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Bihar Board Matric Exam Preparation: बिहार की बेटी ज्योति कुमारी ने सीमित संसाधनों के बीच अपनी मेहनत से राज्य का नाम रोशन किया है. एक छोटे होटल संचालक की बेटी ज्योति ने मैट्रिक परीक्षा में 97.4% अंक लाकर यह साबित कर दिया कि लक्ष्य स्पष्ट हो तो राहें आसान हो जाती हैं. उन्होंने आगामी परीक्षार्थियों को टाइम मैनेजमेंट और मॉडल पेपर हल करने पर जोर देने को कहा. ज्योति का कहना है कि पढ़ाई में निरंतरता और आत्मविश्वास ही एक औसत छात्र को टॉपर बना सकता है. उनका भविष्य में IAS ऑफिसर बनकर समाज सेवा करने का सपना है.
अमित कुमार: वर्ष 2027 में होने वाली बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की मैट्रिक परीक्षा में लाखों छात्र-छात्राएं शामिल होंगे. ऐसे में हर परीक्षार्थी के मन में एक ही सवाल रहता है कि आखिर तैयारी कैसे की जाए ताकि अच्छे अंक हासिल हो सके और बिहार टॉपर बनने का सपना पूरा हो. खासकर गणित जैसे विषय में शत-प्रतिशत अंक लाने को लेकर छात्रों में काफी उत्सुकता रहती है. इन्हीं सवालों का जवाब जानने के लिए लोकल 18 की टीम ने बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2026 में पूरे बिहार में चौथा स्थान प्राप्त करने वाली समस्तीपुर की छात्रा ज्योति से खास बातचीत की. उन्होंने मैट्रिक रिजल्ट में 487 अंक लाई थी.
बातचीत के दौरान ज्योति ने अपनी पढ़ाई का तरीका, समय प्रबंधन, रिवीजन पैटर्न और सफलता के पीछे की मेहनत को साझा किया. उन्होंने कहा कि बच्चे पढ़ाई तो करते हैं लेकिन पूरी लगन और मन से नहीं करते, इसी वजह से अंक कम आ जाते हैं. यदि छात्र पूरी ईमानदारी और नियमितता के साथ पढ़ाई करें तो सफलता जरूर मिलती है.
रिवीजन और नियमित अभ्यास से मिलती है बड़ी सफलता
ज्योति ने बताया कि उनकी सफलता का सबसे बड़ा कारण नियमित रिवीजन था. उन्होंने कहा कि केवल पढ़ लेना काफी नहीं होता, बल्कि उसे बार-बार दोहराना जरूरी होता है. अगर किसी विषय या प्रश्न को लेकर कन्फ्यूजन हो तो उसे एक अलग नोटबुक में लिख लेना चाहिए और बाद में शिक्षक या कोचिंग में जाकर उसका समाधान पूछना चाहिए. उन्होंने कहा कि गणित ऐसा विषय है जिसमें जितना ज्यादा अभ्यास करेंगे उतना बेहतर परिणाम मिलेगा. जो प्रश्न एक बार में हल नहीं हो, उसे दो या तीन नहीं बल्कि पांच बार तक अभ्यास करना चाहिए.
लगातार प्रैक्टिस से कठिन से कठिन सवाल भी आसान लगने लगता है. उन्होंने यह भी कहा कि जिस कोचिंग या स्कूल में पढ़ाई करते हैं वहां पढ़ाए गए प्रश्न और उनके उत्तर उसी समय अच्छी तरह याद कर लेने चाहिए. घर जाकर छोड़ देने की आदत नुकसान पहुंचाती है. ज्योति के अनुसार रोजाना कम से कम 6 से 8 घंटे की नियमित पढ़ाई और हर विषय को समय देना बेहद जरूरी है. खासकर साइंस और मैथ्स के साथ हिंदी, संस्कृत और सोशल साइंस जैसे विषयों की भी बराबर तैयारी करनी चाहिए.
मॉडल पेपर और टाइम मैनेजमेंट से बढ़ेगा आत्मविश्वास
ज्योति ने विद्यार्थियों को सलाह देते हुए कहा कि परीक्षा के अंतिम महीनों में मॉडल पेपर और पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र जरूर हल करना चाहिए. इससे प्रश्नों का पैटर्न समझ आता है और समय प्रबंधन बेहतर होता है. उन्होंने बताया कि पढ़ाई के दौरान छोटे-छोटे नोट्स तैयार करना काफी फायदेमंद होता है. क्योंकि परीक्षा से पहले इन्हीं नोट्स से जल्दी रिवीजन किया जा सकता है. मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर पढ़ाई पर फोकस करना भी जरूरी है.
इसके अलावा पर्याप्त नींद और मानसिक तनाव से दूर रहना भी अच्छे प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. ज्योति ने कहा कि अगर छात्र रोजाना लक्ष्य बनाकर पढ़ाई करें, कमजोर विषयों पर ज्यादा ध्यान दें और आत्मविश्वास बनाए रखें तो निश्चित रूप से मैट्रिक परीक्षा में शानदार अंक प्राप्त कर सकते हैं. वहीं उन्होंने कहा कि क्वेश्चन बैंक का भी सहारा ले सकते हैं जैसे की वर्ष 2010 से लेकर 2026 तक जितने भी क्वेश्चन पूछे गए हैं उसका रिवीजन कर ले दिखा देगा फायदा.
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