चंदौली: जिले के मुगलसराय के चंधासी में पड़ रही भीषण गर्मी का सीधा असर अब बिजली व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है. इन दिनों तापमान 43 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जिसके कारण पावर ट्रांसफॉर्मर का तापमान भी काफी बढ़ गया है. अत्यधिक गर्मी और ओवरलोडिंग के कारण ट्रांसफॉर्मरों के फुकने का खतरा पैदा हो गया था, जिससे निपटने के लिए बिजली विभाग ने एक अनोखा और कारगर उपाय निकाला है.
ओवरहीटिंग का हो रहे थे शिकार
चंधासी उपकेंद्र में 10 एमवीए क्षमता के 4 पावर ट्रांसफॉर्मर लगे हुए हैं. भीषण गर्मी के कारण ये ट्रांसफॉर्मर ओवरहीटिंग का शिकार हो रहे थे, जिससे बार-बार ट्रिपिंग की समस्या उत्पन्न हो रही थी. इस समस्या से निजात पाने के लिए विभाग ने ट्रांसफॉर्मरों के चारों ओर कुल 8 कूलर लगवा दिए हैं. ये कूलर लगातार चल रहे हैं, जिससे ट्रांसफॉर्मरों का तापमान नियंत्रित रखने में मदद मिल रही है. इसके साथ ही, अर्थिंग सिस्टम में पानी डालकर उसे भी ठंडा रखने की व्यवस्था की गई है.
30,000 उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत
गर्मी के सीजन में बिजली की खपत अत्यधिक बढ़ गई है, क्योंकि घरों में पंखे, कूलर और एसी का इस्तेमाल लगातार हो रहा है. अत्यधिक लोड के कारण ट्रांसफॉर्मर क्षमता से अधिक भार सहने को मजबूर हैं. चंदासी उपकेंद्र में की गई इस पहल से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के करीब 30 हजार बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है. बार-बार होने वाली ट्रिपिंग से लोग काफी परेशान थे, लेकिन अब स्थिति में सुधार के आसार हैं.
ट्रांसफॉर्मरों पर बढ़ जाता है लोड
इस मामले पर मुगलसराय के चंधासी उपकेंद्र के एसडीओ मनोज कश्यप ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि इस समय क्षेत्र में भीषण गर्मी पड़ रही है, जिससे बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बन गया है. उन्होंने कहा कि तापमान में लगातार वृद्धि के कारण पावर ट्रांसफॉर्मरों पर दोहरी मार पड़ती है. एक ओर बाहरी वातावरण का तापमान बहुत अधिक रहता है. वहीं, दूसरी ओर बढ़ती गर्मी के कारण लोग एसी, कूलर, पंखे और अन्य विद्युत उपकरणों का अधिक उपयोग करते हैं, जिससे ट्रांसफॉर्मरों पर लोड काफी बढ़ जाता है.
उपकेंद्र पर किए गए विशेष इंतजाम
इस अधिक लोड और गर्मी के कारण ट्रांसफॉर्मर के अंदर का तापमान भी तेजी से बढ़ता है. ट्रांसफॉर्मर में ऑयल का तापमान और वाइंडिंग का तापमान, दोनों ही महत्वपूर्ण होते हैं. इनका एक निश्चित सुरक्षित स्तर (क्रिटिकल लिमिट) होता है. यदि यह तापमान उस सीमा से अधिक हो जाए, तो ट्रांसफॉर्मर के खराब होने या जलने का खतरा बढ़ जाता है. इसी स्थिति से निपटने के लिए उपकेंद्र पर विशेष इंतजाम किए गए हैं.
बिना रुकावट के मिलती रहे बिजली
यहां मौजूद चारों ट्रांसफॉर्मरों पर दो-दो कूलर लगाए गए हैं, ताकि हवा का सही संचार बना रहे और तापमान नियंत्रित रखा जा सके. इसके अलावा, ट्रांसफॉर्मरों में ओटीआई (ऑयल टेंपरेचर इंडिकेटर) और डब्ल्यूटीआई (वाइंडिंग टेंपरेचर इंडिकेटर) जैसे उपकरण लगाए गए हैं, जिनसे लगातार तापमान की निगरानी की जाती है. जब भी तापमान बढ़ने के संकेत मिलते हैं, तुरंत आवश्यक कदम उठाए जाते हैं, ताकि किसी प्रकार की खराबी न आए और उपभोक्ताओं को बिना रुकावट के बिजली आपूर्ति मिलती रहे.


