Thalapathy Vijay Goverment Now More Strong: तमिलनाडु की सियासत में पिछले कुछ हफ्तों से जो हाई-वोल्टेज ड्रामा चल रहा था. क्लाइमेक्स यानी कि फ्लोर टेस्ट भी जबरदस्त रहा. जो विजय 118 विधायकों के लिए तरस रहे थे, उन्होंने सदन में 144 विधायकों का पावर दिखा कर सबको हैरान कर दिया. उन्होंने राजनीतिक महारथियों को दिखा दिया कि भले ही राजनीति में उनकी डेब्यू हो रही है मगर वह सच में ‘मास्टर’ हैं. विजय ने साबित कर दिखाया कि राजनीति के भी असली सिकंदर हैं. उनकी सदन बल से तमिल द्रविड़ राजनीति के दो सबसे बड़ी पार्टियों DMK और AIADMK की नींद उड़ गई हैं क्योंकि लगभग 6 दशक के बाद उनके हाथों से सत्ता गई है. अगर, अब चाह लें तो भी उनकी सरकार नहीं बन सकती है. हालांकि, चुनावी नतीजों के दौरान ऐसा नहीं था. उस दौरान दोनों पार्टियां अगर एक साथ आ जातीं तो सरकार बना सकती थीं.
कहानी शुरू होती है उन नतीजों से, जहां विजय की पार्टी टीवीके (TVK) सबसे बड़े दल के रूप में तो उभरी, लेकिन 118 के जादुई आंकड़े से थोड़ी दूर रह गई. राज्यपाल ने संवैधानिक बारीकियों का हवाला देते हुए विजय को एक नहीं, दो नहीं, बल्कि तीन बार राजभवन से खाली हाथ वापस भेज दिया. विरोधियों ने चुटकी लेना शुरू कर दिया था कि सिनेमा और राजनीति में काफी फर्क होता है. लेकिन, विजय के दिमाग में कुछ और ही पक रहा था.
तमिलनाडु विधानसभा में शपथ समारोह के दौरान सीएम विजय. (पीटीआई)
फ्लोर टेस्ट में भी ‘विजय’
बुधवार को जब विधानसभा में फ्लोर टेस्ट हुआ, तो नजारा देखने लायक था. विजय ने सिर्फ 118 ही नहीं, बल्कि 144 विधायकों का भारी-भरकम समर्थन पेश कर सबको चुप कर दिया. इस करिश्मे के पीछे थी विजय की बारीक रणनीति. चुनाव के बाद सबसे पहले कांग्रेस, फिर दोनों लेफ्ट और बाद में सीवीके पार्टी का समर्थन मिला. जिससे विजय बहुमत के आंकड़े को पार कर 120 पर पहुंच गए. फिर, फ्लोर टेस्ट से पहले एआईएडीएमके में बगावत हो गई. इस पार्टी के 24 बागी विधायकों ने अचानक पाला बदलकर विजय को समर्थन दे दिया. इस मास्टरस्ट्रोक ने न सिर्फ विजय की सरकार बचाई, बल्कि विपक्ष की कमर ही तोड़ दी.
गणित ने बिगाड़ा खेल
अब अगर तमिलनाडु विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों पर गौर करें, तो स्थिति विजय के लिए पूरी तरह सुरक्षित और विरोधियों के लिए शर्मनाक नजर आती है:
- डीएमके : 59 विधायक
- एआईएडीएमके : 47 – 24 (बागी) = 23 विधायक
- विपक्ष (डीएमके और एआईएडीएमके) के विधायकों की कुल संख्या : 59 + 23 = 82 विधायक
यानी अगर धुर विरोधी मानी जाने वाली डीएमके और एआईएडीएमके एक साथ मिल भी जाएं, तब भी उनके पास कुल 82 विधायक ही होते हैं. सरकार गिराने या बनाने के लिए 118 का आंकड़ा चाहिए, जिससे विपक्ष अब कोसों दूर है. विजय ने एक ही चाल में दोनों पार्टियों को अप्रासंगिक (irrelevant) बना दिया है.
नई राजनीति का उदय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय ने यह साबित कर दिया है कि वे गठबंधन और रणनीति बनाने में माहिर हैं. राज्यपाल के इनकार को उन्होंने ढाल बनाया और पर्दे के पीछे एआईएडीएमके के असंतुष्ट खेमे में सेंध लगा दी. अब टीवीके के पास 144 विधायकों की मजबूत ढाल है, जो अगले पांच सालों तक ‘थलपति’ की सत्ता को अभेद्य किला बनाती है. तमिलनाडु ने अब वास्तव में एक ‘तीसरे मोर्चे’ को सत्ता के शीर्ष पर बैठते देख लिया है, जिसने पुरानी द्रविड़ राजनीति के समीकरणों को ध्वस्त कर दिया है.
थलपति विजय को फ्लोर टेस्ट में कितने विधायकों का समर्थन प्राप्त हुआ?
थलपति विजय ने फ्लोर टेस्ट में अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए कुल 144 विधायकों का समर्थन हासिल किया, जो बहुमत के आंकड़े 118 से काफी ज्यादा है.
विजय की सरकार को बहुमत दिलाने में किस पार्टी के बागियों ने अहम भूमिका निभाई?
एआईएडीएमके (AIADMK) के 24 बागी विधायकों ने विजय की पार्टी टीवीके (TVK) को समर्थन दिया, जिससे उनकी संख्या बल में जबरदस्त इजाफा हुआ.
क्या डीएमके और एआईएडीएमके मिलकर विजय की सरकार को गिरा सकते हैं?
नहीं, वर्तमान आंकड़ों के अनुसार डीएमके (59) और एआईएडीएमके (23) को मिलाकर कुल 82 विधायक ही होते हैं. बहुमत के लिए 118 चाहिए, इसलिए वे साथ आकर भी सरकार नहीं गिरा सकते.


