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ईरान-इजरायल तनाव का असर या ठेकेदारों का बहाना? नोएडा में 200 KM सड़कें टूटी पड़ीं, जनता खा रही झटके!

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Noida News: नोएडा की सड़कें गड्ढों, उखड़े डामर और टूटे किनारों की वजह से बदहाल हो चुकी हैं, लेकिन मरम्मत का काम शुरू होने का नाम नहीं ले रहा है. हैरानी की बात ये है कि नोएडा प्राधिकरण फरवरी से अब तक 265 टेंडर जारी कर चुका है, फिर भी मरम्मत का काम अब तक नहीं हुआ. ठेकेदारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण बिटुमिन यानी डामर महंगा हो गया है, जिससे सड़क निर्माण की लागत अचानक बढ़ गई और काम शुरू करना घाटे का सौदा बन गया.

नोएडा: नोएडा की सड़कों पर इन दिनों गाड़ियां कम चल रही हैं. लोगों की कमर में झटके लग रहे हैं. शहर के करीब 200 किलोमीटर सड़कें गड्ढों, उखड़े डामर और टूटे किनारों की वजह से बदहाल हो चुकी हैं, लेकिन मरम्मत का काम शुरू होने का नाम नहीं ले रहा है. हैरानी की बात ये है कि नोएडा प्राधिकरण फरवरी से अब तक 265 टेंडर जारी कर चुका है. फिर भी एक भी सड़क पर काम धरातल पर नहीं उतरा. अब इस देरी की वजह ईरान-इजरायल तनाव को बताया जा रहा है. ठेकेदारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण बिटुमिन यानी डामर महंगा हो गया है, जिससे सड़क निर्माण की लागत अचानक बढ़ गई और काम शुरू करना घाटे का सौदा बन गया.

सीईओ का आदेश, हर हाल में शुरू हो काम
दरअसल सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाला सबसे अहम पदार्थ बिटुमिन पेट्रोलियम उत्पाद से बनता है और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर इस पर पड़ता है. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी आई, जिसका असर भारत में भी देखने को मिला. सवाल ये उठ रहा है कि जब दिल्ली, गाजियाबाद और फरीदाबाद जैसे शहरों में सड़क निर्माण लगातार जारी है, तो नोएडा की सड़कों के लिए डामर की कीमत ज्यादा क्यों? यही सवाल बुधवार को नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश ने भी अधिकारियों से पूछा और सिविल विभाग की कार्यशैली पर नाराजगी जताई. सीईओ ने साफ शब्दों में कहा कि ठेकेदारों को किसी तरह की अतिरिक्त रकम नहीं दी जाएगी और तय समय के भीतर काम हर हाल में शुरू होना चाहिए.

ठेकदारों की बहानेबाजी
सीईओ ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 15 दिन के अंदर निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो संबंधित ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा. साथ ही लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी विभागीय कार्रवाई हो सकती है. प्राधिकरण ने पहले आखिरी अप्रैल तक सड़क मरम्मत का लक्ष्य तय किया था और उसी हिसाब से एस्टीमेट पास किए गए थे, लेकिन अब जून-जुलाई की बारिश सिर पर है और सड़कें पहले से ज्यादा खतरनाक हो चुकी हैं. शहर के कई प्रमुख मार्ग इस समय बदहाली की मिसाल बने हुए हैं.

मनमानी और बहानेबाजी नहीं होगी बर्दाश्त
आपको बता दें कि सेक्टर-37 से गोल्फकोर्स होकर सिटी सेंटर जाने वाली रोड, सेक्टर-37 से सेक्टर-49 और सलारपुर होते भंगेल तक को जोड़ने वाला दादरी मुख्य मार्ग और इस्कॉन मंदिर से सेक्टर-12/22 की ओर जाने वाली सड़कें समेत तमाम ऐसे मार्ग हैं, जो खस्ता हालत में पड़े हैं. जगह-जगह बड़े गड्ढे बन चुके हैं, जिनसे बचने के चक्कर में रोज हादसे का खतरा बना रहता है. बारिश के बाद हालात और बिगड़ गए हैं. वाहन चालक संभलकर चलने को मजबूर हैं, जबकि कई इलाकों में जाम अब रोज की कहानी बन चुका है. सीईओ का कहना है कि जब एनसीआर में दूसरी जगज मरम्मत और सड़क निर्माण का काम चल रहा, तो नोएडा में क्यों नहीं. ये ठेकेदारों का बहाना है, जो कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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