Last Updated:
IBC Impact : 10 साल पहले बनाए गए आईबीसी कानून के तहत बैंकों को अब तक 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम वापस मिली है. इस कानून का मकसद बैंकों के कर्ज पर डिफॉल्ट करने वाली कॉरपोरेट कंपनियों से फंसे कर्ज की वसूली करना है.
आईबीसी कानून ने कॉरपोरेट डिफॉल्ट के 8,800 मामले सुलझाए हैं.
नई दिल्ली. एक समय था जब देश के ज्यादातर सरकारी बैंकों पर बैड लोन का भारी-भरकम बोझ लदा था. हर किसी की बैलेंस शीट बिगड़ रही थी और कॉरपोरेट सेक्टर से अपना मोटा कर्ज वसूलने में बैंक व कानून दोनों नाकाम हो रहे थे. ऐसे में मोदी सरकार ने एक नया कानून बनाया, जिसने एक दशक से भी कम समय में कॉरपोरेट बैड लोन के 8,800 से ज्यादा मामलों का समाधान कर दिया. इस कानून ने अभी तक बैंकों को 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की वसूली करने में भी मदद की है.
वित्त सेवा सचिव एम नागराजू ने बताया कि दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता कानून (आईबीसी) को 28 मई, 2016 को लागू किया गया था. तब से लेकर दिसंबर, 2025 तक कर्ज समाधान प्रक्रिया के तहत 8,800 से अधिक मामले स्वीकार किए गए और उनके जरिये बैंकों को 4.11 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि वापस मिली है. नागराजू ने कहा कि इस कानून के तहत 4,000 से अधिक कॉरपोरेट देनदारों का समाधान, समझौते, वापसी या अपील से जुड़े मामलों के जरिये निपटारा किया जा चुका है.
इस कानून से क्या मिला फायदा
नागराजू ने कहा कि आईबीसी ने देश में समयबद्ध और लेनदार-केंद्रित दिवाला समाधान ढांचा स्थापित किया है, जिससे कर्ज अनुशासन मजबूत हुआ है और तनावग्रस्त कंपनियों को डिजॉल्व करने की बजाय उनके पुनरुद्धार और परिसंपत्ति मूल्य अधिकतम करने पर ध्यान केंद्रित हुआ है. आईबीसी कानून में हाल के सुधारों से समाधान प्रक्रिया अधिक प्रभावी और तेज होगी. कानून में हुए हाल के संशोधनों जैसे समूह दिवाला, सीमा-पार दिवाला और ऋणदाता-प्रेरित समाधान जैसी प्रक्रिया ने बैंकों को और राहत पहुंचाई है.
कर्ज वसूली में आई पारदर्शिता
भारतीय दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) के चेयरपर्सन रवि मित्तल ने कहा कि आईबीसी ने संस्थागत क्षमता बढ़ाने, कर्जदाताओं का विश्वास मजबूत करने और पारदर्शिता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है. 10 साल पहले जब इस कानून को लागू किया गया था, तब भारतीय बैंकों पर बैड लोन का भारी-भरकम बोझ था. आईबीसी कानून ने बैंकों को ज्यादा अधिकार दिलाए और मामले के तेज निपटारे के लिए कानून को सरल किया गया. अब आईबीसी के तहत कंपनियों को दोबारा शुरू करने से लेकर, उनकी संपत्ति का सही मूल्यांकन कर उसे बेचने पर जोर दिया जा रहा है. इस प्रक्रिया से बैंकों के बैड लोन की वसूली और आसान हो रही है.
क्या है आईबीसी की खासियत
आईबीसी को बैंकों के बैड लोन की वसूली का लक्ष्य बनाकर ही स्थापित किया गया है. जाहिर है कि इसका एकमात्र मकसद बैंकों के दबे कर्ज को वापस दिलाना है. यही वजह है कि आईबीसी कानून के तहत पहले मामला निपटाने के लिए 330 दिन का समय दिया जाता था, जिसे अब घटाकर महज 180 दिन कर दिया गया है. इसका मतलब है कि डिफॉल्ट करने वाली कंपनियों को अब महज 6 महीने के भीतर अपनी कर्ज समाधान योजना पेश करनी होगी.
About the Author
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें


