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Sugarcane Farming Tips: गन्ने की खेती किसानों के लिए जितनी मुनाफे वाली है, उतनी ही जोखिम भरी भी होती है. साल भर की मेहनत और भारी निवेश के बाद अगर अंकुर बेधक और टॉप बोरर जैसे घातक कीट फसल पर हमला कर दें, तो पूरी कमाई मिट्टी में मिल सकती है. शाहजहांपुर के कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को आगाह किया है कि कीटों का यह हमला न केवल फसल की मिठास कम करता है, बल्कि चीनी मिलों से मिलने वाले दाम पर भी सीधा असर डालता है. अगर आप भी अपनी फसल को सुरक्षित रखकर साल भर की आर्थिक सुरक्षा पक्की करना चाहते हैं, तो इन एक्सपर्ट टिप्स और सही कीटनाशकों का चुनाव आपके लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है.
शाहजहांपुर: गन्ने की खेती किसानों के लिए ‘नकदी फसल’ होने के साथ-साथ एक बड़ी चुनौती भी है. साल भर की कड़ी मेहनत और भारी लागत के बाद किसानों को एक बार आमदनी मिलती है. ऐसे में कीटों का हमला पूरी मेहनत पर पानी फेर सकता है. विशेष रूप से गन्ने की पेड़ी और नई फसल में ‘अंकुर बेधक’ और ‘टॉप बोरर’ जैसे कीट उत्पादन को भारी नुकसान पहुंचाते हैं. इन कीटों से फसल को बचाना न केवल पैदावार बढ़ाता है बल्कि किसान की साल भर की आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है. सही समय पर सही कीटनाशक का चुनाव और बचाव के तरीके ही किसानों को इस जोखिम से राहत दिला सकते हैं.
कृषि एक्सपर्ट डॉ. एन.पी. गुप्ता ने बताया कि गन्ने की फसल को अंकुर बेधक (Shoot Borer) और टॉप बोरर (Top Borer) से बचाना जरूरी है. अंकुर बेधक कीट मिट्टी के पास वाले तने में छेद कर अंदर घुस जाता है. जिससे पौधा सूखने लगता है. वहीं टॉप बोरर ऊपर की पत्तियों को छलनी कर देता है. इसके बचाव के लिए बुवाई के समय ही कारटॉप हाइड्रोक्लोराइड’ (Cartap Hydrochloride) का प्रयोग करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं. अगर कीट का प्रकोप बाद में दिखे. तो ‘कोराजेन’ का ड्रेचिंग विधि से उपयोग करें. ड्रेचिंग हमेशा शाम के समय करनी चाहिए और अगले 24 घंटों के भीतर हल्की सिंचाई देना जरूरी है. इससे फसल कीटमुक्त और स्वस्थ रहती है.
लागत और आमदनी का चक्र
गन्ने की खेती अन्य फसलों की तुलना में लंबी अवधि की होती है. इसमें बुवाई से लेकर कटाई तक लगभग एक वर्ष का समय लगता है. किसान बीज, खाद, सिंचाई और जुताई में भारी लागत लगाते हैं. यह फसल साल में केवल एक बार आमदनी देती है. इसलिए इसलिए देखरेख में जरा भी लापरवाही न करें. एक बार कीट लगने पर न केवल फसल की गुणवत्ता घटती है. बल्कि रिकवरी दर कम होने से किसानों को चीनी मिलों से भी कम दाम मिलता है. इसलिए शुरुआती सुरक्षा ही मुनाफे की कुंजी है.
गन्ने में रसायनों का सही प्रयोग
कीटों के नियंत्रण के लिए डॉ. गुप्ता कोराजेन (Chlorantraniliprole) का छिड़काव करें. 150 मिलीलीटर कोराजेन को 200 से 400 लीटर पानी में मिलाकर पौधों की जड़ों के पास ड्रेचिंग करनी चाहिए. ध्यान रहे कि छिड़काव की जगह ड्रेचिंग करना अधिक प्रभावी होता है. दवा खरीदते समय हमेशा पक्का बिल लें और विश्वसनीय संस्थानों से ही कीटनाशक खरीदें. रसायनों की मात्रा और पानी का अनुपात सही रखना कीटों के प्रभावी खात्मे के लिए बेहद जरूरी है.
गन्ने में सिंचाई और समय का महत्व
किसी भी कीटनाशक के प्रयोग करने के साथ सिंचाई करना भी बेहद खास माना जाता है. कोराजेन की ड्रेचिंग के 24 घंटे के भीतर खेत में हल्की सिंचाई करना जरूरी है. ताकि दवा जड़ों तक गहराई से पहुंच सके. इसके अलावा, रसायनों का छिड़काव या ड्रेचिंग हमेशा शाम के समय ही करना चाहिए. क्योंकि इस समय तापमान कम होता है और कीटों की सक्रियता के अनुसार दवा का असर बेहतर होता है. समय पर किए गए ये उपाय फसल को सुरक्षित और हरा-भरा रखते हैं.
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सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें


