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एक तरफ मेहनत और दूसरी तरफ सरकार का साथ, आज यह दिव्यांग युवा बना आत्मनिर्भर, मेहनत कर परिवार का भर रहा पेट

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Ballia News: कहते हैं कि अगर मन में जज्बा हो तो मेहनत करके इंसान सफलता का रास्ता एक ना एक दिन जरूर ढूंढ लेता है. ऐसी ही सफलता भरी कहानी है दिव्यांग युवक विनोद कुमार गुप्ता की, जो आज सड़कों पर भटकने के बजाय नौकरी कर अपना और अपने परिवार का गुजारा कर रहे हैं. आइए उनकी पूरी कहानी आपको बताते हैं.

बलिया: जिले का एक दिव्यांग युवक, जो कभी मजबूरी और बेरोजगारी से टूट चुके थे, अब उन्हें रोजगार का साधन मिल चुका है. शारीरिक कमजोरी ने इनके कदम जरूर धीमे किए थे, लेकिन हौसले की उड़ान को कभी भी रोक नहीं पाई थी. पढ़ाई में भी हमेशा आगे रहने वाले इस दिव्यांग युवक ने साल 2010 में लॉ फाइनेंशियल का कोर्स भी पूरा कर लिया था. बस बड़ी उम्मीद थी कि एक अच्छी नौकरी मिलेगी और परिवार की जिंदगी बेहतर कर सकेंगे. हालांकि, किस्मत ने लंबे समय तक इनका साथ ही नहीं दिया और हर मोड़ पर असफलता परेशान करती रही. आखिर अब यह दिव्यांग अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे कर रहा है, आइए उन्हीं की जुबानी जानते हैं.

मेहनत करने वालों की नहीं होती हार
दिव्यांग युवक विनोद कुमार गुप्ता ने नौकरी की तलाश में न जाने कितने दफ्तरों के चक्कर लगाए, कितनी जगह आवेदन दिए, लेकिन हर जगह केवल निराशा ही हाथ लग रही थी. बेरोजगारी का दर्द तब और बढ़ गया, जब घर में परिवार की जिम्मेदारी और छोटे बच्चों की परवरिश एक चुनौती बन गई थी. हर बार हालात ऐसे बने कि परिवार का सही ढंग से भरण-पोषण तक नहीं हो पा रहा था. वह कहते हैं कि जो मेहनत और हिम्मत नहीं छोड़ते हैं, उनके लिए रास्ते खुद बन जाते हैं. अंत में सरकार की ओर से मिली एक ट्राई साइकिल ने इस युवक की जिंदगी में नहीं उड़ान भर दी.

हार मानने के बजाय चुना मेहनत का रास्ता
यही ट्राई साइकिल उनके संघर्ष का नया मित्र बन गया. उन्होंने हार मानने के बजाय फिर से कोशिश शुरू की और आखिरकार एक डिलीवरी बॉय की नौकरी मिल गई. फिलहाल वह अपने ट्राई साइकिल के पीछे सामान रखकर दिनभर लोगों के घर-घर पहुंचते हैं. सुबह से शाम तक सड़कों पर मेहनत करने वाला यह दिव्यांग युवक अब अपने परिवार का सहारा बन गया है. जिस जिंदगी में कभी मायूसी थी, वहां अब आत्मनिर्भरता की नई रोशनी देखने को मिल रही है. यह कहानी न केवल एक दिव्यांग युवक की है, बल्कि उस जज्बे, उत्साह और संघर्ष से भरी है, जो आत्मनिर्भर बनने के लिए मजबूत संदेश देती है.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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