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प्रतीक यादव की रहस्यमयी मौत, फिटनेस जुनून से सियासी सस्पेंस

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Prateek Yadav Death Reason: उत्तर प्रदेश की सियासत में ‘सैफई’ का नाम आते ही जेहन में सफेद खादी, रैलियां, और सत्ता के गलियारे घूमने लगते हैं. इस ताकतवर यादव परिवार के लगभग हर सदस्य ने चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन इसी कुनबे में एक चेहरा ऐसा भी था जिसने कभी सत्ता के सिंहासन का ख्वाब नहीं देखा. मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव, जो ‘धरतीपुत्र’ के जिगर के टुकड़े थे, लेकिन हमेशा एक ‘सियासी वनवास’ में रहे. आज जब लखनऊ से उनके निधन की खबर आई, तो हर कोई सन्न रह गया. महज 38 साल की उम्र, फौलादी बदन और फिटनेस का ऐसा जुनून कि लोग उन्हें मिसाल देते थे. लेकिन क्या पता था कि सेहत की नुमाइश करने वाला ये ‘शहजादा’ इतनी जल्दी दुनिया को अलविदा कह देगा. प्रतीक की जिंदगी रहस्यों, विवादों और बेपनाह रसूख के बीच गुजरी. लेकिन इस दुखद घटना के बाद अब पीछे पीछे कई अनसुलझे सवालों को जन्म दे दिया है. आइए इस मौके पर जानते हैं प्रतीक की जिंदगी की कुछ दास्तान जो बहुत कुछ कहती है.

खादी के बीच ‘ग्लैमर’ का इकलौता टापू

यादव परिवार का जिक्र होते ही जहन में रैलियां और जमीनी संघर्ष के आंदोलन आते हैं. लेकिन प्रतीक यादव इस पारंपरिक ढांचे में कभी फिट नहीं बैठे. उन्होंने राजनीति के उबाऊ भाषणों के बजाय जिम के डंबल्स और लग्जरी कारों की रफ्तार को तरजीह दी. जब पूरा परिवार चुनाव जीतने की रणनीति बनाता था, तब प्रतीक अपनी पांच करोड़ की नीली लेम्बोर्गिनी के साथ लखनऊ की सड़कों पर सुर्खियां बटोरते थे. उनके लिए राजनीति कभी प्राथमिकता नहीं रही, बल्कि उन्होंने खुद को एक फिटनेस आइकन और रियल एस्टेट कारोबारी के रूप में स्थापित किया. उन्होंने साबित किया कि आप एक राजनीतिक पावर हाउस के सदस्य होकर भी अपनी अलग दुनिया बसा सकते हैं.

पिता के लाडले और ‘सीक्रेट’ वारिस

प्रतीक यादव का जीवन शुरू से ही चर्चाओं और रहस्यों में घिरा रहा. मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे होने के नाते, उन्हें सार्वजनिक पहचान मिलने में काफी लंबा वक्त लगा. सालों तक दुनिया को पता ही नहीं था कि मुलायम सिंह का एक और बेटा भी है. साल 2007 में एक कानूनी हलफनामे के बाद जब मुलायम सिंह ने उन्हें आधिकारिक तौर पर अपना बेटा स्वीकार किया, तब जाकर वे सुर्खियों में आए. पिता के दिल में उनके लिए एक विशेष कोना था. शायद यही वजह थी कि मुलायम ने उन्हें राजनीति की गंदी उठापटक और षड्यंत्रों से हमेशा दूर रखा और एक सुरक्षित ‘राजकुमार’ की तरह पाला.

जिम का जुनून या जानलेवा तनाव?

प्रतीक के निधन के बाद अब यह बहस छिड़ गई है कि क्या उनकी फिटनेस ही उनकी सबसे बड़ी दुश्मन बन गई? 38 की उम्र में कार्डियक अरेस्ट की खबरें अक्सर सप्लीमेंट्स और ओवर-जिमिंग की ओर इशारा करती हैं. प्रतीक घंटों जिम में पसीना बहाते थे और उनका सोशल मीडिया अकाउंट उनकी मेहनत की गवाही देता था. क्या बॉडीबिल्डिंग के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्रोडक्ट्स ने उनके अंगों पर बुरा असर डाला था?

अपर्णा यादव और वो ‘आखिरी’ विवाद

प्रतीक यादव की मौत से ठीक पहले का समय उनके व्यक्तिगत जीवन के लिए काफी उथल-पुथल भरा रहा. उनकी पत्नी अपर्णा यादव का पाला बदलकर भाजपा में जाना पहले ही परिवार के भीतर एक बड़ी दरार पैदा कर चुका था. लेकिन हाल ही में प्रतीक ने अपने इंस्टाग्राम पर कुछ ऐसे विस्फोटक पोस्ट किए थे, जिन्होंने सबको चौंका दिया. उन्होंने सार्वजनिक तौर पर पत्नी के साथ मतभेदों और तलाक लेने की इच्छा जाहिर की थी. जानकारों का मानना है कि यह मानसिक तनाव उन्हें अंदर ही अंदर खा रहा था. एक ‘शहजादा’ जो बाहर से सब कुछ हासिल कर चुका था, अंदर से बेहद तन्हा और परेशान था.

भाई अखिलेश और अधूरा पारिवारिक रिश्ता

प्रतीक के लिए ‘सियासी वनवास’ महज एक शब्द नहीं, बल्कि एक कड़वी हकीकत थी. बड़े भाई अखिलेश मुख्यमंत्री बने, लेकिन प्रतीक कभी किसी चुनावी मंच या सरकारी बैठक में नजर नहीं आए. लोगों का मानना है कि परिवार के भीतर की ‘पावर पॉलिटिक्स’ ने उन्हें मुख्यधारा से काटकर रखा. अखिलेश यादव के साथ उनके रिश्तों में हमेशा एक औपचारिक दूरी देखी गई. प्रतीक ने कभी सत्ता में हिस्सेदारी की मांग नहीं की, बल्कि उन्होंने लखनऊ में अपनी एक अलग सल्तनत बनाई जहां वे रियल एस्टेट और फिटनेस वर्ल्ड के बेताज बादशाह थे.

मुलायम की विरासत का एक दुखद अंत

मुलायम सिंह यादव और साधना गुप्ता के जाने के बाद प्रतीक अपनी मां की विरासत और करोड़ों के कारोबार को संभाल रहे थे. प्रतीक की मौत के साथ ही मुलायम सिंह यादव की उस ‘दूसरी शाखा’ का एक बड़ा अध्याय हमेशा के लिए बंद हो गया है. सैफई से लेकर लखनऊ तक आज मातम पसरा है क्योंकि यादव कुनबे ने अपने उस बेटे को खो दिया है जो भले ही ‘साइकिल’ पर सवार नहीं हुआ, लेकिन परिवार की हर धड़कन से जुड़ा था. अब उनके पीछे उनकी पत्नी अपर्णा और एक छोटी बेटी रह गई हैं, जिनके सिर से साया उठ गया है. यह यादव परिवार की सबसे बड़ी निजी त्रासदी है.

मौत के बाद उठते कई अनसुलझे सवाल

जैसे-जैसे उनके निधन की खबर फैल रही है, सियासी और सामाजिक सवाल भी गहरे होते जा रहे हैं. क्या प्रतीक यादव की मौत के पीछे सिर्फ स्वास्थ्य कारण थे या कोई गहरा मानसिक दबाव? क्या उनका आखिरी सोशल मीडिया पोस्ट किसी आने वाले तूफान का संकेत था? अस्पताल में उन्हें ‘मृत अवस्था’ में लाया जाना कई तरह के संदेह पैदा करता है. मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, फॉरेंसिक टीमें और पुलिस अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं. एक रईस, फिट और रसूखदार युवक की इस तरह अचानक विदाई ने उत्तर प्रदेश के पावर सेंटर्स को हिलाकर रख दिया है.

क्या सियासी साजिश या महज हादसा?

सोशल मीडिया पर प्रतीक की मौत को लेकर कई थ्योरीज चल रही हैं. कोई इसे पारिवारिक कलह का नतीजा बता रहा है, तो कोई इसे ‘लाइफस्टाइल डिजीज’ मान रहा है. चूंकि वे एक बेहद हाई-प्रोफाइल व्यक्ति थे, इसलिए लोग मौत की विस्तृत जांच की मांग कर रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अस्पताल और पुलिस शुरुआती तौर पर इसे कार्डियक अरेस्ट मान रही है, लेकिन प्रतीक के जीवन के आखिरी कुछ महीने इतने तनावपूर्ण थे कि सच अभी भी परतों में छुपा है. सच्चाई क्या है, यह तो जांच का विषय है.



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