नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट के गलियारों में कुछ चेहरे ऐसे आते हैं जिनकी तुलना दिग्गज खिलाड़ियों से इतनी जल्दी कर दी जाती है कि उनकी अपनी पहचान उस तुलना के पीछे छिप जाती है. साल 2008 में जब विराट कोहली की कप्तानी में भारतीय टीम ने अंडर-19 वर्ल्ड कप जीता, तो उस टीम के एक बल्लेबाज ने सबका ध्यान खींचा. झारखंड का एक लंबा-चौड़ा लड़का, जिसके कंधे तक लटकते बाल थे, शरीर की बनावट वैसी ही मजबूत थी और बल्ले से निकलने वाले शॉट महेंद्र सिंह धोनी की याद दिलाते थे. नाम था सौरभ तिवारी. उन्हें रातों-रात ‘अगला धोनी’ कहा जाने लगा, लेकिन आज वह लड़का कहां है.
सौरभ तिवारी (Saurabh Tiwary) और एमएस धोनी के बीच समानताएं सिर्फ उनके शहर जमशेदपुर-रांची या उनके लंबे बालों तक सीमित नहीं थीं. सौरभ के खेलने का तरीका भी बेहद आक्रामक था. 2008 के अंडर-19 वर्ल्ड कप में उन्होंने मध्यक्रम में विराट कोहली का बखूबी साथ निभाया था. उस टूर्नामेंट में उन्होंने करीब 30 की औसत से रन बनाए थे, लेकिन उनकी उन छोटी और प्रभावी पारियों ने भारत को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई थी. उनकी प्रतिभा को देखते हुए आईपीएल के पहले ही सीजन में मुंबई इंडियंस ने उन्हें अपनी टीम का हिस्सा बनाया.
सौरभ तिवारी जल्द ही इंटरनेशनल क्रिकेट से दूर हो गए.
साल 2010 का आईपीएल सीजन सौरभ तिवारी के करियर का ‘गोल्डन पीरियड’ साबित हुआ. सचिन तेंदुलकर के साथ बल्लेबाजी करते हुए इस युवा खिलाड़ी ने 16 मैचों में 419 रन कूट डाले. उनकी पावर-हिटिंग और स्पिनरों के खिलाफ लंबे छक्के मारने की काबिलियत देखकर सेलेक्टर्स प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके. उसी साल उन्हें भारतीय टीम की नीली जर्सी पहनने का मौका मिला.
टीम इंडिया में एंट्री और फिर खामोशी
अक्टूबर 2010 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विशाखापट्टनम में सौरभ ने अपना वनडे डेब्यू किया. मैदान पर वही लंबे बाल उड़ रहे थे और झारखंड का दूसरा ‘धोनी’ स्क्रीन पर नजर आ रहा था. उन्होंने अपने छोटे से इंटरनेशनल करियर में महज 3 वनडे मैच खेले, जिसमें वह दो बार नाबाद रहे और कुल 49 रन बनाए. आंकड़े खराब नहीं थे, लेकिन उस दौर की भारतीय टीम में प्रतिस्पर्धा इतनी कड़ी थी कि एक-दो खराब मैचों या चोट के बाद वापसी करना किसी चुनौती से कम नहीं था. धीरे-धीरे सौरभ टीम इंडिया की स्कीम से बाहर होने लगे. धोनी के साथ तुलना, जो कभी उनकी ताकत हुआ करती थी, अब उनके करियर का सबसे बड़ा दबाव बन गई. लोग उनमें धोनी का अक्स ढूंढ रहे थे, जबकि सौरभ को अपनी खुद की एक अलग पहचान बनानी थी.
चोटें, वजन और आईपीएल का उतार-चढ़ाव
सौरभ तिवारी के गायब होने के पीछे एक बड़ी वजह उनकी फिटनेस और बढ़ती चोटें भी रहीं. एक समय वह कंधे और घुटने की समस्याओं से जूझने लगे, जिससे उनकी फील्डिंग और रनिंग-बिटवीन-द-विकेट पर असर पड़ा. आईपीएल में भी उनकी चमक फीकी पड़ने लगी. मुंबई इंडियंस से रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर जाने के बाद, उन्हें 3.5 करोड़ रुपये की बड़ी बोली मिली, लेकिन वह उस कीमत के साथ न्याय नहीं कर पाए. इसके बाद वह दिल्ली कैपिटल्स और राइजिंग पुणे सुपरजायंट्स जैसी टीमों में भी गए, पर वह 2010 वाली लय दोबारा कभी नजर नहीं आई.
हैरानी की बात यह है कि जिस खिलाड़ी को दुनिया ने भुला दिया था, उसने घरेलू क्रिकेट में कभी हार नहीं मानी. झारखंड के लिए उन्होंने सालों तक रन बनाए.उन्होंने अपने फर्स्ट-क्लास करियर में 115 मैचों में 8000 से अधिक रन बनाए, जिसमें 22 शतक शामिल रहे. लिस्ट-ए क्रिकेट में भी उन्होंने लगभग 4000 रन जोड़े. घरेलू आंकड़ों को देखें तो वह एक महान खिलाड़ी नजर आते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह सिर्फ एक ‘फ्लैश’ बनकर रह गए.
कहां हैं अब ‘अगले धोनी’?
समय के साथ सौरभ तिवारी ने अपने लुक को बदला, बाल छोटे किए, लेकिन ‘अगला धोनी’ वाला टैग कभी नहीं छूटा. साल 2024 की शुरुआत में 34 साल की उम्र में सौरभ ने पेशेवर क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी. उनका आखिरी बड़ा मुकाबला झारखंड के लिए रणजी ट्रॉफी में रहा. सौरभ इस समय झारखंड क्रिकेट एसोसिएशन में सचिव हैं. सौरभ की कहानी भारतीय क्रिकेट के उन अनगिनत सितारों की याद दिलाती है, जो चमके तो बहुत तेज, लेकिन वक्त की धूल में कहीं ओझल हो गए. आज जहां उनके साथी विराट कोहली वर्ल्ड क्रिकेट के बादशाह बन चुके हैं, वहीं सौरभ तिवारी एक ऐसे ‘अनसंग हीरो’ के रूप में विदा हुए जिन्होंने धोनी की परछाई में अपना करियर शुरू किया और उसी तुलना के बोझ तले दबकर एक अधूरा सफर छोड़ गए. वह आज मैदान पर नहीं हैं, लेकिन क्रिकेट इतिहास में जब भी 2008 के उस वर्ल्ड चैंपियन बैच की बात होगी, झारखंड के उस ‘लंबे बालों वाले लड़के’ का नाम जरूर लिया जाएगा.


