बिग डील! भारत-रूस मिलकर बनाएंगे एडवांस ड्रोन और सैटेलाइट, देश में बनेगी नई हाई-टेक लैब

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बिग डील! भारत-रूस मिलकर बनाएंगे एडवांस ड्रोन और सैटेलाइट, बनेगी नई हाई-टेक लैब

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भारत और रूस के बीच एक बड़ी डील हुई है. कानपुर में एक हाईटेक लैब बनाई जाएगी. जहां रूस में तकनीक का पावरहाउस इनोप्राक्टिका छात्रों को ट्रेनिंग देगी. जो भी छात्र यहां से ट्रेनिंग लेकर निकलेंगे, उन्हें नौकरी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, बल्कि रक्षा क्षेत्र, इसरो से लेकर प्राइवेट ड्रोन स्टार्टअप्स तक में हाथों-हाथ लिया जाएगा.

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भारत रूस के बीच बड़ी डील हुई है. (AI Image)

भारत और रूस की दोस्ती अब सिर्फ हथियार खरीदने और बेचने तक सीमित नहीं रह गई है. दोनों देशों ने भविष्य की तकनीक पर एक साथ राज करने के लिए हाथ मिला लिया है. रक्षा और अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी डील हुई है, जिसके तहत भारत और रूस मिलकर ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक के महारथी तैयार करेंगे. इस नए समझौते का मकसद है कि भारत के युवाओं को दुनिया की सबसे लेटेस्ट तकनीक सिखाई जाए, ताकि वे खुद देश में ही एडवांस ड्रोन और सैटेलाइट बना सकें. यह भारत को तकनीक के मामले में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है.

इस प्रोजेक्‍ट का सेंटर प्‍वाइंट उत्तर प्रदेश का कानपुर बनने जा रहा है. कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कैंपस में एक बिल्कुल नई और हाई-टेक यूएवी (ड्रोन) लैब स्थापित की जाएगी. इस लैब का फोकस सिर्फ थ्योरी पढ़ाने पर नहीं होगा. आरटी न्‍यूज की र‍िपोर्ट के मुताबिक- यहां ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक से जुड़े खास सर्टिफिकेशन कोर्स शुरू किए जा रहे हैं. इसका मतलब यह है कि छात्र क्लासरूम में बैठकर सिर्फ किताबों का रट्टा नहीं मारेंगे, बल्कि वे असली पुर्जों के साथ काम करेंगे. वे सीखेंगे कि एक ड्रोन कैसे डिजाइन होता है, उसके सॉफ्टवेयर कैसे काम करते हैं और उसे आसमान में कैसे कंट्रोल किया जाता है.

रूस में तकनीक का पावरहाउस इनोप्राक्टिका देगी ट्रेनिंग

इस पूरे प्रोजेक्ट में जो सबसे दिलचस्प बात है, वह है रूस की सीधी एंट्री. छात्रों को ट्रेनिंग देने और तकनीक सिखाने के लिए मॉस्को का मशहूर ‘इनोप्राक्टिका टेक्नोलॉजी हब’ भारतीय कॉलेजों के साथ मिलकर काम कर रहा है. इनोप्राक्टिका को रूस में तकनीक और इनोवेशन का पावरहाउस माना जाता है. अब वहां के वैज्ञानिक और एक्सपर्ट भारतीय युवाओं को बताएंगे कि ड्रोन और सैटेलाइट की दुनिया में नया क्या चल रहा है. यह भारतीय छात्रों के लिए एक लॉटरी लगने जैसा है, क्योंकि उन्हें दुनिया की सबसे बेहतरीन एयरोस्पेस तकनीक सीधे उन रूसी गुरुओं से सीखने को मिलेगी, जो इस फील्ड के दिग्गज माने जाते हैं.

रूस के राजदूत ने बताया ऐत‍िहास‍िक

भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने भी इस समझौते को लेकर अपनी खुशी जाहिर की है. उन्होंने कानपुर के सीएसजेएमयू में शुरू होने वाले इस नए कोर्स और यूएवी लैब के निर्माण को भारत-रूस की तकनीकी दोस्ती में एक ऐतिहासिक कदम बताया है. जब किसी देश का राजदूत इस तरह का बयान देता है, तो समझ लीजिए कि बात बहुत बड़ी है. अलीपोव की बातों से साफ है कि रूस अब भारत को सिर्फ अपना एक बाजार नहीं मानता, बल्कि वह चाहता है कि भारत के युवा भी इस लेटेस्ट तकनीक को सीखें और दोनों देश मिलकर नए-नए आविष्कार करें.

इतनी इंपॉर्टेंट क्‍यों यह डील

भविष्य सिर्फ ड्रोन और सैटेलाइट का ही है. युद्ध के मैदान में सटीक हमला करना हो, बॉर्डर की निगरानी करनी हो, खेतों में खाद छिड़कना हो या फिर दूर-दराज के इलाकों में दवाइयां पहुंचानी हों, हर जगह ड्रोन का ही इस्तेमाल हो रहा है. सरकार का भी सपना है कि आने वाले कुछ सालों में देश को ग्लोबल ड्रोन हब बना दिया जाए. लेकिन यह सपना तभी पूरा होगा जब हमारे पास ऐसे युवा इंजीनियर हों, जिन्हें इस तकनीक की नस-नस की जानकारी हो. यह नई लैब ठीक ऐसे ही धाकड़ युवाओं की फौज तैयार करेगी.

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Gyanendra Mishra

Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें



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