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Mau news: मऊ शहर की नींव रखने में मुगल बादशाह शाहजहां की बेटी जहाँआरा का बड़ा हाथ था. मऊ का क्षेत्र शाहजहा ने यह जहाँआरा को दिया था. यहां उसने शाही मस्जिद का निर्माण कराया और अपनी सुरक्षा के लिए फौजी छावनी स्थापित की थी. तब से उस मऊ का नाम बदलकर जहानाबाद कर दिया गया हालांकि बाद में फिर यह नाम मऊ रख दिया गया.
मऊः इतिहास के पन्नों में कम जानकारी है कि मऊ शहर की नींव रखने में मुगल बादशाह शाहजहां की बेटी जहाँआरा का बड़ा हाथ था. मऊ का क्षेत्र शाहजहा ने यह जहाँआरा को दिया था. यहां उसने शाही मस्जिद का निर्माण कराया और अपनी सुरक्षा के लिए फौजी छावनी स्थापित की थी. तब से उस मऊ का नाम बदलकर जहानाबाद कर दिया गया हालांकि बाद में फिर यह नाम मऊ रख दिया गया.
धर्म प्रचार करने के लिए मऊ आई थी जहाँआरा
लोकल 18 से बात करते हुए सीनियर जॉर्नलिस्ट राहुल सिंह बताते हैं कि शाहजहां सम्राट की 6 बेटी में पांचवें नंबर की जहाँआरा थी और वह औरंगजेब की बहन थी. सदियों वर्ष पूर्व वह एक मौलवी के साथ मऊ जनपद के नगर क्षेत्र जहां शाही मस्जिद बना है, वह साथ आई थी. वहां उन्होंने एक मोहल्ला को बसाया और वही शाही मस्जिद को बनवाया. हालांकि मौलवी के साथ यहां वह धर्म प्रचार करने आई थी. जब वह यहां आई थी तो उनके साथ उनके रोजमर्रा की जरूरत के समान साथ आए थे और आज भी यह गधे लड्डे यहां मौजूद है. आज वह कार्य आमजन के लिए लोग कर रहे हैं. उस समय जब जहाँआरा यहां आई उसने मऊ शहर का स्थापना किया.
भरत मिलाप देखने के लिए शाही मस्जिद का किराया निर्माण
मऊ शहर के बीचो-बीच उसने एक कस्बा बसाया जिसे आज शाही कटरा के नाम से जाना जाता है. उस समय जहाआरा का मऊ शहर के बीच नाम आ गया. मऊ के ऐतिहासिक का रामलीला कार्यक्रम कराने में भी जहाँआरा का नाम जुड़ा हुआ है. हजारों वर्ष पुरानी यहां मऊ जनपद में रामलीला होती है जो एक स्थान पर न होकर जगह-जगह होती है. उसे समय भरत मिलाप को देखने के लिए जहाँआरा ने शाही कटरा के मैदान को चुना था. वह मस्जिद के झरोखों पर बैठकर भरत मिलाप को देखती थी. कालांतर में भरत मिलाप शाही कटरा की एक परंपरा बन गई और उस परंपरा को आज भी लोग निभा रहे हैं और बड़े ही धूमधाम से भरत मिलाप का कार्यक्रम कराया जाता है.
सेना की छावनी हुआ करता था मऊ
राहुल सिंह बताते हैं कि उस समय लोग बताते हैं कि इस मऊ जनपद का नाम जहांआरा ने जहानाबाद रख दिया था, लेकिन जो उन लोगों ने देखा है उसे समय मऊरनट छावनी के रूप में माना जाता था. अंग्रेजों के जमाने में भी यह छावनी के रूप में ही जाना जाता था. मऊ सेना के छावनी के रूप में इस्तेमाल किया जाता था, इसलिए जहांआरा ने जो नाम बदला उसका किसी गजेटियर में नाम नहीं दर्ज है. मऊ जनपद का नाम मऊनाथ भंजन के नाम से प्रचलित है और आज भी लोग इस नाम को जानते हैं. आज इतिहास के पन्नों में यह नाम बहुत कम मिलता है की मऊ जनपद के लिए जहां आर ने कई प्रचलन शुरू किया. मऊ में शाही मस्जिद का निर्माण कराया और भरत मिलाप की नई परंपरा शुरू कराई जिसे आज भी लोग बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें


