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दुनिया में बढ़ रहा संकट लेकिन भारत की जीडीपी में जुड़ेंगे 48 लाख करोड़, 4 साल में सिर्फ एक सेक्‍टर से होगी इतनी कमाई

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AI in GDP : भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का योगदान अगले 4 साल में करीब 48 लाख करोड़ रुपये का पहुंच जाएगा. एक हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि साल 2030 तक करीब 35 करोड़ एआई प्रोफेशनल्‍स की जरूरत होगी.

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भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में एआई का योगदान बढ़ता जा रहा है.

नई दिल्ली. आईबीएम और इंडिया एआई (MeitY की एक पहल) की एक संयुक्त रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से साल 2030 तक भारत की अर्थव्यवस्था में 500 अरब डॉलर (करीब 47.81 लाख करोड़ रुपये) से अधिक का योगदान कर सकता है. इस रिपोर्ट में विभिन्न उद्योगों और संगठनों के 1,500 भारतीय अधिकारियों का सर्वे किया गया, जिसमें सीएक्सओ सहित हाई लेवल के तमाम अधिकारी शामिल थे. इस अध्ययन में 405 भारतीय अधिकारियों का एक पल्स सर्वे भी शामिल किया गया.

रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सर्वे में शामिल 80 फीसदी भारतीय बिजनेस लीडर्स का मानना है कि एआई में निवेश देश की जीडीपी वृद्धि को सीधे प्रभावित करेगा. माना जा रहा है कि एआई साल 2030 तक भारत की अर्थव्यवस्था में 500 अरब डॉलर से अधिक का योगदान कर सकता है, जिससे यह दुनिया की सबसे गतिशील एआई-चालित अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो जाएगा. कुछ ही देश भारत जैसी स्केल, डिजिटल ताकत और महत्वाकांक्षा के साथ एआई युग में कदम रख रहे हैं.

73 फीसदी ने जताया भरोसा
रिपोर्ट के अनुसार, करीब 73 फीसदी भारतीय अधिकारियों का मानना है कि साल 2030 तक एआई में अग्रणी देश बन जाएगा. यह विश्वास विशाल बाजार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और दुनिया की सबसे बड़ी आईटी सर्विसेज वर्कफोर्स पर आधारित है. शोध में एक महत्वपूर्ण इन्फ्लेक्शन गैप भी सामने आया, जिसमें 72 फीसदी संगठनों ने माना कि वे फिलहाल एआई अपनाने में अपने वैश्विक समकक्षों से पीछे हैं. केवल 15 फीसदी संगठन ही एआई को क्रॉस-फंक्शनल निवेश के जरिये स्केल कर रहे हैं, जबकि बाकी 85 फीसदी अभी पायलट स्टेज में ही अटके हुए हैं.

भारत अब दे रहा एआई को आकार
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस कृष्णन ने कहा है कि भारत अब सिर्फ वैश्विक एआई चर्चा में भाग नहीं ले रहा, बल्कि उसे आकार भी दे रहा है. उन्होंने कहा कि हमारा विजन स्पष्ट है. एआई को हमारे लोगों की आकांक्षाओं का विस्तार बनना चाहिए, जो समावेशी विकास और राष्ट्रीय प्रगति को आगे बढ़ाए. विकसित भारत के हमारे विजन के तहत हम विश्वास, नैतिकता और राष्ट्रीय संप्रभुता पर आधारित मानव-केंद्रित एआई दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रहे हैं.

डाटा आज भी बड़ी समस्‍या
रिपोर्ट में एआई के रास्‍ते की बाधाओं की भी पहचान की गई है. सर्वे में शामिल करीब 77 फीसदी प्रतिभागियों ने सुलभ, किफायती और सुरक्षित क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को बड़ी चुनौती बताया है, जबकि 57 फीसदी ने असमान डेटा गुणवत्ता को बड़ी समस्या बताया. फिलहाल करीब 30 फीसदी कर्मचारियों के पास वह एआई साक्षरता है, जिसकी कंपनियों को जरूरत है. भविष्य की मांगों को पूरा करने के लिए साल 2030 तक यह आंकड़ा 57 फीसदी तक पहुंचना चाहिए. इसका मतलब है कि देश में 35 करोड़ से अधिक एआई साक्षर पेशेवरों की जरूरत होगी.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें



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