एक ब्रह्मोस से लैस मिसाइल फ्रिगेट, दूसरा एंटी-सबमरीन तो तीसरा सर्वे वेसल; नौसेना में सप्‍ताह भर में शामिल होंगे 3 शिकारी

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ब्रह्मोस लैस फ्रिगेट, सबमरीन हंटर और सर्वे वेसल; नौसेना को मिले 3 शिकारी

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भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए एक साथ तीन स्वदेशी योद्धा तैयार हैं. इनमें नीलगिरी क्लास का गाइडेड मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट तारागिरी शामिल है जो ब्रह्मोस मिसाइल से लैस है. दूसरा दुश्मन की पनडुब्बियों का काल बनने वाला एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्राफ्ट अग्रे है. तीसरा समुद्री मैपिंग और सुरक्षित नेविगेशन के लिए अत्याधुनिक सर्वे वेसल संशोधक है. ये तीनों जहाज आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत पूरी तरह स्वदेशी तकनीक और मारक क्षमता से लैस हैं.

दूनागिरी- गाइडेड मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट: प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित 6700 टन वजनी ‘दूनागिरी’ अत्याधुनिक ‘ब्रह्मोस’ एंटी-शिप मिसाइल और ‘बराक-8’ लॉन्ग रेंज मिसाइल सिस्टम से लैस है. यह जहाज रडार को चकमा देने वाली स्टील्थ तकनीक से बना है. इसकी अधिकतम गति 30 नॉटिकल मील है और इसमें दो हेलीकॉप्टरों के लिए हैंगर की सुविधा मौजूद है.

INS Dunagiri News

दूनागिरी- टी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर: यह फ्रिगेट स्वदेशी टॉरपीडो ‘वरुणास्त्र’, एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर और मल्टी-फंक्शन रडार से सुसज्जित है. इसके निर्माण में लगभग 75% स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है. यह अत्याधुनिक कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए दुश्मन के हवाई और समुद्री हमलों का पता लगाकर उन्हें बीच हवा में ही नष्ट करने में सक्षम है.

ins agray

अग्रे- एंटी-सबमरीन वॉरफेयर: यह विशेष रूप से उथले पानी में दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजने और नष्ट करने के लिए बनाया गया है. यह हल-माउंटेड सोनार और वैरिएबल डेप्थ सोनार तकनीक से लैस है. इसमें लगे लाइटवेट टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर इसे समुद्र की गहराइयों में छिपे किसी भी खतरे के लिए काल बनाते हैं.

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INS Agray

अग्रे-एक बार में 3300 किलोमीटर सफर: अग्रे की अधिकतम गति 25 नॉटिकल मील प्रति घंटा है और यह लगभग 3300 किलोमीटर (1800 नॉटिकल मील) तक की दूरी तय कर सकता है. यह तट से 150 नॉटिकल मील तक की दूरी पर प्रभावी ढंग से निगरानी कर सकता है. इसमें 30 मिमी की नेवल गन भी लगी है जो इसे सुरक्षा प्रदान करती है.

ins sanshodhak commission

INS संशोधक- भारत का सर्वे वेसल: 110 मीटर लंबा संशोधक समुद्र तल की सटीक स्कैनिंग और हाइड्रोग्राफिक सर्वे करता है. यह सुनामी जैसी घटनाओं के बाद समुद्र के नीचे हुए बदलावों को दर्ज करता है और सुरक्षित नेविगेशन चार्ट तैयार करता है. इसके द्वारा बनाए गए मैप्स ही युद्धपोतों और व्यापारिक जहाजों को अदृश्य समुद्री चट्टानों से बचाते हैं.

ins sanshodhak

INS संशोधक- 25 दिन समंदर में बिताने की क्षमता: 3800 टन वजनी यह जहाज दो शक्तिशाली डीजल इंजनों की मदद से 18 समुद्री मील की रफ्तार पकड़ सकता है. यह लगातार 25 दिनों से अधिक समय तक समुद्र में रहकर मिशन पूरा करने की क्षमता रखता है. इसमें 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री लगी है और इसे नौसेना के डिजाइन ब्यूरो ने बनाया है.

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