लिए. अगर राजस्थान ने मना कर दिया, खेल खत्म.

ट्रेड में एक और दिलचस्प चीज है, ट्रांसफर फीस. मुंबई इंडियंस ने हार्दिक पंड्या को गुजरात टाइटंस से वापस लिया था, जिसमें एक बड़ी रकम ट्रांसफर फी के तौर पर गुजरात को दी गई थी. यह रकम टीम के नीलामी बजट पर असर नहीं डालती, और इसकी कोई ऊपरी सीमा नहीं है. यानी अगर मुंबई इंडियंस वैभव को चाहती है, तो वह राजस्थान को करोड़ों का ट्रांसफर फी दे सकती है, लेकिन राजस्थान की “हां” के बिना यह सब बेकार है.

साफ बात: ट्रेड से वैभव तभी जाएंगे, जब राजस्थान खुद उन्हें जाने देना चाहे.

रास्ता 2: मेगा ऑक्शन, वह मौका जब राजस्थान की ताकत कम हो जाती है

यह सबसे बड़ा और सबसे असरदार रास्ता है. IPL में हर कुछ साल पर एक ‘मेगा ऑक्शन’ होता है, जहां सभी टीमें अपनी पूरी स्क्वॉड को लगभग खाली करके नए सिरे से बनाती हैं. IPL 2025 भी इसी तरह का मेगा ऑक्शन था, जिसमें वैभव 1.1 करोड़ में राजस्थान रॉयल्स ने खरीदे थे. IPL गवर्निंग काउंसिल के आधिकारिक नियमों के अनुसार, मेगा ऑक्शन से पहले हर टीम अधिकतम 6 खिलाड़ी ही रिटेन कर सकती है, इनमें से अधिकतम 5 ‘कैप्ड’ जिन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट खेला हो और अधिकतम 2 ‘अनकैप्ड’ खिलाड़ी.

यहां वैभव के लिए एक दिलचस्प मोड़ है. अगर अगले मेगा ऑक्शन तक वैभव भारत के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेल चुके होंगे, तो वे “कैप्ड” खिलाड़ी बन जाएंगे. उस वक्त राजस्थान के पास यशस्वी जायसवाल, रियान पराग, ध्रुव जुरेल, जोफ्रा आर्चर जैसे नाम भी होंगे. अगर राजस्थान के पास केवल 6 स्लॉट हैं और 7-8 बड़े नाम हैं, तो कोई एक बाहर होगा. लेकिन क्या राजस्थान वैभव को बाहर करेगी? व्यावहारिक रूप से देखें, 17-18 साल के उस वैभव को, जो तब तक शायद भारत का नियमित T20 ओपनर बन चुके होंगे? बाहर न जाने दें. मगर, सूर्यवंशी अगर रिटेन नहीं हुए, तो ऑक्शन पूल में आना पड़ेगा. और तब कोई भी टीम बोली लगा सकती है.

साफ बात: मेगा ऑक्शन ही वह इकलौता रास्ता है जहां राजस्थान की मर्जी के बिना, नियमों की वजह से, वैभव किसी और टीम के पास जा सकते हैं.

रास्ता 3: RTM कार्ड, राजस्थान का दांव

मान लीजिए मेगा ऑक्शन में किसी वजह से वैभव रिटेन नहीं हुए और वे ऑक्शन पूल में आ गए. अब CSK ने उन पर 25 करोड़ की बोली लगाई. क्या राजस्थान खाली हाथ बैठेगी? नहीं. यहां काम आता है RTM, यानी “Right to Match” कार्ड. IPL 2025 मेगा ऑक्शन से यह नियम वापस आया है. इसके तहत अगर राजस्थान के पास RTM कार्ड बचा है, तो वे CSK की 25 करोड़ की बोली की बराबरी कर सकते हैं और वैभव को वापस ले सकते हैं. लेकिन एक नया पेच भी है. राजस्थान जब RTM इस्तेमाल करने की बात कहे, तो CSK के पास एक और मौका होता है, वे अपनी बोली और बढ़ा सकते हैं. और फिर राजस्थान को तय करना होगा, उस बढ़ी हुई बोली की बराबरी करनी है या नहीं. यानी RTM एक बीमा पॉलिसी की तरह है, लेकिन यह बीमा तभी काम आएगा जब राजस्थान ने पहले RTM स्लॉट बचाकर रखा हो और वैभव को रिटेन नहीं किया हो.

