नई दिल्ली. आसमान की ऊंचाइयों में जब सन्नाटा छा जाए, तो समझ लीजिए कि ‘बायरकतार अकिंची’ अपनी अगली चाल चल चुका है. यह कोई साधारण ड्रोन नहीं बल्कि हवा में तैरता एक ऐसा अदृश्य योद्धा है जो ड्रोन की खामोशी के साथ लड़ाकू विमानों जैसा प्रचंड प्रहार करने का दम रखता है. पाकिस्तान की झोली में गिरा यह तुर्की का सबसे घातक हथियार आज दुनिया भर में चर्चा का विषय है क्योंकि इसकी क्रूज मिसाइलें दागने की काबिलियत इसे एक चलता-फिरता मिसाइल बेस बना देती है. विडंबना यह है कि जहां पड़ोसी मुल्क इस ‘फ्लाइंग किलर’ से अपनी हवाई ताकत को कई गुना बढ़ा चुका है, वहीं भारत फिलहाल इस विशेष तकनीक से दूर खड़ा अपनी स्वदेशी तैयारियों में जुटा है. बिना पायलट के ही जंग का रुख मोड़ने वाला यह शिकारी अब दक्षिण एशिया के शक्ति संतुलन को नई चुनौती दे रहा है.
बायरकतार अकिंची को लेकर भारत की तैयारी कैसी है?
· हमलावर तैयारी: भारत ने अमेरिका से 31 MQ-9B प्रीडेटर (Predator) ड्रोन्स का सौदा फाइनल किया है, जिनकी आपूर्ति प्रक्रिया जारी है. यह दुनिया का सबसे घातक ड्रोन है और अकिंची से भी अधिक समय तक हवा में रह सकता है. वहीं, स्वदेशी मोर्चे पर घातक (Ghatak) स्टेल्थ लड़ाकू ड्रोन और आर्चर-एनजी पर तेजी से काम हो रहा है. मार्च 2026 में ही भारत सरकार ने 60 घातक ड्रोन्स की खरीद को मंजूरी दी है, जो रडार की पकड़ में नहीं आते.
· सुरक्षा कवच: पाकिस्तान के ड्रोन खतरे से निपटने के लिए भारत ने S-400 मिसाइल प्रणाली और स्वदेशी कुश (Kusha) प्रोजेक्ट के तहत अपना आयरन डोम तैयार किया है. साथ ही, ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव के बाद सीमा पर एंटी-ड्रोन ग्रिड बिछाया गया है, जो दुश्मन के किसी भी ड्रोन को सीमा पार करते ही मार गिराने में सक्षम है.
| विशेषता | अकिंची (तुर्की) | आर्चर-एनजी (भारत) | MQ-9B (भारत द्वारा अधिग्रहित) |
|---|---|---|---|
| पेलोड (वजन क्षमता) | 1500 किलो | ~400 किलो | 1700+ किलो |
| क्रूज मिसाइल | हां (SOM) | अभी नहीं | हां (हेलफायर/बम) |
| वर्तमान स्थिति | तैनात (पाकिस्तान के पास) | परीक्षण के दौर में | आपूर्ति प्रक्रिया में |
1. बायरकतार अकिंची (भारी प्रहारक ड्रोन)
यह तुर्की का एक ऐसा मानव रहित विमान है जो युद्ध के मैदान में किसी लड़ाकू विमान की तरह विनाशकारी शक्ति रखता है.
· वजन ढोने की क्षमता: यह 1500 किलोग्राम तक के घातक हथियार और उपकरण लेकर उड़ सकता है.
· मारुति अस्त्र (क्रूज मिसाइल): यह ड्रोन ‘सोम’ (SOM) जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों को दागने में सक्षम है जो दुश्मन के ठिकाने को सैकड़ों किलोमीटर दूर से ही ध्वस्त कर देती हैं.
· दोहरा इंजन: इसमें दो शक्तिशाली इंजन लगे हैं जो इसे अत्यधिक ऊंचाई पर लंबे समय तक टिके रहने की शक्ति देते हैं.
· कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): इसमें एडवांस कंप्यूटर सिस्टम लगा हैं जो बिना किसी मानवीय सहायता के लक्ष्य की पहचान कर सकती हैं.
