चंदौली. जिले के मुगलसराय के काशीराम आवास की तस्वीरें विकास और सरकारी दावों की पोल खोलती नजर आती हैं. गर्मी के इस भीषण मौसम में जहां हर व्यक्ति को सबसे ज्यादा जरूरत साफ पानी और स्वच्छ वातावरण की होती है. वहीं, काशीराम आवास के लोग बदहाल जिंदगी जीने को मजबूर हैं. यहां चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है. नालियां चोक पड़ी हैं, जगह-जगह कूड़े का ढेर जमा है और सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त दिखाई देती है. हालात ऐसे हैं कि लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया है. लोकल 18 के संवाददाता ने ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान इलाके में लगे कई हैंडपंपों की जांच की. करीब 20 चापाकलों को चलाकर देखा, लेकिन अधिकांश में पानी नहीं निकला. वहीं, स्थानीय लोगों ने कहा कि वर्षों से ये चापाकल खराब पड़े हैं, लेकिन इन्हें ठीक कराने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया. भीषण गर्मी में पानी की ऐसी समस्या ने लोगों का जीवन संकट में डाल दिया है.
पानी के लिए भटकते है लोग
स्थानीय निवासी रमेश गुप्ता ने लोकल 18 से बताया कि उन्हें यहां रहते हुए करीब 16 साल हो चुके हैं, लेकिन समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं. उन्होंने कहा कि पूरे आवास में लगभग 17 हैंडपंप लगे हैं, लेकिन एक भी सही तरीके से काम नहीं करता. लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ता है, उन्होंने गंदगी की ओर इशारा करते हुए कहा कि हर तरफ गंदगी फैली हुई है, नालियां बजबजा रही हैं और कोई सुनने वाला नहीं है. आगे उन्होंने कहा कि कई बार प्रशासन और नगर पालिका से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने कहा कि हम लोग थक चुके हैं शिकायत करते-करते, लेकिन प्रशासन के कानों तक हमारी आवाज पहुंचती ही नहीं.
नाली का पानी पीने को मजबूरी
वहीं, स्थानीय निवासी गणेश कुमार ने और भी गंभीर आरोप लगाए, उन्होंने लोकल 18 से बताया कि यहां पानी सप्लाई की पाइपलाइन जगह-जगह से फटी हुई है और नालियों का गंदा पानी उसी पाइप के जरिए घरों तक पहुंच रहा है. उन्होंने कहा कि हम लोग मजबूरी में नाली का पानी पी रहे हैं. पूरा सिस्टम खराब हो चुका है. आगे उन्होंने कहा कि यह स्थिति किसी बड़े स्वास्थ्य संकट को जन्म दे सकती है. गंदे पानी की वजह से लोगों में बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है. बच्चों और बुजुर्गों की हालत सबसे ज्यादा खराब है. बावजूद इसके जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई गंभीर पहल नहीं दिखाई दे रही.
दूर-दूर से लाना पड़ता है पानी
इलाके के एक अन्य निवासी अमित वर्मा ने लोकल 18 से बताया कि कॉलोनी में साफ-सफाई नाम की कोई व्यवस्था नहीं है. नालियों का पानी सड़क पर बहता रहता है, जिससे लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता है. उन्होंने कहा कि बरसात के दिनों में हालात और भी भयावह हो जाते हैं. जगह-जगह जलभराव हो जाता है और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. आगे उन्होंने बताया कि अगर पानी की सप्लाई लाइन कट जाए, तो लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है. कई परिवार सड़क किनारे लगे दूसरे मोहल्लों के हैंडपंपों से पानी भरकर लाते हैं. उन्होंने कहा कि इस कॉलोनी में हजारों लोग रहते हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है.
नारकीय जीवन जीने को मजबूर
वहीं, काशीराम आवास में रहने वाले कुछ लोगों ने कहा कि जनप्रतिनिधि और अधिकारी आसपास के इलाकों में तो दिखाई देते हैं, लेकिन इस कॉलोनी की ओर कभी ध्यान नहीं देते. लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में कोई सुध लेने नहीं आता. बता दें कि ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान यह साफ नजर आया कि काशीराम आवास में रहने वाले लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं. सरकार द्वारा गरीबों के लिए बनाई गई इस आवास योजना की हालत बदतर हो चुकी है. पानी, सफाई और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में यहां रहने वाले लोग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं.
आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार विभाग
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जिम्मेदार विभाग कब जागेंगे. क्या हजारों लोगों की जिंदगी यूं ही गंदगी और बीमारी के बीच गुजरती रहेगी या फिर प्रशासन इन समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा. फिलहाल काशीराम आवास के लोगों को सिर्फ इंतजार है, एक ऐसी व्यवस्था का, जहां उन्हें कम से कम साफ पानी और स्वच्छ वातावरण तो मिल सके.


