Assembly Election News: 37000000000 रुपये से तय होगा बंगाल-असम समेत 5 राज्यों का चुनाव रिजल्ट! पढ़ें इनसाइड स्टोरी

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कोलकाता: राज्यों के चुनाव नजदीक आते ही सरकारें डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) घोषणाओं का दौर शुरू हो जाता है. असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों से पहले भी यही देखने को मिला है. इन राज्यों की सरकारों ने 37,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की रकम की योजनाओं का ऐलान किया है. ये रकम या तो आवंटित हो चुके हैं या वे बांटे जा रहे हैं. केरल की एक 3,000 करोड़ रुपये की योजना को छोड़कर बाकी सभी का ऐलान जनवरी और मार्च के बीच किया गया. यानी यह साफ है कि सभी राज्य सरकारों ने चुनाव को ध्यान में रखकर योजनाएं लॉन्च की हैं.

पिछले एक महीने के भीतर इन राज्यों की सरकारों ने लाभार्थियों के बैंक खाते में डायरेक्ट कैश ट्रांसफर करने में काफी तेजी दिखाई है. पिछले एक महीने में डायरेक्ट कैश, एक बार के ट्रांसफर या बढ़ी हुई मज़दूरी और पेंशन के ज़रिए 20,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की रकम बांटी गई है.

  • तमिलनाडु ने मार्च में 13,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा बांटे, जिसमें मौजूदा योजनाओं के लिए अग्रिम भुगतान के साथ-साथ पोंगल के तोहफ़े भी शामिल रहे.
  • पश्चिम बंगाल ने फ़रवरी-मार्च में 3,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा बांटे.
  • 10 मार्च को, असम ने एक ही दिन में मतदाताओं को 3,600 करोड़ रुपये बांटे.
  • गौर करें तो इन राज्यों की सरकारों ने ‘आचार संहिता’ (MCC) लागू होने से पहले के हफ़्तों में ही भुगतान को तेज़ी से निपटा दिया.

चुनाव से पहले महिलाओं की आई याद

  • तमिलनाडु में, मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने अपना पूरा चुनावी अभियान महिला मतदाताओं पर ही केंद्रित किया है. 4 जनवरी को, सरकार ने ‘चावल-श्रेणी’ का राशन कार्ड रखने वाले हर परिवार के लिए और श्रीलंका से आए तमिल शरणार्थियों के शिविरों में रहने वालों के लिए भी 3,000 रुपये के नकद ‘पोंगल तोहफ़े’ के रूप में दिए. इस योजना के दायरे में 2.22 करोड़ से ज़्यादा परिवार आए. सिर्फ़ नकद भुगतान वाला हिस्सा ही करीब 6,936 करोड़ रुपये का है, जो कि राज्य के वर्ष 2025-26 के 2.2 लाख करोड़ रुपये के ‘अपने कर राजस्व’ का 3% से थोड़ा ही ज़्यादा था.
  • इसके ठीक एक महीने बाद, डीएमके सरकार ने ‘कलाईनार मगलीर उरिमाई थोगई’ (KMUT) योजना के तहत 1.31 करोड़ महिलाओं के खातों में 5,000-5,000 रुपये जमा किए. इस रकम में 3,000 रुपये फ़रवरी, मार्च और अप्रैल महीनों के लिए मिलने वाली नियमित सहायता के तौर पर दिए गए. बाकी 2,000 रुपये को ‘ग्रीष्मकालीन सहायता’ (गर्मी के मौसम में मिलने वाली मदद) बताया गया. कुल भुगतान लगभग 6,550 करोड़ रुपये रहा, जिसमें अतिरिक्त हिस्सा 2,620 करोड़ रुपये का था. कुल मिलाकर, इस साल चुनाव से पहले महिलाओं के लिए की गई नकद सहायता कम से कम 9,556 करोड़ रुपये है, जो राज्य के अपने टैक्स राजस्व का लगभग 4.3 फीसदी है.
  • ज़्यादातर विधानसभा क्षेत्रों में महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज़्यादा होने के कारण, सभी पार्टियों ने इस वर्ग पर अपना ध्यान और तेज़ कर दिया है. डीएमके की पिछली सफलताओं का श्रेय कुछ हद तक महिलाओं के लिए मुफ़्त बस यात्रा और KMUT के तहत हर महीने 1,000 रुपये के सीधे बैंक ट्रांसफ़र जैसी योजनाओं को दिया जाता है. AIADMK और अभिनेता विजय की TVK जैसी विरोधी पार्टियों की ओर से भी इसी तरह के आर्थिक मदद के वादे किए गए हैं.

महिलाओं को पैसे बांटने में ममता बनर्जी की सरकार भी पीछे नहीं

पश्चिम बंगाल में, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार ने अपनी मुख्य योजना ‘लक्ष्मी भंडार’ पर और ज़्यादा ज़ोर दिया है. फरवरी 2026 के अंतरिम बजट में मासिक सहायता राशि में 500 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिससे यह सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए बढ़कर 1,500 रुपये और SC/ST लाभार्थियों के लिए 1,700 रुपये हो गई है.

