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Plastic Waste Recycling Furnitur : पाली जिले के बिसलपुर गांव के कानाराम मेवाड़ा ने प्लास्टिक कचरे को नई पहचान दी है. चाय बेचने वाले कानाराम अब कचरे से मजबूत और आकर्षक फर्नीचर बना रहे हैं, जो 100 साल तक टिकने का दावा करता है. 5 साल में 10 टन कचरा इस्तेमाल कर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की मिसाल पेश की. उनकी इस अनोखी पहल की सराहना देशभर में हो रही है.
पाली : सोचिए, जो प्लास्टिक कचरा हमारी धरती को बंजर बना रहा है, क्या वह आपके ड्राइंग रूम की शोभा बढ़ा सकता है? पाली जिले के बिसलपुर गांव के कानाराम मेवाड़ा ने इसे सच कर दिखाया है. उन्होंने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे बना फर्नीचर 100 साल तक खराब नहीं होगा. थ्री इडियट्स के असली ‘रेंचो’ भी इस चायवाले के कायल हैं! कानाराम चायवाले ने पर्यावरण बचाने के लिए मुहिम चलाई. प्लास्टिक कचरा इकट्ठा कर उसने फर्नीचर बनाने की यूनिट शुरू की.
करीब 5 साल में अब तक 10 टन से अधिक के कचरे से फर्नीचर बना चुका है. बिसलपुर गांव के कानाराम मेवाड़ा की मुहिम की तारीफ इंजीनियर सोनम वांगचुक भी कर चुके हैं. वांगचुक के जीवन पर आमिर खान स्टारर थ्री इडियट फिल्म बनी थी. पाली में 11 मार्च 2025 को सोनम वांगचुक ने कानाराम की यूनिट पर विजिट भी किया था. देखिए कैसे एक छोटी सी मुहिम ने पर्यावरण बचाने का बड़ा रास्ता दिखाया.
कचरे से बनाया 100 साल तक टिकाउ फर्नीचर
आम तौर पर घरों और कारखानों से निकलने वाले प्लास्टिक, पुराने टायरों, लोहे के कबाड़ और वेस्ट लकड़ी को कचरा मानकर फेंक दिया जाता है या जला दिया जाता है, जो प्रदूषण का बड़ा कारण बनता है. लेकिन पाली के इन पर्यावरण प्रेमियों ने इस कचरे को ‘रिसोर्स’ में बदल दिया है. उन्होंने कचरे का उपयोग कर कुर्सियां (Chairs), टेबल (Tables), और सजावटी सामान तैयार किए हैं. ये फर्नीचर न केवल दिखने में आकर्षक हैं, बल्कि बेहद मजबूत और टिकाऊ भी हैं.
इस तरह हुई मुहिम की शुरूआत
पाली के जवाई लेपर्ड एरिया के नजदीकी गांव के रहने वाले कानाराम की चाय की दुकान थी. वे देखते थे कि सफारी करने आए विजिटर्स प्लास्टिक का कचरा जंगल में ही छोड़ जाते हैं. जंगल को गंदा होता देख उनके मन में पीड़ा हुई. उन्होंने तय किया अपने गांव को प्लास्टिक मुक्त कर देंगे. ऐसा करने के लिए उन्हें आइडिया आया. वे अपनी दुकान के बाहर बोर्ड लगाने लगे. इस पर लिखा था- प्लास्टिक लाओ, पर्यावरण बचाओ, ईनाम पाओ.
डीजेईडी फाउंडेशन का रहा खास सहयोग
कानाराम बताते है कि मैंने 2020 में यह मुहिम शुरू की थी. बच्चों को प्लास्टिक वेस्ट के बदले मैं कॉपी, पेंसिल आदि गिफ्ट करता था. किसी को पैसे की जरूरत होती तो प्लास्टिक कचरे के बदले 20 रुपए देता. धीरे-धीरे बिसलपुर समेत 12 गांव के लोग मुहिम में शामिल हो गए. 5 साल में 10 टन कचरा इकट्ठा हो गया. इस कचरे से फर्नीचर बनाने का आइडिया आया. इस विचार को धरातल पर उतारने के लिए डीजेईडी फाउंडेशन के दिलीप जैन ने साथ दिया.
10 लाख की लगाई मशीन
डीजेईडी फाउंडेशन के दिलीप जैन भी बिसलपुर गांव के ही रहने वाले हैं. उनका फाउंडेशन (एनजीओ) पर्यावरण बचाने के लिए देशभर में काम करता है. फाउंडेशन के सहयोग से मैं फरवरी 2024 में प्लास्टिक वेस्ट से फर्नीचर बनाने वाली मशीन खरीदकर लाया. यह मशीन 10 लाख रुपए में आई. बिसलपुर में यूनिट की स्थापना की. इसके बाद जनवरी 2025 से बिसलपुर में ही यूनिट से फर्नीचर का निर्माण शुरू हो गया. सरकारी विभागों ने मेरा फर्नीचर खरीदा. अब जवाई बांध रेलवे स्टेशन पर बेंच लगाने का ऑर्डर मिला है.
फिल्मी सितारे कर चुके सम्मानित
पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम को उस वक्त बड़ा संबल मिला, जब जवाई बांध क्षेत्र में DJED फाउंडेशन (NGO) द्वारा आयोजित ‘जल-जंगल सुरक्षा’ कार्यक्रम में देश की जानी-मानी हस्तियां शामिल हुईं. इस दौरान प्रसिद्ध मैकेनिकल इंजीनियर और मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक (जिनके जीवन पर ‘थ्री इडियट्स’ फिल्म बनी थी) और बॉलीवुड अभिनेत्री व पर्यावरण कार्यकर्ता दीया मिर्जा ने कानाराम की इस अनूठी पहल की जमकर सराहना की.
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