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आईआईटी और एचबीटीयू के वैज्ञानिकों ने जलने के घावों के इलाज के लिए एक नई बायोडिग्रेडेबल फोम ड्रेसिंग विकसित करने की दिशा में अहम कदम बढ़ाया है. यह ड्रेसिंग घाव से नहीं चिपकेगी, संक्रमण रोकने में मदद करेगी और घाव को तेजी से भरने में सहायक होगी. रिसर्च की प्रेरणा कानपुर के हैलेट अस्पताल के बर्न वार्ड में मरीजों की समस्याओं को देखकर मिली. वैज्ञानिकों का दावा है कि यह तकनीक भविष्य में कम कीमत पर सरकारी अस्पतालों के मरीजों के लिए भी उपलब्ध कराई जा सकती है.
कानपुर. जलने के बाद होने वाले घाव कई बार लोगों की जिंदगी बेहद मुश्किल बना देते हैं. कई मरीज ऐसे होते हैं जिनके घाव जल्दी ठीक नहीं होते. घाव में संक्रमण हो जाता है, बार-बार ड्रेसिंग बदलनी पड़ती है और मरीज को काफी दर्द सहना पड़ता है. खासतौर पर सरकारी अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीजों के लिए यह परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है. अब कानपुर के वैज्ञानिकों ने इस समस्या का नया समाधान खोजने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है. आईआईटी कानपुर और हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक मिलकर एक ऐसी नई ड्रेसिंग सामग्री तैयार कर रहे हैं, जो जलने वाले घावों को जल्दी भरने में मदद करेगी. यह ड्रेसिंग खास तरह के बायोडिग्रेडेबल फोम से बनाई जा रही है. इस रिसर्च में आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर विवेक वर्मा, प्रोफेसर नीरज सिन्हा और एचबीटीयू के प्रोफेसर ललित कुमार सिंह अहम भूमिका निभा रहे हैं. वहीं रिसर्च स्कॉलर श्रुति भी इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगातार काम कर रही हैं.
घाव से नहीं चिपकेगी नई ड्रेसिंग
इस रिसर्च की शुरुआत तब हुई जब वैज्ञानिकों ने कानपुर के हैलेट अस्पताल के बर्न वार्ड में भर्ती मरीजों की हालत को करीब से समझा.वहां यह सामने आया कि बाजार में मिलने वाली कई ड्रेसिंग सामग्री घाव से चिपक जाती हैं. ऐसे में जब ड्रेसिंग बदली जाती है तो मरीज को असहनीय दर्द झेलना पड़ता है. इसके अलावा कई ड्रेसिंग संक्रमण रोकने और घाव में जरूरी नमी बनाए रखने में भी पूरी तरह कारगर साबित नहीं होती. इन्हीं परेशानियों को देखते हुए वैज्ञानिकों ने नई तकनीक पर काम शुरू किया. यह नया फोम बेहद हल्का और मुलायम बनाया जा रहा है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह घाव से निकलने वाले तरल पदार्थ को तेजी से सोख लेता है और घाव में जरूरी नमी भी बनाए रखता है. इससे घाव जल्दी भरने में मदद मिल सकती है. साथ ही यह घाव से ज्यादा चिपकता भी नहीं है, जिससे ड्रेसिंग बदलते समय मरीज को कम दर्द होगा.
संक्रमण रोकने में भी करेगा मदद
प्रोफेसर ललित कुमार सिंह ने बताया कि यह नई ड्रेसिंग मरीजों के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है. इसमें ऐसे प्राकृतिक गुण मौजूद हैं जो संक्रमण को रोकने में मदद करेंगे. साथ ही यह घाव को सुरक्षित रखते हुए तेजी से भरने में भी सहायक होगी. उन्होंने बताया कि कोशिश यह है कि भविष्य में यह तकनीक कम कीमत में मरीजों तक पहुंच सके ताकि सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले लोग भी इसका फायदा उठा सकें. आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर विवेक वर्मा और प्रोफेसर नीरज सिन्हा भी इस रिसर्च को आगे बढ़ाने में जुटे हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल इस तकनीक पर लैब में काम चल रहा है और शुरुआती नतीजे काफी अच्छे सामने आए हैं. अगर यह रिसर्च पूरी तरह सफल रही तो आने वाले समय में जलने वाले मरीजों के इलाज में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.इससे मरीजों को कम दर्द झेलना पड़ेगा, संक्रमण का खतरा घटेगा और घाव भी पहले के मुकाबले तेजी से भर सकेंगे.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें


