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कृषि एक्सपर्ट डॉ. पांडु राम ने लोकल 18 से कहा कि सरगूजा बेल्ट में वर्षभर किसी न किसी प्रकार के फूल और फल उपलब्ध रहते हैं. जिससे मधुमक्खियों को लगातार आहार मिलता है. इसके साथ ही यहां रासायनिक खाद और कीटनाशकों का कम उपयोग होता है, जो मधुमक्खी पालन के लिए बेहद फायदेमंद है.
छत्तीसगढ़ का सरगुजा जिला अब तेजी से मधुमक्खी पालन का हब बनता जा रहा है. यहां सालभर मिलने वाले फल फूल और कम रासायनिक उपयोग के चलते शहद बनाने कि आपार संभावनाएं है.मधुमक्खी पालन एक बेहतर व्यवसाय का जरिया किसानों के लिए साबित हो रहा है. जहां किसान घर बैठे विदेशी तकनीक से मधुमक्खी पालन कर सकते हैं.
ऐसे में गर्मी के मौसम में मधुमक्खी पालन में एक बड़ी चुनौती आ रही है, फुल में कमी जिसके चलते किसानों को परेशान होना पड़ रहा है लेकिन अब किसानों को परेशान होने कि जरूरत नहीं है.कृषि विशेषज्ञ ने किसानों को गर्मी में मधुमक्खी पालन में आ रही चुनौतियों से निजात दिलाने के लिए एक बेहतरीन तरीका बताया है.
प्राकृतिक वातावरण मधुमक्खी पालन के लिए अनुकूल
कृषि एक्सपर्ट डॉ. पांडु राम ने लोकल 18 से कहा कि सरगूजा बेल्ट में वर्षभर किसी न किसी प्रकार के फूल और फल उपलब्ध रहते हैं. जिससे मधुमक्खियों को लगातार आहार मिलता है. इसके साथ ही यहां रासायनिक खाद और कीटनाशकों का कम उपयोग होता है, जो मधुमक्खी पालन के लिए बेहद फायदेमंद है. यही वजह है कि यह क्षेत्र शहद उत्पादन के लिए उपयुक्त माना जा रहा है.
किसान बन रहे आत्मनिर्भर
डॉ. पांडु राम ने बताया कि कई किसान प्रशिक्षण लेकर अब अपने घरों में 4 से 5 बॉक्स (पेटी) लगाकर मधुमक्खी पालन कर रहे हैं. इससे उन्हें अतिरिक्त आय का स्रोत मिल रहा है. वे आत्मनिर्भर बन रहे हैं. यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रहा है.
गर्मी में फूलों की कमी
गर्मी के मौसम में फूलों की संख्या कम हो जाती है, जिससे मधुमक्खियों को प्राकृतिक आहार नहीं मिल पाता. ऐसी स्थिति में मधुमक्खियां अपने स्थान को छोड़कर दूसरे स्थान पर चली जाती हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है.
चाशनी से मिलता है सहारा
कृषि विशेषज्ञ ने बताया कि इस समस्या से निपटने के लिए किसान शक्कर की चाशनी तैयार कर विशेष पात्र में भरकर मधुमक्खी के बॉक्स में रखते हैं. इससे मधुमक्खियों को ऑफ सीजन में भी भोजन मिलता रहता है. वे अपने स्थान पर बनी रहती हैं, जिससे उत्पादन में गिरावट नहीं आती है.
विदेशी मधुमक्खियों का बढ़ा चलन
डॉ. पांडु राम ने बताया कि व्यावसायिक स्तर पर ज्यादातर विदेशी नस्ल की मधुमक्खियों का पालन किया जाता है. उनकी उत्पादन क्षमता अधिक होती है. हालांकि, छोटे स्तर पर देसी मधुमक्खियों के लिए भी इसी तरह के पात्र का उपयोग किया जा सकता है
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