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सहारनपुर के आम बागों में फलों का आकार बिगड़ने की समस्या अक्सर माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी, खासकर बोरान और जिंक की कमी के कारण होती है. इससे आम नुकीले हो जाते हैं और किसानों को बाजार में अच्छे दाम नहीं मिलते. विशेषज्ञों के अनुसार समय पर माइक्रोन्यूट्रिएंट का छिड़काव और कैल्शियम-बोरान का स्प्रे करने से फलों का आकार सुधारा जा सकता है और उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सकती है.
सहारनपुर. जनपद जिसको मैंगो बेल्ट के नाम से जाना जाता है, यहां का आम भारत देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक मीठास छोड़ता है. यहां पर किसान आम की सैकड़ो प्रकार की वैरायटी लगाते हैं, सहारनपुर में आम के पेड़ों पर बोर आ रहे है और बोर से जल्दी फल बनने भी शुरू हो जाएंगे. लेकिन कई बार कई पेड़ों पर देखा जाता है कि आम का आकार खराब होने के कारण आम के दाम अच्छे नहीं मिलते हैं. आम का आकार खराब कैसे होता है इसके भी कई कारण होते हैं. अगर आपके भी पेड़ पर आने वाले आम का आकार खराब हो जाता है या नुकीला हो जाता है तो उसको सही आकार देने के लिए किसानों को समय रहते क्या कुछ करना होगा.
सबसे पहले बात आती है आम के पेड़ों में माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी, जो की इस समस्या को तेजी से बढ़ाती है. अगर पिछले वर्ष आम के पेड़ पर कुछ फलों में आम का आकार नुकीला नजर आया है तो इस बार उस पेड़ के आम और तेजी से नुकीले हो जाएंगे और यह समस्या प्रत्येक वर्ष बढ़ती चली जाएगी. इन आम का प्रयोग बागवान मंडी में बेचने के लिए नहीं करते जो कि उनके उत्पादन को भी बेहद प्रभावित करती है. माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी आम के छिलके को कहीं से टाइट तो कहीं से लचीला बना देती है, इस कारण से वह नुकीला हो जाता है. तो अगर किसान अपने आम को नुकीला होने से रोकना चाहते हैं और उसके आकर को एक खूबसूरत रूप देना चाहते हैं तो उनको क्या कुछ करना होगा उसको लेकर कृषि एक्सपर्ट डॉक्टर आई.के कुशवाहा पूरी जानकारी दे रहे हैं.
ऐसे बनाएं आम के आकार को अच्छा
कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी व प्रोफेसर डॉ आई.के कुशवाहा ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि आम को बहुत से माइक्रोन्यूट्रिएंट की आवश्यकता पड़ती है. अगर आम के बाग में आम में नुकीले होने की समस्या आती है तो इसके लक्षण तेजी से बढ़ते है और ज्यादा दिखाई देते है. जिन बागों में बोरान, जिंक की कमी ज्यादा होती है. जबकि बहुत से बागवान ऐसे होते है जो केवल DAP डालते है और माइक्रोन्यूट्रिएंट का इस्तेमाल नहीं करते हैं. तो ऐसे आम से बचने के लिए हम आम के बागवानों को यह बताना चाहते है ऐसे पेड़ जिनमें नुकीले फल बनते है उनको चिन्हित कर दे. अब उन पेड़ों पर आपको प्रयास करना है कि उसपर नुकीले आम ना आएं उसके लिए अभी 2 बार माइक्रोन्यूट्रिएंट का छिड़काव करें.
साथ ही अगर आगे भी अपने आम को नुकीला होने से बचाना है तो अक्टूबर महीने में ढाई सौ ग्राम नीला तोता, 250 ग्राम बोरान, 250 ग्राम जिंक सल्फेट, 500 ग्राम केल्शियम को सड़ी गौबर की खाद में मिलाकर के 10 साल से अधिक के आम के पेड़ों में तने से लगभग डेढ़ से दो मीटर दूर नाली बनाकर के अगर डालते है. साथ ही जब आम मटर के दाने के बराबर हो जाता है उस समय कैल्शियम और बोरान का एक स्प्रे करते हैं उसके 15 दिन बाद दुबारा से स्प्रे करते है तो नुकीले आम को होने से रोका जा सकता है. आम नुकीला इसलिए होता है आम का जो निचला हिस्सा होता है उसमें लचीलापन कम होने के कारण ऊपर का हिस्सा फूल जाता है और आम नीचे से अच्छे से विकसित नही हो पाता.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें


