14.6 C
Munich

Agra Lucknow Expressway History: 36 महीने का काम 22 माह में पूरा, बजट में भी 1800 करोड़ की बचत, 302KM के एक्सप्रेस-वे ने बना दिया इतिहास

Must read


होमफोटोदेश

36 महीने का काम 22 में पूरा, 302KM के उस एक्सप्रेस-वे की कहानी

Last Updated:

Agra Lucknow Expressway History: आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की नई मिसाल है. 36 महीने में बनने वाला यह 302 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेस-वे सिर्फ 22 महीनों में तैयार हुआ और करीब 1800 करोड़ रुपए की बचत भी हुई. इसमें एयरफोर्स रनवे, सोलर लाइटिंग और एडवांस ट्रैफिक सिस्टम जैसी कई आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं, जो इसे खास बनाती हैं. पढ़ें इसके बारे में पूरी डिटेल में. (सभी फोटो PTI)

भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर की बात होती है तो अक्सर लंबी देरी, बढ़ता बजट और अधूरी योजनाएं याद आती हैं. लेकिन अब ये इतिहास की कहानी हो गई है. ये नया भारत है और नया भारत हर दिन नए कीर्तिमान रचता है. इसी लेट लतीफी वाली सोच को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे ने पूरी तरह बदल दिया. यह सिर्फ एक सड़क नहीं है, बल्कि टाइम, टेक्नोलॉजी और मैनजमेंट का ऐसा उदाहरण है जिसने पूरे देश के सामने एक नई मिसाल पेश की है. 36 महीने में बनने वाली परियोजना को सिर्फ 22 महीनों में पूरा कर देना अपने आप में रिकॉर्ड है. यह दिखाता है कि अगर प्लानिंग और एक्शन सही हो, तो भारत में भी बड़े प्रोजेक्ट समय से पहले पूरे हो सकते हैं.

इस एक्सप्रेस-वे की सबसे बड़ी खासियत इसकी लागत है. शुरुआत में इस परियोजना के लिए करीब 15,000 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया था, लेकिन इसे लगभग 13,200 करोड़ रुपए में पूरा कर लिया गया. यानी करीब 1,000 से 1,800 करोड़ रुपए की बचत हुई. यह बचत सिर्फ आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह बताती है कि सरकारी परियोजनाओं में सही प्लानिंग और पारदर्शिता से कितना बड़ा फर्क आ सकता है.

302 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के कई अहम शहरों को जोड़ता है. इसमें 13 बड़े पुल, 57 छोटे पुल, 74 वाहन अंडरपास और 148 पैदल अंडरपास बनाए गए हैं. इतनी बड़े कंस्ट्रक्शन को कम समय में तैयार करना इंजीनियरिंग के लिहाज से भी बड़ी उपलब्धि मानी जाती है. यह एक्सप्रेस-वे न सिर्फ यात्रा को तेज बनाता है, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी गति देता है.

Add News18 as
Preferred Source on Google

इस प्रोजेक्ट की एक और अनोखी खासियत इसकी रणनीतिक उपयोगिता है. उन्नाव जिले में 3.3 किलोमीटर लंबा एक विशेष स्ट्रिप बनाया गया है, जिसे आपात स्थिति में रनवे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. उद्घाटन के दिन भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने यहां सफल लैंडिंग कर इतिहास रच दिया था. इसमें सुखोई Su-30MKI और मिराज 2000 जैसे विमान शामिल थे.

इसके बाद 2017 में C-130J सुपर हरक्यूलिस जैसे भारी-भरकम ट्रांसपोर्ट विमान ने भी यहां लैंडिंग की. 35000 किलोग्राम वजन वाले इस विमान की लैंडिंग ने साबित कर दिया कि यह एक्सप्रेस-वे सिर्फ नागरिक उपयोग के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद अहम है. किसी भी आपात स्थिति में सेना यहां से तेजी से ऑपरेशन कर सकती है.

किसानों के लिए भी यह एक्सप्रेस-वे किसी वरदान से कम नहीं है. पहली बार किसी हाईवे को सीधे कृषि मंडियों से जोड़ा गया है. मैनपुरी और कन्नौज जैसे जिलों में किसान अब अपने उत्पाद को तेजी से बड़े बाजारों तक पहुंचा सकते हैं. इससे न सिर्फ उनकी आमदनी बढ़ेगी, बल्कि कृषि क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी.

तकनीक के मामले में भी यह एक्सप्रेस-वे आगे है. पूरे 302 किलोमीटर रास्ते पर सोलर पावर से लाइटिंग की व्यवस्था की गई है. इससे ऊर्जा की बचत होती है और पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. इसके अलावा आवारा जानवरों से होने वाले हादसों को रोकने के लिए एक विशेष एजेंसी नियुक्त की गई है जो लगातार निगरानी करती है.

सुरक्षा के लिहाज से यहां एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) लगाया गया है. अगर कोई वाहन 302 किलोमीटर की दूरी 3 घंटे से कम समय में तय करता है, तो सिस्टम अपने आप ई-चालान जारी कर देता है. यह नियम तेज रफ्तार को कंट्रोल करने और दुर्घटनाओं को कम करने के लिए बनाया गया है.

एक और खास बात यह है कि एक्सप्रेस-वे पर किसी भी दुर्घटना की स्थिति में मदद बहुत तेजी से पहुंचती है. एम्बुलेंस और इमरजेंसी टीमें इस तरह तैनात हैं कि उनका रिस्पॉन्स टाइम सिर्फ 4 से 11 मिनट के बीच रहता है. यह सुविधा यात्रियों के लिए सुरक्षा का भरोसा देती है.

कुल मिलाकर आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का प्रतीक बन चुका है. इसने यह साबित कर दिया है कि अगर इच्छाशक्ति और सही रणनीति हो, तो बड़े से बड़ा प्रोजेक्ट भी समय से पहले और कम लागत में पूरा किया जा सकता है. आने वाले समय में यह एक्सप्रेस-वे अन्य परियोजनाओं के लिए एक मॉडल के रूप में देखा जाएगा.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।



Source link

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest article