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IPL 2026 में खत्म हो रही है दुनिया की सबसे खूबसूरत गेंद, अब विकेट लेने की जगह बचने के लिए हो रहा इस बॉल का इस्तेमाल

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नई दिल्ली.  एक समय था जब T20 मैच के आखिरी ओवरों का स्क्रिप्ट लगभग तय रहता था. जैसे ही बल्लेबाजों में घबराहट बढ़ती थी और रन का हिसाब टाइट होता था, कप्तान ऐसे गेंदबाजों को बुलाते थे जो क्लासिकल यॉर्कर डाल सकते थे. लेकिन अब IPL में 220 से ज्यादा स्कोर, पहले से सोची गई शॉट्स और बल्लेबाजों की नई-नई ट्रिक्स के बीच यॉर्कर को सबसे बड़ी चुनौती मिल रही है.

अब ड्रेसिंग रूम और फैंस के बीच ये सवाल उठ रहा है कि क्या लीग की बैटिंग क्रांति ने यॉर्कर को खत्म कर दिया है. क्या यॉर्कर अब इतना रिस्की हो गया है कि गेंदबाज इससे बचना चाहते हैं. एक्सपर्ट्स कहते हैं, ऐसा नहीं है. यॉर्कर अभी भी जिंदा है, बस अब इसे डालने के लिए ज्यादा हिम्मत और सटीकता चाहिए.

यॉर्कर पर कंट्रोल जरूरी 

मदन लाल, पूर्व भारतीय ऑलराउंडर ने कहा, ‘यॉर्कर आज भी गेम का जरूरी हिस्सा है, बस आपको लाइन और लेंथ में बहुत कंसिस्टेंट रहना पड़ता है. अगर थोड़ा ऊपर लग गया तो छक्का हो जाता है. वाइड यॉर्कर में भी लेंथ बहुत जरूरी है.’ उन्होंने कहा, ‘यॉर्कर और स्लोअर बॉल आज भी गेम का हिस्सा हैं.’ बाकी एक्सपर्ट्स भी यही मानते हैं. सबका कहना है कि IPL ने यॉर्कर को खत्म नहीं किया, लेकिन इसकी कमियों को जरूर उजागर किया है और अब इसमें गलती की कोई गुंजाइश नहीं बची. अब यॉर्कर एक स्पेशल स्किल बन गया है जिसमें जबरदस्त सटीकता चाहिए. पहले यॉर्कर से नाम बनते थे और मैच जीतते थे.

बल्लेबाजी ज्यादा इनोवेटिव

लसिथ मलिंगा की सटीकता, ड्वेन ब्रावो की स्लो यॉर्कर और जसप्रीत बुमराह की एक्यूरेसी IPL में डेथ बॉलिंग की पहचान थी. दीप दासगुप्ता, पूर्व विकेटकीपर और टीवी एक्सपर्ट, मानते हैं कि सबसे बड़ा बदलाव बल्लेबाजों की मूवमेंट में आया है. पहले बल्लेबाज क्रीज पर स्थिर रहते थे, अब वो क्रीज का पूरा इस्तेमाल करते हैं. अगर आप पुरानी तरह की यॉर्कर डालते हैं और बल्लेबाज पीछे चला गया तो वो यॉर्कर नहीं, हाफ वॉली बन जाती है. अगर बल्लेबाज क्रीज से बाहर खड़ा हो तो वही गेंद फुल टॉस हो जाती है.

इम्पैक्ट प्लेयर रूल का रोल

IPL में रन रेट भी बढ़ा है. 2008 में डेथ ओवर का औसत रन रेट 9.41 था, जो 2025 में 11.5 हो गया है. टीम का औसत स्कोर भी 157 से बढ़कर 180 हो गया है. 2023 में इम्पैक्ट प्लेयर रूल आने से भी बल्लेबाजों को फायदा मिला है. अब यॉर्कर में गलती की गुंजाइश बहुत कम रह गई है. इसी वजह से टीमें हार्ड लेंथ, स्लोअर बॉल और वाइड लाइन वेरिएशन का ज्यादा इस्तेमाल कर रही हैं. वाइड यॉर्कर भी एक ऑप्शन बन गया है.

वाइड यॉर्कर नई पसंद

दासगुप्ता ने बताया कि अब गेंदबाज सिर्फ स्टंप के बेस को टारगेट नहीं करते. वाइड यॉर्कर में लाइन के साथ खेल सकते हैं और अगर लेंथ छूट भी जाए तो भी बल्लेबाज के हिटिंग एरिया से दूर रह सकते हैं. पूर्व ओपनर और कोच डब्ल्यू वी रमन ने कहा कि क्लासिकल यॉर्कर में गलती की गुंजाइश बहुत कम है, थोड़ा सा भी चूक गए तो चौका-छक्का हो सकता है. वाइड यॉर्कर में कम से कम एक साइड पर प्रोटेक्शन मिल जाता है. अब टॉप गेंदबाज स्लोअर बॉल, हार्ड लेंथ और एंगल बदलकर बल्लेबाज को सेट करते हैं और फिर यॉर्कर डालते हैं. बुमराह इसका सबसे अच्छा उदाहरण हैं, लेकिन इस IPL में उनसे भी रन पड़े हैं.

इस सीजन में, जब रिवर्स स्विंग मिलती है, तो मिचेल स्टार्क जैसे गेंदबाज दिखा रहे हैं कि सही यॉर्कर आज भी खेलना मुश्किल है. भारतीय गेंदबाज अंशुल कम्बोज (CSK), वैशाक विजयकुमार (पंजाब किंग्स) और कार्तिक त्यागी (कोलकाता नाइट राइडर्स) वाइड यॉर्कर से अच्छा कर रहे हैं. सरनदीप सिंह, पूर्व स्पिनर और सिलेक्टर ने कहा, ‘रिवर्स स्विंग में यॉर्कर आज भी बेस्ट बॉल है, बस उसे सही से डालना जरूरी है. अब गेंदबाज वाइड यॉर्कर डाल रहे हैं. वाइड यॉर्कर सबसे मुश्किल गेंद है.’



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