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झांसी किले का बड़ा गेट नहीं है मुख्य दरवाजा, 1857 की क्रांति में रानी लक्ष्मीबाई ने कराया था बदलाव, जाने इतिहास

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झांसी का किला सिर्फ पत्थरों से बना एक पुराना ढांचा नहीं है. यह अपने अंदर कई ऐसी कहानियां छुपाए हुए है. जिनके बारे में आज बहुत कम लोग जानते हैं. किले में आने वाले ज्यादातर लोग उस बड़े गेट को ही मुख्य दरवाजा मानते हैं, जो आज सबसे पहले दिखाई देता है. लेकिन सच यह है कि पुराने समय में किले का असली मुख्य रास्ता कुछ और था. वह रास्ता सीधे पुराने झांसी शहर की तरफ खुलता था.

झांसीः झांसी का किला सिर्फ पत्थरों से बना एक पुराना ढांचा नहीं है. यह अपने अंदर कई ऐसी कहानियां छुपाए हुए है. जिनके बारे में आज बहुत कम लोग जानते हैं. किले में आने वाले ज्यादातर लोग उस बड़े गेट को ही मुख्य दरवाजा मानते हैं, जो आज सबसे पहले दिखाई देता है. लेकिन सच यह है कि पुराने समय में किले का असली मुख्य रास्ता कुछ और था. वह रास्ता सीधे पुराने झांसी शहर की तरफ खुलता था. उसी रास्ते से लोग किले तक पहुंचते थे और वहीं से सैनिकों की आवाजाही भी होती थी.

पुराने समय में किलों को सिर्फ रहने के लिए नहीं बनाया जाता था. उनकी बनावट इस तरह की जाती थी ताकि दुश्मन आसानी से अंदर न पहुंच सके. झांसी किले का असली मुख्य दरवाजा भी इसी सोच के साथ बनाया गया था. यह रास्ता शहर की गलियों और बाजारों से जुड़ा हुआ था. यहां हमेशा सैनिकों की निगरानी रहती थी. किले में आने जाने वाले हर इंसान पर नजर रखी जाती थी. अगर किसी अनजान व्यक्ति पर शक होता था तो उसे वहीं रोक लिया जाता था.

रानी के जाने के लिए था विशेष रास्ता

कहा जाता है कि इसी रास्ते से रानी लक्ष्मीबाई भी गणेश मंदिर जाया करती थीं. गणेश मंदिर रानी की आस्था का खास स्थान माना जाता था. जब रानी मंदिर के लिए निकलती थीं तब उनके साथ सैनिक भी चलते थे. पूरे रास्ते की सुरक्षा बढ़ा दी जाती थी ताकि किसी तरह का खतरा न रहे. उस समय झांसी के लोग अपनी रानी को बहुत मानते थे. जैसे ही लोगों को पता चलता था कि रानी इस रास्ते से गुजरने वाली हैं वैसे ही बाजारों और गलियों में भीड़ लग जाती थी. बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सिर्फ एक झलक पाने के लिए खड़े रहते थे.

धीरे धीरे यह रास्ता सिर्फ आने जाने का रास्ता नहीं रहा. यह झांसी की पहचान का हिस्सा बन गया. इसी रास्ते से रानी जनता के बीच जाती थीं. लोगों की समस्याएं सुनती थीं और मंदिर भी जाती थीं. यही वजह थी कि झांसी के लोगों का इस रास्ते से एक भावनात्मक जुड़ाव बन गया था. आज भी पुराने शहर के कुछ बुजुर्ग इस रास्ते से जुड़ी बातें सुनाते हैं.

1857 में संरचना में किया बदलाव

1857 का समय, जब पूरे देश में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह शुरू हुआ. झांसी भी इस क्रांति का बड़ा केंद्र बन गया. रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के खिलाफ खुलकर लड़ाई लड़ी. इसी कारण अंग्रेज झांसी किले को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए थे. जब अंग्रेजों ने झांसी पर कब्जा किया तब उन्होंने किले की संरचना में कई बदलाव किए. उनका मानना था कि किले का शहर से सीधे जुड़ा रहना खतरे की बात हो सकती है.

इसी वजह से पुराने रास्तों और दरवाजों को बंद करना शुरू कर दिया गया. धीरे धीरे किले का असली मुख्य दरवाजा भी लोगों की नजरों से दूर होता चला गया. शहर की बसावट बदलती गई और नया रास्ता लोगों के सामने मुख्य प्रवेश द्वार बनकर आ गया. समय बीतता गया और ज्यादातर लोग असली दरवाजे के बारे में भूल गए.

आज भी जब कोई झांसी किले को ध्यान से देखता है तो उसे एहसास होता है कि यह सिर्फ एक किला नहीं बल्कि इतिहास की जिंदा निशानी है. यहां का हर रास्ता हर दीवार और हर दरवाजा अपने अंदर बीते समय की कहानी छुपाए बैठा है. शायद यही वजह है कि झांसी का किला आज भी लोगों को अपनी तरफ खींचता है.

About the Author

Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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