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आईपीएल में विदेशी खिलाड़ियों का खूब बोलबाला रहता है. जब सीजन की नीलामी होती है तो कई खिलाड़ियों पर बड़ा दांव लगाया जाता है. इस सीजन में कैमरून ग्रीन को 25 करोड़ रुपये में खरीदा गया था. लेकिन क्या आप जानते हैं कैमरून या फिर उनके जैसे अन्य विदेशी खिलाड़ियों को इस फीस पर कितना टैक्स भरना पड़ता है और कितना पैसा हाथ में आता है? क्या वे इस फीस के अलावा कुछ और कमाई भी करते हैं? जानिए पूरी डिटेल..
आईपीएल में खेलने वाले विदेशी खिलाड़ियों पर अच्छा खासा टैक्स लगता है. (Image – AI)
इंडियन प्रीमियर लीग (Indian Premier League) दुनिया की सबसे बड़ी और अमीर क्रिकेट लीग मानी जाती है. इसमें दुनिया भर के बेहतरीन खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं और उन्हें फ्रेंचाइजी की तरफ से करोड़ों रुपये की फीस दी जाती है. कई खिलाड़ी करोड़ों रुपये की बोलियां लगाकर खरीदे जाते हैं. इस सीजन की नीलामी में ऑस्ट्रेलिया के ऑल-राउंडर कैमरून ग्रीन (Cameron Green) सबसे महंगे खिलाड़ी बने. कोलकाता नाइट राइडर्स (Kolkata Knight Riders) ने उन्हें 25.20 करोड़ रुपये में खरीदा. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन विदेशी खिलाड़ियों को मिलने वाली इतनी बड़ी रकम पर टैक्स कैसे लगता है? भारत सरकार उनकी कमाई से कितना हिस्सा अपने पास रखती है?
उससे पहले ये भी जानना होगा कि विदेशी खिलाड़ी आईपीएल के दौरान कहां-कहां से पैसा कमाते हैं. सबसे पहले आती है उनकी बेस सैलरी या नीलामी की कीमत, जो उन्हें पूरे सीजन के लिए पक्के तौर पर मिलती ही है. इसके अलावा, उन्हें हर मैच खेलने के लिए अलग से मैच फीस भी दी जाती है. खिलाड़ियों की किस्मत तब और चमकती है जब उनकी टीम जीतती है या वे खुद अच्छा प्रदर्शन करते हैं. उन्हें मैन ऑफ द मैच, ऑरेंज कैप या पर्पल कैप जैसे पुरस्कारों के जरिए इनामी राशि भी मिलती है. साथ ही, विज्ञापनों और बड़े ब्रांड्स के साथ जुड़कर भी ये खिलाड़ी मोटी कमाई करते हैं.
टैक्स का नियम क्या है?
भारत के इनकम टैक्स कानून के मुताबिक, विदेशी खिलाड़ियों की भारत में होने वाली कमाई पर टैक्स चुकाना अनिवार्य है. टैक्स एक्सपर्ट गोपाल बोहरा बताते हैं कि अगर कोई विदेशी खिलाड़ी भारत में खेलता है, विज्ञापन करता है या अखबारों-मैगजीन में लेख लिखता है, तो उसे अपनी कुल कमाई पर सीधे 20 प्रतिशत की दर से टैक्स देना होता है. इसके ऊपर सरचार्ज और सेस (Cess) अलग से लगता है. खास बात यह है कि इस कमाई में से खिलाड़ी अपने किसी भी खर्चे पर डिडक्शन नहीं सकते, उन्हें पूरी रकम पर टैक्स देना पड़ता है.
दिल्ली की टैक्स एक्सपर्ट प्रियल गोयल जैन का कहना है कि इन खिलाड़ियों की फीस से पहले ही टैक्स काट लिया जाता है, जिसे टीडीएस (TDS) कहते हैं. अगर किसी खिलाड़ी की सिर्फ यही कमाई है, तो उसे भारत में अलग से इनकम टैक्स रिटर्न भरने की जरूरत भी नहीं पड़ती. उदाहरण के लिए, कैमरून ग्रीन को मिलने वाले 25.20 करोड़ रुपये में से भुगतान के समय ही 20 प्रतिशत टैक्स और बाकी सरचार्ज पहले ही काट लिया गया.
दो देशों के बीच टैक्स का समझौता
विदेशी खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ी राहत डबल टैक्स अवॉयडेंस एग्रीमेंट (Double Tax Avoidance Agreements) से मिलती है. एक टैक्स कंसल्टेंसी फर्म के सीईओ प्रभाकर केएस बताते हैं कि भारत सरकार ने कई देशों के साथ यह समझौता किया है, ताकि एक ही कमाई पर खिलाड़ी को दो देशों में टैक्स न देना पड़े. भारत ने अब तक करीब 96 देशों के साथ ऐसे समझौते किए हैं. इसका मतलब यह है कि अगर कोई खिलाड़ी भारत में टैक्स चुका देता है, तो उसे अपने देश में उस कमाई पर टैक्स में छूट या लाभ मिल सकता है.
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मलखान सिंह पिछले 17 वर्षों से ख़बरों और कॉन्टेंट की दुनिया में हैं. प्रिंट मीडिया से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई नामी संस्थानों का नाम प्रोफाइल में जुड़ा है. लगभग 4 साल से News18Hindi के साथ काम कर रहे …और पढ़ें


