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Ghazipur News : गाजीपुर के बाजारों में इन दिनों ‘पीला सोना’ चमक रहा है. शहद जैसी मिठास और 90% पानी से भरपूर ‘मयूरी तरबूज’ ने लाल तरबूज की बादशाहत को चुनौती दी है. विटामिन-A और बीटा-कैरोटीन का यह खजाना न केवल सेहत सुधार रहा है, बल्कि 10 किलो तक के वजन के कारण किसानों के लिए मोटा मुनाफा बनकर सामने आया है. गाजीपुर के कृषि वैज्ञानिक ओमकार सिंह बताते हैं कि मयूरी तरबूज का यह पीला रंग कैरोटेनॉयड्स के कारण है. यह पूरी तरह प्राकृतिक है. इसका ब्रिक्स लेवल (मिठास का स्तर) सामान्य तरबूज से काफी ज्यादा है.
गाजीपुर. भीषण गर्मी की तपिश और 42 डिग्री के पार जाते पारे के बीच, गाजीपुर के बाजारों में इस बार कुछ ऐसा आया है जिसने लोगों की आंखों को भी ठंडक दी है और जुबान को भी. अब तक आपने कड़कती धूप में सिर्फ लाल तरबूज के सुर्ख रंग से अपनी प्यास बुझाई होगी, लेकिन क्या आपने कभी शहद जैसे मीठे और सोने जैसे पीले तरबूज का स्वाद लिया है? गाजीपुर के रिलायंस स्मार्ट बाजार में इन दिनों एक खास किस्म का तरबूज मयूरी चर्चा का केंद्र बना हुआ है. आइए जानते हैं आखिर क्या है इस पीले जादू का रहस्य. स्मार्ट बाजार में सजे इस मयूरी तरबूज, जिसे स्थानीय लोग येलो मस्क मेलन भी कह रहे हैं, ने लाल तरबूज की बादशाहत को चुनौती दी है. इसके अंदर का चमकीला पीला रंग न केवल ग्राहकों को आकर्षित कर रहा है, बल्कि इसकी बढ़ती मांग ने इसे बाजार का सुपरस्टार बना दिया है.
पीला ही क्यों
अक्सर लोग इसे देखकर संशय में पड़ जाते हैं कि क्या यह कोई कृत्रिम रंग है? लेकिन कृषि वैज्ञानिक ओमकार सिंह बताते हैं कि यह पूरी तरह प्राकृतिक है. मयूरी तरबूज का यह पीला रंग प्राकृतिक कैरोटेनॉयड्स (Carotenoids) की मौजूदगी के कारण होता है. जहां लाल तरबूज में लाइकोपीन की मात्रा होती है, इस पीले तरबूज में बीटा-कैरोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. यही बीटा-कैरोटीन हमारे शरीर में जाकर विटामिन-A में बदल जाता है, जो आंखों की रोशनी और इम्यूनिटी के लिए वरदान है. इतना ही नहीं, इसका ब्रिक्स लेवल (Brix Level) यानी मिठास का स्तर सामान्य तरबूज से काफी ज्यादा पाया गया है.
किसानों के लिए कुबेर का खजाना
स्मार्ट बाजार के विक्रेता जितेंद्र बताते हैं कि इस किस्म ने बिक्री के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका वजन है. आमतौर पर हाइब्रिड तरबूज 3-5 किलो के होते हैं, लेकिन मयूरी तरबूज का एक ही फल 8 से 10 किलो तक का हो रहा है. 10 किलो का एक फल होने के कारण किसानों को प्रति पीस ज्यादा कीमत मिल रही है. बाजार भाव ₹34 से ₹35 प्रति किलो की दर से बिक रहा है. गाजीपुर की गंगा किनारे वाली रेतीली मिट्टी इस फसल के लिए स्वर्ग है, जिससे उत्पादन लागत कम और पैदावार बंपर हो रही है.
गर्मी का देसी हाइड्रेशन
90% से अधिक जल सामग्री के साथ, यह तरबूज शरीर को चिलचिलाती धूप और लू से बचाने का सबसे कारगर हथियार है. इसमें मौजूद इलेक्ट्रोलाइट्स धूप में काम करने वाले लोगों के लिए किसी एनर्जी ड्रिंक से कम नहीं हैं. गाजीपुर के लोग इसे सिर्फ इसके अनोखेपन के लिए नहीं, बल्कि इसके स्वास्थ्य लाभों के कारण अपने समर डाइट का हिस्सा बना रहे हैं.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें


