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झोपड़ी के नीचे बनते इस समोसे की है गजब की पॉपुलैरिटी, दूर-दूर से खाने आते हैं लोग

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सुल्तानपुर शहर मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर दियरा गांव में एक ऐसी दुकान है जहां दूर-दूर से लोग देशी समोसा खाने के लिए आते हैं जिसमें जमीन के नीचे खुदाई करके एक भट्टी बनाई जाती है और इस भट्टी पर आग जलाकर इस पर कढ़ाई में समोसा तला जाता है. साथ ही समोसे को स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें कम से कम मसाले और हींग डाली जाती है.

सुल्तानपुर: आज के समय में हर व्यक्ति अच्छा और बेहतर खाना चाहता है. ऐसे में अगर आप समोसे के शौकीन हैं और देशी तरीके से समोसे का स्वाद लेना चाहते हैं तो आज हम आपको बताने वाले हैं सुल्तानपुर की एक ऐसी दुकान के बारे में जो ग्रामीण इलाके में है और दिखने में बहुत ही साधारण है लेकिन यहां के समोसे का स्वाद इतना बेहतर है कि लोग कई किलोमीटर दूर चलकर यहां के समोसे का स्वाद लेने आते हैं. यह दुकान है सुल्तानपुर शहर मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर दियरा गांव में है जहां झोपड़ी के नीचे दुकान चलाई जाती है लेकिन अपने देशी मसाले और स्वाद को लेकर यह चर्चा में रहती है.

इसलिए प्रसिद्ध है समोसा
बता दें कि दुकानदार देउस राज यादव लोकल 18 से बताते हैं कि उनकी समोसे की यह दुकान पिछले 5 वर्षों से चल रही है और उनके द्वारा बनाये गए समोसे इसलिए प्रसिद्ध हैं, क्योंकि इसमें हींग का विशेष रूप से प्रयोग किया जाता है जिससे समोसे में अलग महक होती है और इसके साथ ही इसे किसी गैस या फिर इंडक्शन पर नहीं, बल्कि इसके लिए देशी तरीका अपनाया जाता है. जिसमें जमीन के नीचे खुदाई करके एक भट्टी बनाई गई है और इस भट्टी पर आग जलाकर इस पर कढ़ाई में समोसा तला जाता है. यही वजह है कि समोसे का स्वाद अन्य दुकानों की अपेक्षा अलग होता है.

नहीं करते अधिक मसाले का इस्तेमाल
देउसराज से जब उनके समोसे में प्रयोग किए जाने वाले मसाले को लेकर बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह घर पर ही मसाले को तैयार करते हैं. सबसे खास बात यह है कि वह समोसे में ज्यादा मसाले नहीं डालते. वे हींग, जीरा,खड़ी धनिया, हरी धनिया और नमक का प्रयोग करते हैं लेकिन आग की भट्टी में समोसा डालने की वजह से वह ज्यादा स्वादिष्ट हो जाता है. हालांकि देउसराज ज्यादा तो पढ़े नहीं हैं लेकिन वह प्रतिदिन समोसे की अच्छी बिक्री कर रहे हैं.

दूर-दूर से आते हैं लोग
बता दें कि सुल्तानपुर के काछा भेटौरा चौराहे पर देउसराज पिछले 5 वर्षों से समोसा बनाकर बेचते हैं. उनके समोसे के स्वाद की वजह से सिर्फ आसपास के गांव के लोग ही नहीं, बल्कि सुल्तानपुर शहर के लोग भी उनके दुकान के समोसे खाने के लिए जाते हैं. हालांकि उनके समोसे का आकार बहुत बड़ा नहीं है लेकिन स्वाद ऐसा है कि दूर-दूर से लोग हैं. अगर आप भी यह समोसा खाना चाहते हैं तो आपको सुल्तानपुर शहर से लगभग 22 किलोमीटर दूर का काछा भेटौरा आना होगा.

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शिवानी गुप्ता

Shivani Gupta is a Media Professional with 3 years of experience in reporting, content writing and production. She has worked with reputed media organizations like News18, Hindustan Times⁠, DEN Kashi ⁠and The L…और पढ़ें



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