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Trump Post On Iran: पूर्व राजनयिक निरुपमा राव ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ‘सभ्यता खत्म करने’ वाली भाषा और ईरान के ‘ह्यूमन चेन’ दांव पर गंभीर सवाल उठाए हैं. राव के मुताबिक, यह सिर्फ मिलिट्री ऑपरेशन नहीं बल्कि नैतिक साख की लड़ाई है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल कीमतों पर पड़ेगा.
ट्रंप ने दी ‘ईरानी सभ्यता’ को नेस्तनाबूद करने की धमकी. (AP Photo)
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग ‘क्रिटिकल’ स्टेज पर है. अगले 24 घंटों में बहुत कुछ हो सकता है. कम से कम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ताजा सोशल पोस्ट तो यही कहता है. पूर्व विदेश सचिव और सीनियर डिप्लोमैट निरुपमा राव ने हालिया घटनाक्रम का एक एनालिसिस किया है. उन्होंने X (पहले ट्विटर) पर कहा कि अब एक पूरी सभ्यता के अस्तित्व और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खत्म होने का खतरा मंडरा रहा है. राव का मानना है कि ट्रंप की भाषा सामान्य कूटनीतिक संकेत नहीं है. जब कोई राष्ट्रपति घंटों के भीतर एक पूरी सभ्यता के खत्म होने की बात करता है, तो वह शासन और वहां की जनता के बीच के अंतर को मिटा देता है. यह एक ऐसी भयावह स्थिति है जहां सैन्य लक्ष्यों और आम इंसानों के बीच की लकीर धुंधली हो जाती है. ऐसे में किसी भी बड़े हमले को जायज ठहराना आसान हो जाता है, लेकिन इसके परिणाम सदियों तक भुगते जाएंगे.
क्या क्लिनिकल स्ट्राइक के नाम पर ईरान को पंगु बनाने की तैयारी है?
निरुपमा राव का कहना है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की कार्रवाई बहुत ही योजनाबद्ध और ‘क्लिनिकल’ नजर आती है. ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर को एक-एक करके उखाड़ा जा रहा है. इसमें एनर्जी सेक्टर, ट्रांसपोर्ट, कमांड सिस्टम और रेवेन्यू के साधनों को निशाना बनाया गया है. यह एक देश को पूरी तरह से अक्षम बनाने की सोची-समझी डिजाइन है.
सैन्य भाषा में इसे ‘कोअर्सिव डिग्रेडेशन’ यानी मजबूर करके कमजोर करना कहा जाता है. लेकिन इंसानी नजरिए से देखें तो यह बहुत खतरनाक है. बिजली की लाइनें, पुल और हाईवे सिर्फ सरकारी संपत्ति नहीं होते, बल्कि आम नागरिकों के जीवन की धड़कन होते हैं. जब खार्ग द्वीप के टर्मिनल पर हमला होता है या शिराज के पेट्रोकेमिकल प्लांट तबाह होते हैं, तो सीधे तौर पर ईरान की आर्थिक लाइफलाइन कट जाती है.
What stands out here is not only the scale of what is unfolding, but the language that is being used to frame it.
When a President speaks of “a whole civilization” potentially dying within hours, that is not routine strategic signalling. It is apocalyptic framing. It collapses… https://t.co/XWiAttaMSM




