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सलील अंकोला का जीवन प्रसिद्धि, संघर्ष और फिर से उठ खड़े होने की एक अद्भुत दास्तान है. एक सलिल अंकोला मुंबई के एक बेहद प्रतिभाशाली तेज गेंदबाज थे. उनका अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर साल 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ ऐतिहासिक टेस्ट मैच से शुरू हुआ था. यह वही मैच था जिसमें क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर और पाकिस्तान के दिग्गज तेज गेंदबाज वकार यूनिस ने भी अपना डेब्यू किया था.
सचिन तेंदुलकर के साथ किया टेस्ट डेब्यू, फिर चोट और शराब ने किया करियर बर्बाद
नई दिल्ली. बॉलीवुड के कुछ गाने क्रिकेट केल से बहुत गहरा नाता रखते है जिनमें किशोर कुमार का गाया जिंदगी का सफर है ये कैसा सफर कोई समझा नहीं कोई जाना नही. मैदान पर यह उतार-चढ़ाव, सफलता और असफलता की एक ऐसी कहानी है, जहाँ कभी आप आसमान छूते हैं, तो कभी जमीन पर आ गिरते हैं. भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसे खिलाड़ी आए जिन्होंने अपनी प्रतिभा से सबको प्रभावित किया, लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। इन्हीं में से एक नाम है सलिल अंकोला.
सलील अंकोला का जीवन प्रसिद्धि, संघर्ष और फिर से उठ खड़े होने की एक अद्भुत दास्तान है. एक सलिल अंकोला मुंबई के एक बेहद प्रतिभाशाली तेज गेंदबाज थे. उनका अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर साल 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ ऐतिहासिक टेस्ट मैच से शुरू हुआ था. यह वही मैच था जिसमें क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर और पाकिस्तान के दिग्गज तेज गेंदबाज वकार यूनिस ने भी अपना डेब्यू किया था. इतने बड़े दिग्गजों के साथ करियर की शुरुआत करने के बावजूद, सलिल की किस्मत ने उनके साथ क्रूर मजाक किया.
“अंकोलाड” से सलिल का कनेक्शन
लगातार चोटों और खराब फॉर्म के कारण सलिल को टीम में चुना जाता और फिर बिना पर्याप्त मौके दिए ड्रॉप कर दिया जाता था. क्रिकेट जगत में उनका यह आना-जाना इस कदर बढ़ गया कि क्रिकेट के गलियारों में “अंकोलाड” शब्द का जन्म हुआ. यह मुहावरा उन खिलाड़ियों के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा, जिन्हें उनकी प्रतिभा के बावजूद कभी टीम में जमने का सही और पूरा मौका नहीं मिला.
पिच से परदे तक
साल 2001 आते-आते सलिल अंकोला ने क्रिकेट की अनिश्चितताओं से तंग आकर खेल से पूरी तरह दूरी बना ली. उन्होंने अपनी नई पारी की शुरुआत अभिनय की दुनिया में की. टीवी इंडस्ट्री में उन्हें जल्द ही बड़ी सफलता मिली. स्टार प्लस के मशहूर हॉरर शो ‘शशश… कोई है’में निभाया गया उनका ‘विक्राल’ का किरदार घर-घर में लोकप्रिय हो गया. संजय दत्त के साथ मूवी में काम किया और कुछ साल पहले शनिदेव के किरदार में वो लोगों के दिल में अपनी जगह बना गए. एक अभिनेता के रूप में उनका करियर चमक रहा था, लेकिन अंदर ही अंदर क्रिकेट को इतनी जल्दी छोड़ने का मलाल और गुस्सा उनके दिल में सुलग रहा था. ग्लैमर की इस दुनिया के पीछे एक गहरा खालीपन छिपा था.
व्यक्तिगत जीवन का बिखराव और अंधकार
साल 2010 के आसपास सलिल अंकोला का व्यक्तिगत जीवन पूरी तरह बिखर गया उनका वैवाहिक जीवन तलाक के मोड़ पर आकर खत्म हो गया. इस मानसिक तनाव और अकेलेपन ने उन्हें शराब की लत की गर्त में धकेल दिया. स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि वे अपने जीवन के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए. एक समय ऐसा भी आया जब इस पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर और मशहूर टीवी स्टार के पास रहने के लिए घर नहीं था और उन्हें अपनी ही कार में दिन गुजारने पड़े.
पुनरागमन: राख से उठ खड़ा होना
जैसा कि कहा जाता है, “जब तक खेल खत्म नहीं होता, तब तक आप हारे नहीं हैं. सलिल अंकोला ने हार नहीं मानी. उन्होंने अपनी कमियों और लत से लड़ाई लड़ी. रिहैब सेंटर में समय बिताने और खुद को मानसिक व शारीरिक रूप से मजबूत करने के बाद उन्होंने एक बार फिर जीवन की मुख्यधारा में वापसी की. उनकी इस हिम्मत का इनाम उन्हें तब मिला जब क्रिकेट ने उन्हें दोबारा गले लगाया. मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने उन्हें घरेलू क्रिकेट का चयनकर्ता बनाया और बाद में वे भारतीय क्रिकेट टीम के राष्ट्रीय चयनकर्ता के रूप में भी चुने गए. जिस खेल ने उन्हें कभी अधूरा छोड़ा था, उसी खेल के शीर्ष पर बैठकर उन्होंने दोबारा अपनी पहचान बनाई. सलिल अंकोला की कहानी हमें सिखाती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, यदि आपके अंदर लड़ने का जज्बा है, तो आप वापसी कर सकते हैं.
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें


