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India Italy Agreements: कपड़ा, चमड़ा, फार्मास्यूटिकल्स… भारत-इटली के बीच हुए 15 समझौते, जानें क्‍या होगा फायदा

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कपड़ा, चमड़ा, फार्मास्यूटिकल्स… भारत-इटली के बीच हुए 15 समझौते

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भारत और इटली के बीच रिश्ते अब सिर्फ डिप्लोमैटिक मुलाकातों तक सीमित नहीं रहे. दोनों देशों ने कपड़ा, चमड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, ग्रीन एनर्जी, टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्रियल सहयोग समेत 15 बड़े समझौतों पर सहमति बनाई है. इन डील्स को भारत-इटली आर्थिक साझेदारी के नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है, जिससे कारोबार, निवेश और रोजगार के नए मौके खुल सकते हैं.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच हुई हाईलेवल मीटिंग के बाद दोनों देशों ने अपने रिश्तों को अपग्रेड करते हुए स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की घोषणा की. इसके साथ ही 15 डील पर साइन हुई, ज‍िसमें ट्रेड को 20 ब‍िल‍ियन यूरो (लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपये) के पार ले जाना और ‘मेक इन इंडिया-मेक इन इटली’ में भागीदारी बढ़ाना है. इन फैसलों से कपड़ा, चमड़ा, फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र को बड़ा फायदा होने वाला है. हम आपको हर समझौते में भारत के ल‍िए क्‍या है, वो बता रहे हैं.

स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप

  • क्या है समझौता: दोनों देशों ने अपने पारंपरिक द्विपक्षीय संबंधों को अपग्रेड करते हुए विशेष रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया है.
  • इससे क्या मिलेगा: इससे भारत और इटली के बीच व्यापार, तकनीक, क्लीन एनर्जी, सुरक्षा और इनोवेशन के क्षेत्रों में सहयोग को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी. साथ ही, दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी संबंध, शिक्षा, संस्कृति और गतिशीलता के नए रास्ते खुलेंगे.

ड‍िफेंस एंड स‍िक्‍योर‍िटी

  • क्या है समझौता: दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में इंडस्ट्रियल रोडमैप और जॉइंट डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके तहत ज्‍वाइंट म‍िलि‍ट्री एक्‍सरसाइज, इंटेलिजेंस शेयरिंग और आतंकवाद विरोधी नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा.
  • इससे क्या मिलेगा: इस समझौते से इटली की दिग्गज रक्षा कंपनियों के लिए भारत में सैन्य उपकरणों के कोड‍िजाइन, कोप्रोडक्‍शन का रास्ता खुलेगा. भारतीय सेनाओं को अत्याधुनिक डिफेंस टेक्नोलॉजी मिलेगी और भारत को रक्षा विनिर्माण का ग्लोबल हब बनने में मदद मिलेगी.

ट्रेड एंड इन्‍वेस्‍टमेंट

  • क्या है समझौता: दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को 2029 तक बढ़ाकर लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपये करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. साथ ही भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को जल्द लागू करने पर सहमति बनी है.
  • इससे क्या मिलेगा: भारत में पहले से सक्रिय 800 से अधिक इतालवी कंपनियों का निवेश बढ़ेगा. भारतीय कपड़ा, चमड़ा, फार्मास्यूटिकल्स और कृषि-खाद्य उत्पादों के लिए यूरोप का एक बड़ा बाजार खुलेगा, जिससे भारत में बड़े पैमाने पर नए रोजगार पैदा होंगे और आर्थिक विकास को गति मिलेगी.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर

  • क्या है समझौता: भारत के मानव-केंद्रित तकनीक दृष्टिकोण और इटली की अल्गोर-एथिक्स परंपरा को मिलाकर दोनों देश सुरक्षित एआई, डिजिटल क्षमता निर्माण और साइबर सुरक्षा में सहयोग करेंगे.
  • इससे क्या मिलेगा: दोनों देशों के आईटी विशेषज्ञ और सुपरकंप्यूटर्स मिलकर अगली पीढ़ी की एआई तकनीक विकसित करेंगे. भारतीय फिनटेक और टेक-स्टार्टअप्स को ग्लोबल प्लेटफॉर्म मिलेगा. इसके अलावा, साइबर हमलों से निपटने के लिए एक मजबूत और सुरक्षित डिजिटल स्पेस का निर्माण होगा.

अंतरिक्ष और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी

  • क्या है समझौता: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और इटली की अंतरिक्ष एजेंसी के बीच अंतरिक्ष अन्वेषण, सैटेलाइट विकास और रिमोट सेंसिंग तकनीकों के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान के लिए समझौता हुआ है.
  • इससे क्या मिलेगा: भारत की किफायती एवं उन्नत अंतरिक्ष क्षमता और इटली की एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के मिलन से कम लागत वाले कमर्शियल सैटेलाइट्स का निर्माण होगा. अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारतीय वैज्ञानिकों को नई ग्लोबल लैब और अत्याधुनिक तकनीकों का एक्सेस मिलेगा.

ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन मिशन

  • क्या है समझौता: स्वच्छ ऊर्जा, रिन्यूएबल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट ग्रिड और हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी के विकास के लिए दोनों देशों ने ऊर्जा साझीदारी को नई दिशा देने की घोषणा की है.
  • इससे क्या मिलेगा: भारत का ग्रीन हाइड्रोजन एक्सपोर्ट हब बनने का सपना सच होगा. इटली की उन्नत रिन्यूएबल ऊर्जा तकनीकों की मदद से भारत को अपने नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य को समय से पहले हासिल करने में मदद मिलेगी और देश में स्वच्छ ऊर्जा सस्ती होगी.

क्रिटिकल मिनरल्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग

  • क्या है समझौता: दोनों देशों ने भविष्य की तकनीकों के लिए जरूरी क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट) की सप्लाई चेन को सुरक्षित करने और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग पर हाथ मिलाया है.
  • इससे क्या मिलेगा: इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs), सेमीकंडक्टर्स और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में भारत की विदेशी निर्भरता कम होगी. भारतीय ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों को कच्चे माल की बिना रुके आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जिससे घरेलू स्तर पर उत्पादन लागत काफी घट जाएगी.

भारतीय नर्सों के लिए इटली में रोजगार

  • क्या है समझौता: भारत से इटली में नर्सिंग प्रोफेशनल्स की गतिशीलता और आसान आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिए दोनों देशों के बीच सहमति बनी है.
  • इससे क्या मिलेगा: यह समझौता भारतीय नर्सों के लिए इटली में रोजगार के बड़े और नए अवसर पैदा करेगा. इससे वैश्विक स्तर पर भारतीय कार्यबल की गुणवत्ता को पहचान मिलेगी और दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की क्षमता निर्माण में सुधार होगा.

प्रवासन और गतिशीलता

  • क्या है समझौता: दोनों नेताओं ने ‘माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप एग्रीमेंट’ को पूरी तरह लागू करने की प्रतिबद्धता जताई है, जिससे कानूनी रूप से प्रतिभाओं का आदान-प्रदान आसान हो सके.
  • इससे क्या मिलेगा: भारतीय छात्रों, शोधकर्ताओं और स्किल्ड प्रोफेशनल्स (जैसे इंजीनियर्स, डॉक्टर्स और नर्सों) के लिए इटली में पढ़ाई और नौकरी के रास्ते बेहद आसान हो जाएंगे. इससे अवैध प्रवासन पर रोक लगेगी और भारतीय युवाओं को यूरोपीय वर्क परमिट आसानी से मिल सकेगा.

कनेक्टिविटी और आईएमईसी कॉरिडोर

  • क्या है समझौता: दोनों देश भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEEC) के त्वरित क्रियान्वयन और बंदरगाहों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए पूरी तरह सहमत हुए हैं.
  • इससे क्या मिलेगा: भारत से यूरोप तक माल पहुंचाने का समय और लागत 40% तक कम हो जाएगी. इटली यूरोप के लिए भारत का ‘एनर्जी और लॉजिस्टिक्स गेटवे’ बनेगा. भारतीय समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर आधुनिक होगा और वैश्विक व्यापार में भारत की रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी.

वैश्विक गठबंधन और समुद्री सुरक्षा

  • क्या है समझौता: इटली ने भारत के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA), आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (CDRI) और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (GBA) में सक्रिय सहयोग का संकल्प लिया है.
  • इससे क्या मिलेगा: वैश्विक मंचों पर भारत की साख बढ़ेगी. दोनों देश मिलकर हिंद-प्रशांत और भूमध्यसागरीय क्षेत्र में समुद्री लुटेरों, ड्रग तस्करी और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराधों के खिलाफ साझा गश्त करेंगे, जिससे भारतीय व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित समुद्री मार्ग उपलब्ध हो सकेगा.

संस्कृति, पर्यटन और शैक्षणिक सहयोग

  • क्या है समझौता: दोनों देशों ने वर्ष 2027 को भारत और इटली के बीच संस्कृति और पर्यटन वर्ष के रूप में मनाने का फैसला किया है. साथ ही विश्वविद्यालयों के बीच समझौतों को बढ़ावा दिया जाएगा.
  • इससे क्या मिलेगा: काशी (वाराणसी) और रोम जैसी दो प्राचीन सभ्यताओं के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान से दोनों देशों में पर्यटन उद्योग को भारी बढ़ावा मिलेगा. भारतीय विश्वविद्यालयों और फिल्म जगत को वैश्विक पहचान मिलेगी, जिससे दोनों देशों के नागरिकों के बीच संबंध और गहरे होंगे.

समुद्री परिवहन और बंदरगाह विकास

  • क्या है समझौता: दोनों देशों ने समुद्री व्यापार को रफ्तार देने के लिए समुद्री परिवहन और पोर्ट सहयोग बढ़ाने के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.
  • इससे क्या मिलेगा: यह समझौता भारत के समुद्री बुनियादी ढांचे को वैश्विक मानकों के अनुरूप मजबूत करेगा. बंदरगाहों के आधुनिक होने और समुद्री व्यापार बढ़ने से इस सेक्टर में बड़े पैमाने पर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.

आर्थिक अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग पर लगाम

  • क्या है समझौता: भारत के प्रवर्तन निदेशालय (ED) और इटली की कॉर्प्स ऑफ द ग्वार्डिया डी फिनान्जा के बीच वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए एक बड़ा समझौता हुआ है.
  • इससे क्या मिलेगा: इसका मुख्य उद्देश्य टैक्स चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग यानी आतंकवादी वित्तपोषण जैसे गंभीर आर्थिक अपराधों पर सख्ती से लगाम लगाना है. इससे आर्थिक और वित्तीय मामलों में दोनों देशों के बीच क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिलेगा.

आयुर्वेद का वैश्विक विस्तार

  • क्या है समझौता: भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को यूरोप में स्थापित करने के लिए दोनों देशों ने आयुर्वेद के क्षेत्र में सहयोग के लिए हाथ मिलाया है.
  • इससे क्या मिलेगा: यह समझौता वैश्विक स्तर पर भारतीय आयुर्वेदिक ज्ञान और चिकित्सा को बढ़ावा देगा. इसके जरिए दोनों देशों के संस्थानों के बीच सीधा जुड़ाव बनेगा और फैकल्टी व छात्रों के आदान-प्रदान के माध्यम से आयुर्वेद पर संयुक्त अनुसंधान तेज होगा.

सी-फूड एक्सपोर्ट को बढ़ावा

  • क्या है समझौता: भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण और इतालवी सी-फूड कंपनियों के संघ के बीच एक बड़ा व्यापारिक समझौता हुआ है.
    इससे क्या मिलेगा: इससे भारत से इटली को होने वाले समुद्री उत्पादों के निर्यात को भारी बढ़ावा मिलेगा। इतालवी बाजारों में भारतीय सी-फूड की पहुंच बढ़ने से भारत के समुद्री खाद्य उद्योग का व्यापार बढ़ेगा और मछुआरों को फायदा होगा.

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Gyanendra Mishra

Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें



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