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बेंगलुरु-विजयवाड़ा कॉरिडोर की सबसे बड़ी और भारी खासियत यह है कि यह सिर्फ दो शहरों को नहीं जोड़ेगा. यह रायलसीमा जैसे लंबे समय से उपेक्षित इलाके को मुख्यधारा में ला खड़ा करेगा. कडपा और कुरनूल जैसे जिले, जो मूंगफली और बागवानी के लिए मशहूर हैं, वे अब सीधे बड़े बाजारों और भारी निवेश से जुड़ पाएंगे. इस मास्टरस्ट्रोक से रॉयलसीमा की इकॉनमी में बहुत भारी और बड़ा बूम देखने को मिलेगा.
दक्षिण भारत के दो अहम शहर – बेंगलुरु और विजयवाड़ा – के बीच की दूरी भले ही करीब 635 किलोमीटर हो, लेकिन इस सफर को तय करने में लोगों की आधी जिंदगी सड़क पर निकल जाती है. ट्रैफिक से भरे कस्बे, घुमावदार रास्ते और डायरेक्ट एक्सप्रेसवे की कमी ने इस रूट को सालों से सबसे थकाऊ यात्राओं में शामिल कर दिया है.

अब इस परेशानी का हल बनकर सामने आ रहा है NH-544G बेंगलुरु-कडपा-विजयवाड़ा इकॉनमिक कॉरिडोर. यह 518 किलोमीटर लंबा, छह-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे भारत सरकार के महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना का हिस्सा है. इसका मतलब – न ट्रैफिक सिग्नल, न क्रॉसिंग, न गांवों में धीमी रफ्तार… बस लगातार दौड़ती सड़क.

इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सिर्फ दो शहरों को नहीं जोड़ता, बल्कि Rayalaseema जैसे लंबे समय से उपेक्षित इलाके को मुख्यधारा में लाता है. कडपा और कुरनूल जैसे जिले, जो मूंगफली, मिलेट्स और बागवानी के लिए जाने जाते हैं, अब सीधे बड़े बाजारों और निवेश से जुड़ पाएंगे.
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इस एक्सप्रेसवे के पूरा होते ही सफर की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी. दूरी 635 किलोमीटर से घटकर 535 किलोमीटर रह जाएगी और यात्रा समय 12 घंटे से घटकर सिर्फ 8 घंटे. यानी हर दिन 4 घंटे की बचत – चाहे ट्रक ड्राइवर हों, बिजनेस या आम लोग – सबके लिए यह बदलाव गेमचेंजर साबित होगा.

जनवरी 2026 में इस प्रोजेक्ट ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा, जब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और उसकी पार्टनर कंपनी ने Puttaparthi के पास एक अनोखा रिकॉर्ड बनाने की ठानी. यह वही जगह है जो आध्यात्मिक गुरु Sathya Sai Baba के जन्मस्थान के रूप में जानी जाती है.

6 जनवरी 2026 को यहां दो वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए गए. पहला – लगातार 24 घंटे में 9.63 किलोमीटर लंबी तीन-लेन सड़क बिछाई गई. दूसरा – इसी अवधि में 10,655 मीट्रिक टन बिटुमिनस कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया. अगर इसे आसान भाषा में समझें, तो यह करीब 1400 हाथियों के वजन जितना मटेरियल था, जो एक ही दिन में सड़क पर बिछा दिया गया.


