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Shiva temple Agra : आगरा को शिव नगरी भी कहा जाता है. कहते हैं कि चारों कोनों में शिवलिंग स्थापित होने के कारण आगरा में कभी कोई आपदा नहीं आ सकती है. खुद भगवान शिव आगरा की रक्षा करते हैं. इन्ही चारों में एक कैलाश महादेव मंदिर है, जहां शिवलिंग की स्थापना भगवान परशुराम और उनके पिता ने की थी. लोकल 18 से मंदिर के महंत संतोष गिरी बताते हैं कि यह एकमात्र मंदिर है, जहां एक साथ दो शिवलिंग एक ही जलहरी में विराजमान हैं.
आगरा. ताजनगरी आगरा को शिव नगरी भी कहा जाता है. आगरा के चारों कोनों में प्राचीन शिव मंदिर हैं. कहा जाता है कि चारों कोनों में शिवलिंग स्थापित होने के कारण आगरा में कभी कोई आपदा नहीं आ सकती है. स्वयं भगवान शिव आगरा की रक्षा करते हैं. इन्ही चारों में एक कैलाश महादेव मंदिर है. यह मंदिर यमुना किनारे बना हुआ है. बताया जाता है कि यहां शिवलिंग की स्थापना भगवान परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि ने की थी. लोकल 18 से मंदिर के महंत संतोष गिरी बताते हैं कि भगवान परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि कैलाश पर्वत से दो शिवलिंग लाये थे, जो यहां स्थापित हैं. यह एकमात्र मंदिर है, जहां एक साथ दो शिवलिंग एक ही जलहरी में विराजमान हैं. इस मंदिर का इतिहास त्रेता युग के समय का बताया जाता है. माना जाता है कि सच्चे मन से मांगी कई हर एक मुराद बाबा भोलेनाथ यहां जरूर पूरी करते हैं.
शिव से कहा था साथ चलो
महंत संतोष गिरी बताते है कि भगवान परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि को कैलाश पर्वत पर भगवान शिव ने दर्शन दिए. जब उनकी मनोकामना पूछी तो परशुराम ने भगवान शिव से कैलाश से अपने साथ चलने का आग्रह किया. इस पर भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया कि आप यहां के दो पत्थर अपने यहां स्थापित कर लें. में आपको उन्हीं में अपने दर्शन दूंगा. भगवान परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि एक-एक पत्थर लेकर वहां से चल पड़े.
टस से मस नहीं हुए पत्थर
महंत संतोष गिरी बताते हैं कि दोनों चले जा रहे थे, तभी शाम को भजन संध्या का समय हो गया. इसके लिए पिता-पुत्र यमुना किनारे इसी स्थान पर रुक गए और अपनी पूजा में लग गए. पूजा खत्म होने के बाद जब वे चलने लगे तो शिवलिंग वहां से उठा ही नहीं. तभी आकाशवाणी हुई कि मैं अब यही स्थापित रहूंगा. इसे सुनकर भगवान परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि ने शिवलिंग को वहीं छोड़ दिया, लेकिन दोनों पूजा अर्चना के लिए आते रहे. वर्तमान में अब यह स्थान कैलाश महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें


