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राक्षसों ने मचा रखा था पूरे संसार में हाहाकार, तब आए श्री हरि…राम से पहले भगवान विष्णु की थी अयोध्या, जानिए

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Vishnu Connection Ayodhya : वैसे तो अयोध्या रामनगरी की पहचान रखती है, लेकिन भगवान विष्णु और अयोध्या का संबंध त्रेता युग से पहले यानी सतयुग का है. तब भगवान श्री हरि ने तपस्या के लिए अयोध्या को ही चुना था. इसका प्रत्यक्ष उदाहरण स्कंद पुराण में देखने को मिलता है. भगवान विष्णु ने कई सालों तक अयोध्या में तपस्या की थी. चलिए अयोध्या के कथावाचक पवन दास शास्त्री से इन रहस्यों और कथाओं के बारे में जानते हैं. वे बताते हैं कि यहां विष्णु तब आए जब पूरे संसार में हाहाकार मचा था.

अयोध्या. मंदिर और मूर्तियों की नगरी अयोध्या प्रभु राम की जन्मस्थली की वजह से पूरे विश्व में विख्यात है. आज भी अयोध्या में कई ऐसे ऐतिहासिक और प्राचीन स्थल स्थित है, जो अपने आप में रहस्य हैं. अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जन्म हुआ था. पौराणिक कथाओं में यह भी बताया गया है कि त्रेता युग में भगवान राम ने अयोध्या में जन्म लिया. बड़े होकर लंका विजय प्राप्त कर अयोध्या आए तो करीब 11000 वर्षों तक यहां राज किया. लेकिन यही अयोध्या प्रभु राम के पहले भगवान विष्णु की भी तपोस्थली भी रह चुकी है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने कई सालों तक अयोध्या में तपस्या की थी. चलिए इससे जुड़े कुछ पौराणिक रहस्य और कथाओं के बारे में विस्तार से जानते हैं.

‘आपकी मदद करेंगे’

अयोध्या मंदिर और मूर्तियों की नगरी है. पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु और अयोध्या का संबंध त्रेता युग से पहले यानी सतयुग का है. तब भगवान श्री हरि विष्णु ने तपस्या करने के लिए अयोध्या को ही चुना था. इसका प्रत्यक्ष उदाहरण स्कंद पुराण में देखने को मिलता है. स्कंद पुराण के अनुसार, एक बार देवता और राक्षसों में लड़ाई शुरू हुई. पूरे संसार में राक्षसों ने हाहाकार मचा दिया. उस समय भगवान विष्णु ने देवताओं को आश्वासन दिया कि हम राक्षसों से बचने के लिए आपकी मदद करेंगे. इसके बाद भगवान श्री हरि विष्णु अंतर ध्यान हो गए.

‘यहीं से राम गए अपने धाम’

अयोध्या के कथावाचक पवन दास शास्त्री लोकल 18 से बताते हैं कि भगवान विष्णु गुप्त रूप से अयोध्या पहुंचे थे और गुप्त हरि तीर्थ में वर्षों तक तपस्या की था. उनके तप से जो तेज प्रकट हुआ, वह उन्होंने देवताओं को प्रदान किया. कहा जाता है कि उस तेज से देवताओं ने राक्षसों का संहार कर दिया. अयोध्या में गुप्त हरि तीर्थ के समान न कोई तीर्थ था और न ही कोई तीर्थ भविष्य में रहेगा. भगवान विष्णु ने गुप्त रूप से गुप्त हरि तीर्थ पर तपस्या की थी. यहां एक घाट है जिसे गुप्तार घाट के नाम से जाना जाता है. त्रेता युग में इसी घाट से भगवान राम अपने धाम को गए थे.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें



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