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रामपुर के किसान अंकुर त्रिवेदी 20 एकड़ में करते है पंगेशियस मछली का पालन, कम लागत में करते हैं लाखों में कमाई

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Fish farming Rampur: अंकुर त्रिवेदी बताते हैं कि पंगेशियस मछली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बहुत तेजी से बढ़ती है जहां दूसरी मछलियों को तैयार होने में ज्यादा समय लगता है. वहीं पंगेशियस सिर्फ 5 से 6 महीने में बाजार के लिए तैयार हो जाती है. कई मछलियां 3 महीने में ही 700 से 800 ग्राम तक पहुंच जाती हैं. किसान ने अपने सभी तालाबों के ऊपर मजबूत तार का जाल भी लगवाया है. इसका मुख्य कारण मछलियों को बगुलों, किंगफिशर यानी रामचिरैया और दूसरे जलीय पक्षियों से बचाना है.

रामपुर: खेती के साथ मछली पालन भी किसानों को अच्छा फायदा दे रहा है. कम समय में तैयार होने वाली पंगेशियस मछली की मांग बाजार में तेजी से बढ़ रही है इसलिए अब किसान बड़े स्तर पर इसका पालन कर रहे हैं. रामपुर में भी कई किसान पंगेशियस पालन से अच्छी कमाई कर रहे हैं क्योंकि इसमें लागत कम और उत्पादन ज्यादा मिलता है. रामपुर जिले की मिलक तहसील के गांव धनौरा में अंकुर त्रिवेदी पिछले करीब 5 सालों से मछली पालन कर रहे हैं. इस समय उन्होंने करीब 20 एकड़ में मछली पालन किया हुआ है. किसान का कहना है कि इस बार उन्होंने करीब ढाई से तीन लाख मछलियां तालाबों में छोड़ी हैं.

3 महीने में बड़ी हो जाती हैं मछलियां

अंकुर त्रिवेदी बताते हैं कि पंगेशियस मछली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बहुत तेजी से बढ़ती है जहां दूसरी मछलियों को तैयार होने में ज्यादा समय लगता है. वहीं पंगेशियस सिर्फ 5 से 6 महीने में बाजार के लिए तैयार हो जाती है. कई मछलियां 3 महीने में ही 700 से 800 ग्राम तक पहुंच जाती हैं. किसान ने अपने सभी तालाबों के ऊपर मजबूत तार का जाल भी लगवाया है. इसका मुख्य कारण मछलियों को बगुलों, किंगफिशर यानी रामचिरैया और दूसरे जलीय पक्षियों से बचाना है. ये पक्षी तालाब में उतरकर छोटी मछलियों को खा जाते हैं जिससे बड़ा नुकसान हो सकता है.

मछलियों को मिलता है ऑक्सीजन

उन्होंने बताया कि जब छोटे बच्चे यानी फ्राई और फिंगरलिंग तालाब में छोड़े जाते हैं. तब वे पक्षियों का सबसे आसान शिकार बनते हैं इसलिए जाल लगाना बहुत जरूरी हो जाता है. इसके अलावा जाल तालाब में पत्तियां और बाहर का कचरा गिरने से भी रोकता है. इससे पानी साफ रहता है और मछलियों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती रहती है. किसान के मुताबिक पंगेशियस पालन में लागत भी कम आती है. उन्होंने बताया कि एक किलो मछली तैयार करने में करीब 70 रुपये तक की लागत आती है जबकि बाजार में इसकी कीमत 110 रुपये से लेकर 160 रुपये प्रति किलो तक मिल जाती है.

पंगेशियस मछली की होती है खूब डिमांड

पंगेशियस मछली की एक और खास बात यह है कि यह कम ऑक्सीजन वाले पानी में भी आसानी से जीवित रह सकती है. यही वजह है कि कम जगह और ज्यादा घनत्व में भी इसकी खेती की जा सकती है. यह मछली रोगों से भी काफी हद तक सुरक्षित रहती है. जिससे नुकसान की संभावना कम हो जाती है. अंकुर त्रिवेदी बताते हैं कि पहले इस मछली के बच्चे कोलकाता से मंगाने पड़ते थे लेकिन अब रामपुर में भी पंगेशियस हैचरी शुरू हो गई हैं. इससे किसानों को आसानी से मछली के बच्चे मिल जाते हैं और खर्च भी कम हो गया है. अंकुर  त्रिवेदी बताते है कि पंगेशियस मछली की मांस सफेद होता है और इसमें पतले कांटे कम होते हैं इसलिए लोग इसे ज्यादा पसंद करते हैं. होटल और बड़े बाजारों में इसकी खपत हो जाती है मुझे रामपुर से बाहर भेजने की जरूरत ही नही पड़ती है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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