साफ बात: RTM राजस्थान की ढाल है. इसके रहते, ऑक्शन में भी कोई और टीम वैभव को आसानी से नहीं ले जा सकती.

वैभव सूर्यवंशी ने जसप्रीत बुमराह को एक ओवर में दो छक्के मारे थे.

रास्ता 4: खिलाड़ी खुद चाहे, तो क्या होगा?
यह सबसे दिलचस्प सवाल है. क्या होगा अगर वैभव खुद कहें, “मैं राजस्थान छोड़ना चाहता हूं”? नियम यह कहता है, खिलाड़ी अपनी टीम से रिलीज का अनुरोध कर सकता है. लेकिन अंतिम फैसला टीम का होता है. चूंकि कॉन्ट्रैक्ट टीम के पास है, इसलिए राजस्थान अगर नहीं माने तो वैभव जा नहीं सकते. हां, हार्दिक पंड्या वाले मामले में एक रास्ता यह था कि खिलाड़ी ने “अपनी पुरानी टीम में वापस जाने की इच्छा जताई”, और गुजरात टाइटंस ने उन्हें मुंबई को ट्रेड कर दिया. लेकिन यह गुजरात टाइटंस की मर्जी थी, किसी जबरदस्ती का नतीजा नहीं. वैभव के मामले में, अगर वे राजस्थान से कहें कि वे कहीं और खेलना चाहते हैं, तो राजस्थान उन्हें ट्रेड कर सकती है या नहीं भी. यह पूरी तरह राजस्थान के हाथ में है.

साफ बात: खिलाड़ी अनुरोध कर सकता है, खुद फैसला नहीं ले सकता.

कोई कितने भी पैसे दे दे फिर भी?
अक्सर लोग सोचते हैं, क्या मुंबई इंडियंस या CSK जैसी अमीर टीमें सीधे राजस्थान को 100 करोड़ का ऑफर देकर वैभव को खरीद सकती हैं?

जवाब है, हां और नहीं. ट्रांसफर फी की कोई ऊपरी सीमा नहीं है, यानी कोई टीम राजस्थान को जितनी चाहे उतनी रकम दे सकती है. लेकिन यह रकम राजस्थान की ‘हां’ नहीं खरीद सकती, क्योंकि राजस्थान को यह तय करने का पूरा हक है कि वे किसी भी खिलाड़ी को जाने देना चाहते हैं या नहीं. और यहां एक और बात, वैभव को उनका कॉन्ट्रैक्ट अमाउंट ही मिलेगा, वो पैसा नहीं जो किसी टीम ने उन्हें खरीदने के लिए खर्च किया है.

साफ बात: पैसे से राजस्थान को मनाया जा सकता है, मजबूर नहीं किया जा सकता.

तो आखिर में, क्या वैभव हमेशा राजस्थान रॉयल्स में रहेंगे?
अगर सभी नियमों को एक साथ देखें, तो तस्वीर यह बनती है. जब तक राजस्थान रॉयल्स नहीं चाहती, कोई ट्रेड संभव नहीं. जब तक मेगा ऑक्शन में RTM कार्ड उनके पास है, कोई और टीम उन्हें नीलामी में भी नहीं पा सकती. और जब तक वैभव खुद नहीं चाहते, कोई भी सौदा आगे बढ़ ही नहीं सकता. IPL का पूरा ढांचा इस तरह बना है कि एक खिलाड़ी को बिना तीन पक्षों की सहमति के कहीं नहीं ले जाया जा सकता, खिलाड़ी, बेचने वाली टीम, और BCCI. इनमें से एक भी ‘नहीं’ हो तो मामला रुक जाता है

जिस दिन राजस्थान रॉयल्स ने वैभव को 1.1 करोड़ में खरीदा था, शायद उन्हें अंदाजा नहीं था कि वे क्रिकेट के इतिहास की सबसे सस्ती और सबसे महंगी खरीदारी एकसाथ कर रहे हैं. सस्ती इसलिए कि 1.1 करोड़ में, और महंगी इसलिए कि अगले 10-15 साल तक कोई दूसरी टीम उन्हें पाने के लिए तरसती रहेगी. और नियम कहते हैं, तरसती ही रहेगी, जब तक राजस्थान नहीं माने.



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