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‘पंडित’ के बाद अब क्षत्रियों को साधने की कोशिश, क्या बंगाल चुनाव नतीजों से खौफ में हैं अखिलेश यादव?, कहा- सम्मान और पद भी देंगे

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UP Politics: पश्चिम बंगाल चुनाब के बाद यूपी की सियासी फिजा में 360 डिग्री का बदलाव देखने को मिल रहा है. पहले समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग कहा कि 2027 में सरकार आ रही हैं. यह भविष्यवावनि उनके एक पंडित ने की है. शनिवार को महाराण प्रताप की जयंती में मौके पर उन्होंने क्षत्रिय समाज को साधने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि 2027 में सरकार बनने के बाद क्षत्रिय समाज को उचित सम्मान और पद मिलेगा.

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सपा मुखिया अखिलेश यादव का क्षत्रिय कार्ड.

लखनऊ. पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों के चुनाव नतीजों का सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश में दिख रहा है. खासकर समाजवादी पार्टी के मुखिया अब हिंदू वोटों को सहेजने में जुट गए हैं. शनिवार को महाराणा प्रताप की जयंत पर राजधानी लखनऊ में उन्होंने एक प्रेस कॉन्फरेंस की. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार बनने पर क्षत्रिय  समाज को सम्मान के साथ-साथ उचित स्थान भी दिया जाएगा और टिकटों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा. हालांकि, वे इस बात को भूल गए कि राज्य सभा में सपा के सांसद रामजी लाला सुमन ने महाराणा प्रताप को ग़द्दार बताते हुए, मुग़ल शाशक बाबर की मदद करने का आरोप लगाया था. जिसके बाद करणी सेना की तरफ से इसका जोरदार विरोध किया गया था.

दरअसल, बंगाल चुनाव परिणाम के बाद अखिलेश यादव के सुर बदले-बदले से नजर आ रहे हैं. पहले अखिलेश यादव ने ब्राह्मणों को साधने की कोशिह की. उन्होंने कहा कि उनकी एक पंडित से बात हुई है, जिन्होंने 2012 में सरकार बनाने में मदद की थी. मैंने उन्हें कुछ लिखकर दिया था. पंडित जी ने सुझाव दिए हैं उसका पालन करूंगा। पंडित जी जो कहेंगे वही काम होगा. अखिलेश यादव के इस बयान को ब्राह्मण मतदाताओं को अपनी ओर करने की कोशिश बताई गई थी.  आज महाराणा प्रताप की जयंती के मौके पर उन्होंने क्षत्रिय समाज के लिए सपा का दरवाजा खोला है.

बीजेपी पर निशाना

अखिलेश यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब इस पार्टी का गठन हुआ था, तब उसने स्वीकार किया था कि वह समाजवादी विचारधारा वाला दल है, लेकिन बाद में वह कैपिटलिस्ट और कम्युनिस्ट साबित हुआ. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी जब खुद को सोशलिस्ट दिखाना चाहती है तो मंच पर जेपी की तस्वीर लेकर आ जाती है. महंगाई का मुद्दा उठाते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि केंद्र सरकार ने गैस सिलेंडर महंगे किए हैं और अब डीजल-पेट्रोल की कीमतें बढ़ाने जा रही है. उन्होंने दावा किया कि ऑयल कंपनियों के घाटे की भरपाई जनता से की जा रही है, क्योंकि सरकार मुनाफाखोरी बंद नहीं करना चाहती.

सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने का आरोप

उन्होंने सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने का आरोप लगाते हुए कहा कि पलासियो मॉल और किसान बाजार जैसी संपत्तियां बीजेपी सरकार ने बेच दीं, जबकि एक्सप्रेसवे का ईपीसी मॉडल समाजवादी सरकार ने शुरू किया था. अखिलेश ने दावा किया कि चुनाव में बीजेपी उद्योगपतियों, मीडिया और गैंग के साथ मिलकर सबसे ज्यादा पैसा खर्च करती है, लेकिन जनता इसे हराएगी.

बिजली, स्मार्ट मीटर और ईवीएम पर हमला

अखिलेश यादव ने स्मार्ट मीटर की तीखी आलोचना की. उन्होंने कहा कि सपा सरकार में यूपी में सबसे ज्यादा बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन लाइनें और डिस्ट्रीब्यूशन का काम हुआ. उन्होंने महिलाओं को बधाई दी जिन्होंने स्मार्ट मीटर निकालकर फेंक दिए. उन्होंने स्मार्ट मीटर को हैक किए जाने की आशंका जताई और कहा कि अगर स्मार्ट मीटर रिमोट से गड़बड़ हो सकता है तो ईवीएम क्यों नहीं. उन्होंने बैलेट पेपर से चुनाव कराने पर जोर दिया. नोएडा एयरपोर्ट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उद्घाटन तो हो गया, लेकिन हवाई जहाज लखनऊ आ रहे हैं. अखिलेश ने लखनऊ में दो मजदूरों की सेप्टिक टैंक में मौत का हवाला देते हुए स्मार्ट सिटी की अवधारणा पर सवाल उठाया.

किसानों और कार्यकर्ताओं को संदेश

अखिलेश यादव ने किसानों से अपील की कि यदि मुआवजा कम मिल रहा हो तो कानूनी मदद लें, उनकी सरकार बाजार दर पर मुआवजा देगी. कार्यकर्ताओं से उन्होंने कहा कि उत्साह में किसी के कार्यालय पर न जाएं, जब पार्टी तय करेगी तब ही कार्रवाई करें. उन्होंने एक सिपाही द्वारा जारी वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि उस बहादुर सिपाही का क्या होगा, यह सरकार पर निर्भर है. रिश्वतखोरी पर उन्होंने सवाल उठाया कि रिश्वत लेने और देने वाले दोनों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती.

चुनाव आयोग पर सवाल

अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाए और कहा कि वोटर लिस्ट में डुप्लीकेट नाम कैसे आ रहे हैं और सॉफ्टवेयर स्मार्ट मीटर की तरह काम कर रहा है. यह भाषण अखिलेश यादव की चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें वे विपक्षी एकता और भाजपा विरोधी एजेंडे को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं.

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Amit Tiwariवरिष्ठ संवाददाता

अमित तिवारी, News18 Hindi के डिजिटल विंग में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. वर्तमान में अमित उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, ब्यूरोक्रेसी, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और रिसर्च बेस्ड कवरेज कर रहे हैं. अख़बार…और पढ़ें



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