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Dairy Farming Success Story: सीतामढ़ी के सुनील कुमार ने पारंपरिक व्यवसाय छोड़ डेयरी फार्मिंग के जरिए सफलता की नई इबारत लिखी है. मात्र 22 पशुओं और आधुनिक प्रबंधन से वे रोजाना 200 लीटर दूध का उत्पादन कर सालाना 25 लाख का टर्नओवर और 10 लाख तक का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं. उनकी यह प्रेरक कहानी क्षेत्र के युवाओं को कृषि आधारित स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भर बनने का संदेश दे रही है.
सीतामढ़ी: जिले के डुमरा प्रखंड के आजमगढ़ गांव निवासी सुनील कुमार ने आज के युवाओं के लिए स्वरोजगार की एक नई राह दिखाई है. कुछ साल पहले तक सुनील पारंपरिक बिजनेस से जुड़े थे, लेकिन मन के मुताबिक लाभ न होने और कुछ नया करने की चाह में उन्होंने डेयरी फार्मिंग का रुख किया. पिछले चार वर्षों से वे इस क्षेत्र में पूरी लगन के साथ काम कर रहे हैं. आज उनकी आधुनिक गौशाला केवल एक डेयरी फार्म नहीं, बल्कि सफलता का एक जीवंत उदाहरण बन चुकी है. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि यदि सही दिशा और मेहनत के साथ पशुपालन किया जाए, तो यह किसी भी कॉर्पोरेट नौकरी से बेहतर रिटर्न दे सकता है.
वैज्ञानिक प्रबंधन और संतुलित आहार है कामयाबी का राज
सुनील की सफलता के पीछे सबसे बड़ा हाथ उनका वैज्ञानिक दृष्टिकोण और उचित प्रबंधन है. उनके फार्म पर वर्तमान में कुल 22 मवेशी हैं. जिनमें से 9 गाय और 7भैंसें वर्तमान में दूध दे रही हैं. सुनील बताते हैं कि पशुओं के स्वास्थ्य और दूध की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए वे केवल सूखे भूसे या दाने पर निर्भर नहीं रहते. वे अपने मवेशियों को नियमित रूप से हरा चारा भी उपलब्ध कराते हैं. जिससे दूध का उत्पादन और पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है. खुद की कड़ी मेहनत और मात्र एक मजदूर के सहयोग से वे अपनी पूरी गौशाला का प्रबंधन इतनी कुशलता से करते हैं कि लागत कम और मुनाफा अधिक बना रहता है.
2 क्विंटल दूध की दैनिक बिक्री और शानदार टर्नओवर
आंकड़ों की बात करें तो सुनील का डेयरी फार्म किसी बड़े उद्योग से कम नहीं है. उनकी गौशाला से प्रतिदिन औसतन 2 क्विंटल (200 लीटर) दूध का उत्पादन होता है. जिसे वे स्थानीय बाजारों और डेयरी सेंटरों पर बेचते हैं. इस बेहतरीन उत्पादन की बदौलत उनका सालाना टर्नओवर 23 से 25 लाख रुपये तक पहुंच जाता है. सभी खर्चों, जैसे चारा, मजदूरी और रखरखाव को काटकर सुनील प्रतिवर्ष 9 से 10 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं. यह आय न केवल उनके परिवार के बेहतर भरण-पोषण में मदद कर रही है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर भी बना चुकी है.
क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बने सुनील कुमार
आजमगढ़ और आसपास के गांवों में सुनील कुमार की पहचान एक प्रगतिशील किसान के रूप में बन गई है. उनकी सफलता को देखकर क्षेत्र के अन्य बेरोजगार युवा भी अब पशुपालन को एक गंभीर करियर विकल्प के रूप में देखने लगे हैं. सुनील का मानना है कि डेयरी फार्मिंग में धैर्य और पशुओं के प्रति लगाव होना बेहद जरूरी है. यदि युवा आधुनिक तकनीकों का सहारा लें और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते हुए इस क्षेत्र में कदम रखें, तो उन्हें पलायन करने की आवश्यकता नहीं होगी. उनकी यह कहानी संदेश देती है कि अपनी जड़ों से जुड़कर भी विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है.
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