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Color Fish Business Ideas: समस्तीपुर में रंगीन मछली पालन कम लागत और कम जगह में शुरू कर अच्छा मुनाफा देने वाला व्यवसाय बन रहा है. घर की छत या छोटे हौज में भी इसे शुरू कर युवा और किसान हर महीने अच्छी कमाई कर रहे हैं. स्वरोजगार का यह नया जरिया जिले में काफी लोकप्रिय हो रहा है. आइए एक्सर्प्ट से जानते हैं कैसे कम गजह और कम लागत में बंपर मुनाफे वाला यह बिजनेस किया जा सकता है. डॉ. रौशन कुमार राम ने इसे युवाओं और किसानों के लिए बेहतर रोजगार विकल्प बताया.
समस्तीपुर: आज के दौर में खेती के साथ-साथ लोग ऐसे व्यवसाय की तलाश में हैं, जिसे कम लागत और कम जगह में शुरू कर अच्छा मुनाफा कमाया जा सके. ऐसे में रंगीन मछली पालन का व्यवसाय तेजी से लोगों की पसंद बनता जा रहा है. घर, होटल, ऑफिस और दुकानों में एक्वेरियम रखने का चलन बढ़ने से रंगीन मछलियों की मांग भी लगातार बढ़ रही है. डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के मत्स्य पालन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रौशन कुमार राम के अनुसार यह व्यवसाय कम लागत में शुरू कर अच्छा मुनाफा देने वाला रोजगार बन चुका है. उन्होंने बताया कि रंगीन मछलियां देखने में सुंदर, छोटी और आकर्षक होती हैं. इनके शरीर पर अलग-अलग रंग और धारियां होती हैं, जो लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं.कई लोग इसे घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी मानते हैं.
छोटे टैंक और हौज में भी कर सकते हैं पालन
डॉ. रौशन कुमार राम ने बताया कि रंगीन मछली पालन के लिए बड़े तालाब की जरूरत नहीं होती. छोटे सीमेंट टैंक, प्लास्टिक टब या छोटे हौज में भी इसका पालन और प्रजनन आसानी से किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि कई लोग अपने घर की छत या आंगन में छोटे स्तर पर यह व्यवसाय शुरू कर अच्छी कमाई कर रहे हैं. इस व्यवसाय की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कम पानी और सीमित जगह में भी उत्पादन संभव है. उन्होंने बताया कि रंगीन मछलियों का “जीरा” यानी बच्चे तैयार कर बाजार में बेचना काफी लाभकारी साबित होता है. बाजार में इनकी कीमत सामान्य खाने वाली मछलियों की तुलना में कई गुना अधिक मिल जाती है. सही तरीके से पालन करने पर कुछ ही महीनों में अच्छी आमदनी शुरू हो सकती है.
अंडा देने और बच्चे देने वाली मछलियों की पहचान
उन्होंने बताया कि रंगीन मछलियों की कई प्रजातियां होती हैं, जिनमें कुछ अंडे देती हैं तो कुछ सीधे बच्चे पैदा करती हैं. अंडा देने वाली मछलियों में गोल्डफिश, एंजेल फिश, फाइटर फिश और ऑस्कर फिश शामिल हैं. वहीं सीधे बच्चे देने वाली मछलियों में गप्पी मछली, मॉली मछली, स्वॉर्डटेल मछली और प्लेटी मछली का नाम शामिल है. उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति प्रजनन करना चाहता है तो मेल और फीमेल मछलियों को एक साथ अलग टैंक में रखना चाहिए. सही वातावरण मिलने पर मछलियां तेजी से अंडे या बच्चे देती हैं.
पानी की गुणवत्ता बनाए रखना सबसे जरूरी
मत्स्य विशेषज्ञ ने बताया कि इस व्यवसाय में सबसे जरूरी चीज पानी की गुणवत्ता होती है. पानी का पीएच मान, ऑक्सीजन, अमोनिया और नाइट्रेट का स्तर सही रखना बेहद आवश्यक है. यदि इन सभी पैरामीटर को संतुलित रखा जाए तो मछलियों की वृद्धि तेजी से होती है और बीमारी का खतरा कम रहता है. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इंजेक्शन तकनीक के माध्यम से भी ब्रीडिंग कराई जा सकती है, जबकि प्राकृतिक तरीके से भी आसानी से प्रजनन संभव है. कम निवेश, कम जगह और तेजी से बढ़ती बाजार मांग के कारण यह व्यवसाय युवाओं और किसानों के लिए रोजगार का बेहतर विकल्प बनता जा रहा है.
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