अरबों डॉलर का निवेश, लाखों नौकरियां… भारत और जापान की जुगलबंदी बदलेगी हिंद-प्रशांत का नक्शा? चीन की टेंशन बढ़ी!

Date:


होमताजा खबरदेश

भारत-जापान की जुगलबंदी से बदल जाएगा हिंद-प्रशांत का पूरा नक्शा? टेंशन में चीन!

Last Updated:

India Japan Relations: भारत और जापान के बीच आर्थिक और रणनीतिक रिश्ते अब एक नए सुनहरे अध्याय में प्रवेश कर चुके हैं. जापान के विदेश मंत्रालय ने भारत में निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक स्पेशल ऑफिस खोलने का फैसला किया है. यह कदम अगस्त 2025 के शिखर सम्मेलन में तय किए गए 10 ट्रिलियन येन के निवेश लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम है.

Zoom

भारत बन रहा है जापान की पहली पसंद! (AI Photo)

नई दिल्ली: जापान के विदेश मंत्रालय ने भारत के साथ आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए एक डेडिकेटेड ऑफिस खोलने का ऐलान किया है. यह ऑफिस विशेष रूप से उन जापानी कंपनियों की मदद करेगा जो भारत में अपना बिजनेस फैलाना चाहती हैं. निक्केई एशिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह पहल वैश्विक सप्लाई चेन में हो रहे बदलावों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की भू-राजनीति को देखते हुए की गई है. जापान अब भारत को एक महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक पार्टनर के रूप में देख रहा है.

भारत में ‘ग्रो’ क्यों नहीं कर पा रहीं जापानी कंपनियां?

जापानी कंपनियां लंबे समय से भारत के बढ़ते बाजार में दिलचस्पी दिखा रही हैं. इसके बावजूद उनकी मौजूदगी उतनी नहीं बढ़ी जितनी उम्मीद थी.

  • 2024 के आंकड़ों के मुताबिक भारत में 1,434 जापानी कंपनियां काम कर रही हैं. यह संख्या 2018 के बाद से लगभग स्थिर बनी हुई है. इसके मुकाबले थाईलैंड में करीब 6,000 और सिंगापुर में 4,500 जापानी कंपनियां सक्रिय हैं.
  • जापानी फर्मों के लिए भारत के अलग-अलग राज्यों के नियम, जटिल टैक्स स्ट्रक्चर और कानूनी प्रक्रियाओं में स्पष्टता की कमी बड़ी बाधाएं रही हैं. नया ऑफिस इन्हीं समस्याओं को सुलझाने के लिए भारत सरकार के साथ बातचीत में पुल का काम करेगा.

वित्त वर्ष 2024 में भारत में 50 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया. इसमें जापान 2.5 अरब डॉलर के साथ छठे नंबर पर रहा. जापान अब अपनी इस हिस्सेदारी को बढ़ाना चाहता है.

जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कॉरपोरेशन के सर्वे में भारत को लगातार चौथे साल सबसे भरोसेमंद बाजार माना गया है.

शिखर सम्मेलन 2025 के वादे कैसे हो रहे पूरे?

यह नई पहल अगस्त 2025 में हुए भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन की कड़ी है. उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के बीच अहम समझौते हुए थे. दोनों देशों ने अगले 10 सालों में भारत में 10 ट्रिलियन येन (करीब 62.6 अरब डॉलर) के निजी निवेश का लक्ष्य रखा है. इसमें सेमीकंडक्टर, एआई, क्लीन एनर्जी और हेल्थकेयर जैसे 8 प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस है. हाल ही में जापान ने बेंगलुरु मेट्रो और महाराष्ट्र के हेल्थकेयर प्रोजेक्ट्स के लिए 16,420 करोड़ रुपये के लोन को भी मंजूरी दी है.

रणनीतिक साझेदारी में क्वाड की क्या भूमिका है?

भारत और जापान के बीच मजबूत होते ये रिश्ते सिर्फ व्यापार तक ही सीमित नहीं हैं. दोनों देश क्वाड (Quad) के सदस्य हैं और एक स्वतंत्र और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के पक्षधर हैं. जापान का मानना है कि भारत के साथ आर्थिक जुड़ाव बढ़ाने से इस क्षेत्र में स्थिरता आएगी. जहां भारत अपनी विदेश नीति में कई देशों के साथ संतुलन बनाकर चल रहा है, वहीं जापान आर्थिक निवेश के जरिए इस दोस्ती को और गहरा करना चाहता है. यह नया ऑफिस न केवल निवेश को आसान बनाएगा, बल्कि दोनों देशों के बीच तकनीकी और रणनीतिक तालमेल को भी नई ऊंचाई देगा.

About the Author

authorimg

दीपक वर्माDeputy News Editor

दीपक वर्मा एक दशक से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वह News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. दीपक मुख्‍य रूप से विज्ञान, राजनीति, भारत के आंतरिक घटनाक्रमों औ…और पढ़ें



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related