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कोर्ट ने साफ कहा कि भगोड़ा घोषित व्यक्ति संपत्ति जब्ती को चुनौती नहीं दे सकता. संजय भंडारी अब अपनी ही संपत्ति के लिए कोर्ट में कोई लड़ाई नहीं लड़ सकता. अपराध से कमाई गई संपत्ति के अलावा बाकी प्रॉपर्टी भी जब्त हो सकती है. भगोड़े का किसी भी संपत्ति में अगर हित जुड़ा है तो वह पूरी तरह जब्त होगी. संजय भंडारी के लिए अब सारे कानूनी रास्ते बंद हो चुके हैं.
ईडी ने दावा किया कि दुबई और लंदन में भी संजय भंडारी ने संपत्ति बनाई है. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. दिल्ली से जुड़े चर्चित आर्थिक भगोड़े संजय भंडारी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को बड़ी कामयाबी मिली है. 5 मई 2026 को अदालत ने अहम आदेश देते हुए भंडारी की करोड़ों रुपये की संपत्ति को जब्त (कन्फिस्केट) करने का आदेश दे दिया. यह कार्रवाई Fugitive Economic Offenders Act (FEOA) के तहत की गई है, जो उन लोगों पर लागू होता है जो देश छोड़कर भाग जाते हैं और जांच से बचने की कोशिश करते हैं.
इस मामले की शुरुआत 13 दिसंबर 2019 को हुई थी, जब ED ने अदालत में अर्जी दाखिल कर संजय भंडारी को फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर (FEO) घोषित करने और उसकी भारत व विदेश में मौजूद संपत्तियों को जब्त करने की मांग की थी. यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग और ब्लैक मनी एक्ट 2015 की धाराओं से जुड़ा हुआ है. लंबी सुनवाई के बाद 5 जुलाई 2025 को कोर्ट ने भंडारी को आधिकारिक तौर पर भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया था. इस फैसले को 9 अप्रैल 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने भी सही ठहराया.
ED ने किन-किन संपत्तियों पर किया दावा
ED की जांच में सामने आया कि संजय भंडारी ने भारत ही नहीं बल्कि दुबई, लंदन जैसे विदेशी शहरों में भी भारी-भरकम संपत्तियां बनाई थीं. इनमें दिल्ली, गुरुग्राम और नोएडा की प्रॉपर्टी, विदेशी कंपनियां, कई बैंक खाते, महंगे जेवरात और नकदी शामिल हैं. एजेंसी का कहना है कि ये संपत्तियां सीधे या फिर शेल कंपनियों और करीबी लोगों के नाम पर बेनामी तरीके से खड़ी की गई थीं.
कोर्ट की अहम टिप्पणियां क्या रहीं
अदालत ने साफ कहा कि जब किसी व्यक्ति को FEO घोषित कर दिया जाता है, तो वह अपनी संपत्तियों की जब्ती को खुद चुनौती नहीं दे सकता. यानी संजय भंडारी अब अपनी ही संपत्ति के खिलाफ कोर्ट में लड़ाई नहीं लड़ सकता. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि FEOA के तहत सिर्फ अपराध से कमाई गई संपत्ति ही नहीं, बल्कि वो सारी संपत्तियां जब्त की जा सकती हैं जिनमें भगोड़े का किसी भी तरह का हित जुड़ा हो. हालांकि, अगर कोई तीसरा पक्ष यह साबित कर दे कि संपत्ति उसकी है और उसका भंडारी से कोई लेना-देना नहीं है, तो उसे कोर्ट में अपनी बात रखने का अधिकार रहेगा.
कितनी संपत्ति हुई जब्त
अदालत के 5 मई 2026 के आदेश के मुताबिक कुल 9 अचल संपत्तियां, जिनकी कीमत करीब 24.36 करोड़ रुपये है, जब्त की गई हैं. 30 बैंक खाते, जिनमें दिसंबर 2019 तक 53.78 लाख रुपये जमा थे, भी जब्त कर लिए गए. करीब 4.19 करोड़ रुपये के जेवरात, 31.10 लाख रुपये नकद, और लगभग 9.95 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा भी जब्ती के दायरे में आई है.
ये सभी संपत्तियां संजय भंडारी और उससे जुड़ी कंपनियों और इकाइयों के नाम पर थीं. अभी यह मामला यहीं खत्म नहीं हुआ है. कोर्ट ने साफ किया है कि भंडारी के परिवार के नाम या विदेशी कंपनियों के जरिए रखी गई बाकी संपत्तियों की जब्ती पर अलग से सुनवाई होगी. यानी आने वाले समय में और भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है.
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डेढ़ दशक से ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय, आनंद तिवारी ने इंदौर, मध्यप्रदेश के देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की. वहीं से फ्रीलांसर के तौर पर दैनिक भास्कर से जुड़ गए. दिल्ली की पत्र…और पढ़ें