इस योजना के तहत 2.2 करोड़ महिलाएं शामिल हैं, ऐसे में सिर्फ़ इस बढ़ोतरी पर ही सालाना लगभग 13,200 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. बजट में ‘बांग्लार युवा साथी’ योजना भी शुरू की गई है, जिसके तहत 21 से 40 वर्ष की आयु के उन बेरोज़गार युवाओं को हर महीने 1,500 रुपये दिए जाएंगे, जिन्होंने माध्यमिक परीक्षा पास कर ली है. इसके लिए शुरुआती तौर पर 5,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है.

इसके अलावा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं (280 करोड़ रुपये) के साथ-साथ नागरिक स्वयंसेवकों और ‘ग्रीन पुलिस’ (150 करोड़ रुपये) के मासिक मानदेय में 1,000 रुपये की बढ़ोतरी करने का भी वादा किया गया है. कुल मिलाकर, बंगाल के चुनाव से पहले किए गए इन अतिरिक्त कल्याणकारी वादों का खर्च लगभग 18,600 करोड़ रुपये बैठता है, जो राज्य के अपने कर राजस्व का लगभग 16.5–17% है; यह आंकड़ा इन पांचों राज्यों में सबसे ज़्यादा है.

साल 2021 में शुरू की गई ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना ने पिछले चुनावों में टीएमसी की जीत में अहम भूमिका निभाई थी, खासकर महिला मतदाताओं के बीच. यह ताज़ा बढ़ोतरी अब पार्टी के 2026 के चुनावी अभियान का मुख्य केंद्र बन गई है. इसे इस बात के सबूत के तौर पर पेश किया जा रहा है कि केंद्र सरकार की ओर से कथित तौर पर फंड की कमी के बावजूद, राज्य सरकार ने अपनी योजनाओं को लागू करना जारी रखा है.

‘अरुणोदय’ योजना के जरिए असम में सत्ता बरकरार रखने की तैयारी

असम में, BJP बंगाल की तरह ही कल्याणकारी योजनाओं के मामले में सफलता दोहराने के लिए अपनी ‘अरुणोदय’ योजना पर भरोसा कर रही है. 10 मार्च को, यानी मतदान से ठीक पहले, सरकार ने लगभग 40 लाख महिलाओं के खातों में 9,000-9,000 रुपये जमा किए. इस राशि में चार महीनों की किस्तें और ‘बोहाग बिहू’ के मौके पर दी जाने वाली अतिरिक्त राशि (टॉप-अप) शामिल थी.

सिर्फ़ एक दिन में हस्तांतरित की गई यह राशि 3,600 करोड़ रुपये थी, जो राज्य के सालाना अपने कर राजस्व (34,823 करोड़ रुपये) का 10% से भी ज़्यादा है. महिलाओं पर केंद्रित सीधे फ़ायदे वाले ट्रांसफ़र (DBT) ने पहले भी बेरोज़गारी और महंगाई को लेकर वोटरों के गुस्से को कम करने में मदद की है. इस भुगतान का पैमाना और समय BJP की रणनीति में इनकी अहमियत को दिखाता है.

केरल की वामपंथी सरकार ने ज़्यादा संस्थागत तरीका अपनाया है, लेकिन उसका राजनीतिक हिसाब-किताब भी वैसा ही है. अक्टूबर 2025 में, उसने सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 1,600 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये प्रति महीना कर दिया, जिससे लगभग 62 लाख बुज़ुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों को फ़ायदा हुआ. 400 रुपये की इस बढ़ोतरी से सालाना लगभग 2,976 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.

राज्य ने ‘स्त्री सुरक्षा’ नाम से एक नई योजना भी शुरू की है, जिसके तहत 35-60 साल की आर्थिक रूप से कमज़ोर महिलाओं और ट्रांस महिलाओं को 1,000 रुपये की मासिक पेंशन दी जाएगी. ये वे महिलाएं हैं जो मौजूदा योजनाओं के दायरे में नहीं आतीं. 31.34 लाख लाभार्थियों के लक्ष्य के साथ, इस योजना पर सालाना लगभग 3,800 करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद है.

पहली किस्तें 11 फ़रवरी को 10 लाख से कुछ ज़्यादा लाभार्थियों के खातों में जमा कर दी गईं. कुल मिलाकर, पेंशन में बढ़ोतरी और नई योजना पर लगभग 6,776 करोड़ रुपये खर्च करने का वादा किया गया है, जो केरल के अपने टैक्स रेवेन्यू का लगभग 7.4% है. वित्तीय संकट और भुगतान में देरी को लेकर आलोचना झेल रही सरकार के लिए यह संदेश साफ़ है- जन-कल्याणकारी योजनाओं को वापस नहीं लिया जाएगा.

पुडुचेरी जैसे छोटे वित्तीय आधार वाले केंद्र शासित प्रदेश ने भी इसी तरीके को अपनाया है. जनवरी के मध्य में, केंद्र शासित प्रदेश की सरकार ने 3.47 लाख PDS परिवारों के लिए 3,000 रुपये का पोंगल नकद उपहार और 750 रुपये की कीमत वाली एक सामानों की किट देने की मंज़ूरी दी.

नकद राशि लगभग 104 करोड़ रुपये है और पूरे पैकेज की कुल कीमत लगभग 130 करोड़ रुपये है, जो इसकी सालाना आमदनी का लगभग 1–1.2 फीसदी है.



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