2. गोकडोगन और बोजडोगन (हवा से हवा में प्रहार करने वाला अस्त्र)
ये मिसाइलें आकाश में तुर्की की वायु सेना की ‘आंख और तलवार’ मानी जाती हैं.
· बोजडोगन (कम दूरी का प्रहार):
o यह मिसाइल आंखों के सामने दिखने वाले दुश्मन के विमानों को नष्ट करने के लिए बनी है.
o इसमें इंफ्रारेट रेज तकनीक लगी है जो दुश्मन के विमान की गर्मी का पीछा करके उसे राख कर देती है.
· गोकडोगन (लंबी दूरी का प्रहार):
o यह मिसाइल उन दुश्मनों को मार गिराती है जो नंगी आंखों से दिखाई नहीं देते.
o इसमें स्वयं की रडार प्रणाली (Radar) लगी है, जो बादलों के पार छिपे दुश्मन को भी खोजकर निशाना बनाती है.
विशेषताएं
· पूर्ण स्वदेशी: इन हथियारों का निर्माण पूरी तरह तुर्की की अपनी तकनीक और संसाधनों से हुआ है.
· अजेय शक्ति: अकिंची ड्रोन से इन मिसाइलों को दागने के बाद तुर्की को अब किसी विदेशी शक्तिशाली देश की सहायता की आवश्यकता नहीं रह गई है.
· सटीक निशाना: लेजर और रडार की मदद से ये हथियार अचूक वार करते हैं, जिससे शत्रु को बचने का कोई अवसर नहीं मिलता.
सवाल-जवाब
1. बायरकतार अकिंची ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत क्या है जो इसे अन्य ड्रोन्स से अलग बनाती है? इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘क्रूज मिसाइल’ दागने की क्षमता है. जहां दुनिया के ज्यादातर ड्रोन केवल छोटे बम या लेजर गाइडेड मिसाइलें ले जा सकते हैं, वहीं अकिंची ‘सोम’ (SOM) जैसी भारी क्रूज मिसाइल लेकर उड़ सकता है और सैकड़ों किलोमीटर दूर से सटीक हमला कर सकता है.
2. क्या पाकिस्तान के पास वाकई यह घातक ड्रोन मौजूद है? हां, पाकिस्तान ने 2023 में ही तुर्की से अकिंची ड्रोन्स की पहली खेप प्राप्त कर ली थी. वर्तमान में पाकिस्तान वायु सेना (PAF) के बेड़े में यह ड्रोन पूरी तरह सक्रिय है और उनके पायलट इसे उड़ाने का प्रशिक्षण भी पूरा कर चुके हैं.
3. भारत के पास अकिंची के स्तर का स्वदेशी ड्रोन क्यों नहीं है? भारत का स्वदेशी ड्रोन कार्यक्रम ‘आर्चर-एनजी’ और ‘तपस’ अभी परीक्षण के दौर में हैं. भारत ने लंबे समय तक निगरानी ड्रोन्स पर ध्यान दिया, लेकिन अब ‘घातक’ (Ghatak) जैसे स्टेल्थ लड़ाकू ड्रोन्स पर काम तेज कर दिया गया है, जो आने वाले कुछ वर्षों में तैयार होंगे.
4. अकिंची ड्रोन के खतरे से निपटने के लिए भारत ने क्या कदम उठाए हैं? भारत ने अमेरिका से 31 ‘MQ-9B प्रीडेटर’ ड्रोन्स का सौदा किया है, जो अकिंची से भी अधिक घातक माने जाते हैं. इसके अलावा, भारत ने सीमा पर ‘एंटी-ड्रोन सिस्टम’ और S-400 जैसी मिसाइल प्रणालियाँ तैनात की हैं जो दुश्मन के ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर सकती हैं.
5. अकिंची ड्रोन कितना वजन (हथियार) ले जा सकता है? यह ड्रोन लगभग 1,500 किलोग्राम तक का युद्धक भार (पेलोड) ले जाने में सक्षम है. इसमें आंतरिक और बाहरी दोनों तरह के हथियारों को लगाने की सुविधा है, जो इसे एक छोटे लड़ाकू विमान के बराबर मारक क्षमता प्रदान करती है.


