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Lakhimpur Kheri: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में कई धार्मिक व पौराणिक मंदिर हैं, जिन्हें देख लोग हैरत में पड़ जाते हैं. आज हम एक ऐसे सिद्ध बाबा के स्थान के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां दूर-दूर से लोग अपनी अरदास लेकर सिद्ध बाबा के स्थान पर आते हैं और मनोकामना मांगते हैं.
लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में कई धार्मिक व पौराणिक मंदिर में हर एक मंदिर का अलग ही इतिहास है. वहीं आज हम एक ऐसे सिद्ध बाबा के स्थान के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां दूर-दूर से लोग अपनी अरदास लेकर सिद्ध बाबा के स्थान पर आते हैं और मनोकामना मांगते हैं. मनोकामना पूर्ण होने के बाद यहां लोग भंडारा, मुंडन संस्कार और अन्य कार्यक्रम भी करते हैं.
ऐसे फैलता गया पेड़
खीरी जिले के बिजुआ ब्लॉक क्षेत्र के रसूलपनाह में सिद्ध बाबा स्थान करीब 100 वर्षों से अधिक पुराना है. काफी दूर-दूर से लोग सिद्ध बाबा के स्थान पर आते हैं. सिद्ध बाबा के स्थान के पास करीब 100 साल से अधिक पुराना बरगद का पेड़ है. खास बात यह कि यहां मौजूद एक बरगद के पेड़ से करीब 90 बरगद के पेड़ तैयार हुए हैं. करीब 2 बीघा में बरगद के पेड़ फैल चुके हैं, जो आकर्षण का केंद्र भी बने हुए हैं. स्थानीय लोग बताते हैं कि पेड़ से निकलने वाली जड़ें तने का रूप लेती गईं और यह वृक्ष फैलता चला गया.
करीब 100 साल पहले 1 बरगद के पौधे ने जन्म लिया, पौधे ने पेड़ का रूप लिया और पेड़ से निकलने वाली जड़े जमीन में जाकर तने का रूप लेने लगीं. यही वजह है कि यह बरगद का पेड़ फैलता चला गया और धीरे-धीरे करीब 2 बीघा तक के दायरे में फैल गया. पेड़ पर मोर के अलावा उल्लू समेत तमाम पक्षियों और वन्य-जीवों का बसेरा है.
क्या कहते हैं स्थानीय लोग
लोकल 18 से बातचीत करते हुए श्रीचंद वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि सिद्ध बाबा का स्थान हमारे क्षेत्र की एक धरोहर है. इस स्थान पर मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है, जिस कारण काफी दूर-दूर से लोग सिद्ध बाबा के स्थान पर आते हैं और पूजा अर्चना करते हैं. यहां हर साल यज्ञ होता है. जिन लोगों की नौकरी नहीं लगती है और जिन लोगों की शादी नहीं होती, जो लोग इस स्थान पर आते हैं और सिद्ध बाबा के स्थान पर आने के बाद सच्चे मन से मनोकामना मांगते हैं, उन लोगों की मनोकामना पूर्ण हो जाती है. श्री चन्द्र बताते हैं कि बरगद के पेड़ में भगवान गणेश की प्रतिमा भी प्रतीत होती है.
जितेंद्र कुमार ने बातचीत करते हुए बताया कि सिद्ध बाबा का स्थान बहुत पौराणिक है. काफी दूर-दूर से लोग यहां आते हैं और अपनी मनोकामना मांगते हैं. जितेंद्र बताते हैं कि पेड़ के नीचे नाग देवता का आगमन हुआ था. करीब 15 से 20 दिनों तक नाग देवता बरगद के पेड़ के नीचे रहे थे. उसके बाद उसी स्थान पर शिव मंदिर भी बनाया गया था.
पेड़ की आकृति को देखकर हो जाएंगे हैरान
पेड़ की आकृति कुछ ऐसी है कि यहां पर यदि आप रात में चले जाएं, तो आपको डर लग सकता है, क्योंकि बड़ी-बड़ी टहनियां, पेड़ की कई शाखाएं और पेड़ से निकलते लटकन, ऐसा लगता है जैसे सांप यहां पर लोट रहे हैं. अगर आप भी रसूलपनाह पहुंचकर इस भव्य पेड़ के आकार को देखना चाहते हैं, तो आपको गोला से करीब 17 किलोमीटर मालपुर की तरफ आना होगा. यहीं पर यह पेड़ आपको देखने को मिल जाएगा. बरगद के इस पेड़ को देखकर लोग हैरान होते हैं.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.


