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अमेरिकी पूर्व डिप्लोमेट एलिजाबेथ थ्रेलकेल्ड ने चेताया, अगला भारत पाकिस्तान युद्ध ड्रोन, मिसाइल, साइबर हमलों के कारण ज्यादा खतरनाक होगा, अमेरिका भी रोक नहीं पाएगा.
सात मई को ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ है.
ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ से पहले अमेरिका से एक खतरनाक भविष्यवाणी आई है. यह एक ऐसी भविष्यवाणी है जो बीते साल पाकिस्तानी हुक्मरानों के चेहरे पर दिखे खौफ की याद ताजा कर रही है. बीते साल ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और उनके फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने खुले तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने अपनी खौफ जताई थी. इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति बार-बार कह रहे थे कि उन्होंने अगर वह जंग नहीं रुकवाई होती तो करोड़ों लोगों की जिंदगी दांव पर लग जाती. अब उसी अमेरिकी सरकार की एक पूर्व डिप्लोमेट एलिजाबेथ थ्रेलकेल्ड (Elizabeth Threlkeld) ने कहा है कि अगर फिर से भारत और पाकिस्तान के बीच जंग भड़कती है तो यह पहले की तुलना में काफी भयानक होगी और इसे अमेरिका भी नहीं रुकवा पाएगा.
एक्स पर शेयर किए गए अपने लेख में थ्रेलकेल्ड लिखती हैं कि पिछले कई सालों से विशेषज्ञ डरते थे कि भारत-पाकिस्तान के बीच अगर जमीनी लड़ाई शुरू हुई तो पाकिस्तान परमाणु हथियार इस्तेमाल कर सकता है. लेकिन अब स्थिति बदल रही है. आने वाला संकट जानबूझकर शुरू होने वाली लड़ाई से नहीं, बल्कि गलती से भड़कने वाली आग से ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है.
पाकिस्तान के छोटे परमाणु हथियार की आशंका
पहले की चिंता कोल्ड स्टार्ट जैसे भारतीय हमले और उसके जवाब में पाकिस्तान के छोटे परमाणु हथियार की थी. अब दोनों देशों ने ड्रोन, लंबी दूरी की मिसाइलें, एयर डिफेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और सटीक हमले वाले हथियारों पर भारी निवेश किया है. इनकी वजह से दोनों देशों को लगता है कि परमाणु हथियार इस्तेमाल किए बिना भी वे लड़ सकते हैं. यह आत्मविश्वास अच्छा लगता है, लेकिन नया खतरा पैदा कर रहा है. अब लड़ाई तेज, गहरी और कई मोर्चों पर हो सकती है. साइबर हमले, स्पेस और पारंपरिक हथियारों का मिश्रण होगा.
दोनों तरफ ऐसे सिस्टम हैं जिनका इस्तेमाल सिविल और मिलिट्री दोनों कामों के लिए होता है. ऐसे में एक छोटी गलती को दूसरा देश बड़ा हमला समझ सकता है. फैसले लेने का समय भी बहुत कम रह जाएगा. पिछले संकटों में दोनों देश थोड़ा-थोड़ा हमला करके अपना संदेश देते थे और बढ़ती आग को कंट्रोल में रखते थे. ताकि अमेरिका या दूसरे देश बीच में आकर बातचीत करा सकें. लेकिन अगली बार दोनों देश युद्ध के मैदान में अपना लक्ष्य हासिल करने की कोशिश करेंगे, उससे पहले कोई बीच-बचाव कर पाए. इससे स्थिति तेजी से बेकाबू हो सकती है.
वाशिंगटन के लिए मुश्किल क्यों?
अमेरिका हमेशा से भारत-पाकिस्तान संकट में अहम भूमिका निभाता रहा है. लेकिन अब उसके लिए यह काम और मुश्किल हो गया है. मई 2025 के संकट में ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उन्होंने सीजफायर करवा दिया, जिसको भारत बार-बार खारिज करता रहा. अब अगर नया संकट आया तो अमेरिका को सही समय पर सही लोगों से बात करने, सही मैसेज देने और दोनों को रोकने में दिक्कत हो सकती है.
विशेषज्ञ कह रहे हैं कि मई 2025 का संकट भविष्य के लिए कोई टेम्प्लेट नहीं है. अगला संकट और तेज और जटिल और कई क्षेत्रों में फैला हो सकता है. वह लिखती है कि अंत में लक्ष्य यही है कि अगला संकट आए ही नहीं. लेकिन अगर आया तो उसे काबू में रखने के लिए तैयारी अभी से कर लेनी चाहिए. दोनों देशों के पास अब पहले से ज्यादा ताकतवर हथियार हैं, लेकिन संकट को रोकने का समय पहले से कम हो गया है. यही जह है कि आने वाला संकट पिछले सभी संकटों से ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है.
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें


