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यह कहानी सिर्फ हार-जीत की नहीं, बल्कि मैदान पर अंपायर के साथ की गई सरेआम बदसलूकी और ‘फिजिकल असॉल्ट’ की है. विवाद की शुरुआत डुनेडिन में खेले गए पहले टेस्ट से हुई. वेस्टइंडीज की टीम उस समय दुनिया की सबसे घातक टीम थी, लेकिन न्यूजीलैंड की पिचों और वहां के स्थानीय अंपायरों के फैसलों ने कैरेबियाई खिलाड़ियों का धैर्य जवाब दे गया.
जब टेस्ट क्रिकेट में अंपायर पर चला लात घूंसा, खेल हुआ शर्मसार
नई दिल्ली. अक्सर हीट आफ द मोमेंट में खिलाड़ी भूल दाते है कि कि क्रिकेट को अक्सर ‘जेंटलमैन गेम’ कहा जाता है, लेकिन 1980 में वेस्टइंडीज के न्यूजीलैंड दौरे पर जो हुआ, उसने इस खेल की आत्मा को झकझोर कर रख दिया था. वह दौर जब कैरेबियाई तेज़ गेंदबाजों की खौफनाक रफ्तार के आगे दुनिया कांपती थी, उस समय अनुशासन और खेल भावना ने ऐसी घुटने टेके कि आज भी उस सीरीज को याद कर क्रिकेट प्रेमी सिहर जाते हैं.
यह कहानी सिर्फ हार-जीत की नहीं, बल्कि मैदान पर अंपायर के साथ की गई सरेआम बदसलूकी और ‘फिजिकल असॉल्ट’ की है. विवाद की शुरुआत डुनेडिन में खेले गए पहले टेस्ट से हुई. वेस्टइंडीज की टीम उस समय दुनिया की सबसे घातक टीम थी, लेकिन न्यूजीलैंड की पिचों और वहां के स्थानीय अंपायरों के फैसलों ने कैरेबियाई खिलाड़ियों का धैर्य जवाब दे गया.
अंपायर पर किया होल्डिंग ने हमला
महान तेज गेंदबाज माइकल होल्डिंग, जिन्हें उनकी शांत और स्मूथ रन-अप के कारण ‘व्हिस्परिंग डेथ’ कहा जाता था, ने अंपायर के एक फैसले से नाराज होकर अपना आपा खो दिया. उन्होंने गुस्से में आकर नॉन-स्ट्राइकर एंड के स्टंप्स को लात मारकर उखाड़ फेंका. क्रिकेट के मैदान पर यह दृश्य किसी दुःस्वप्न जैसा था. दूसरे टेस्ट में ‘क्रैश एंड बर्न’असली ड्रामा अभी बाकी था. क्राइस्टचर्च में खेले गए दूसरे टेस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया, वेस्टइंडीज की टीम को लग रहा था कि अंपायर फ्रेड गुडॉल जानबूझकर उनके खिलाफ पक्षपाती फैसले ले रहे हैं. चाय काल के समय वेस्टइंडीज ने विरोध स्वरूप मैदान पर उतरने से ही मना कर दिया.
कॉलिन क्राफ्ट ने मारा धक्का
अगले दिन मैच तो शुरू हुआ, लेकिन माहौल में कड़वाहट घुल चुकी थी. इस मैच के दौरान कॉलिन क्राफ्ट की उग्रता ने सारी सीमाएं पार कर दीं. रिचर्ड हैडली के खिलाफ एक जोरदार अपील ठुकराए जाने के बाद क्राफ्ट भड़क गए. पहले उन्होंने अंपायर से जुबानी जंग की, फिर बेल्स गिरा दीं लेकिन जो इसके बाद हुआ, वह क्रिकेट इतिहास में कभी नहीं देखा गया था. अपनी अगली गेंद डालने के लिए जब कॉलिन क्राफ्ट रन-अप पर आए, तो उन्होंने अंपायर फ्रेड गुडॉल को अपने रास्ते से हटने का मौका ही नहीं दिया. क्राफ्ट सीधा अंपायर से जाकर टकराए और उन्हें एक जोरदार कंधा मारा. यह कोई दुर्घटना नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी शारीरिक प्रतिक्रिया थी. मैदान पर मौजूद हर शख्स सन्न रह गया. एक अंतरराष्ट्रीय मैच में एक गेंदबाज सरेआम अंपायर को धक्का मार रहा था.
खेल भावना से खिलवाड़
खेल भावना पर लगा दागभले ही वह मैच ड्रॉ पर छूटा और रिचर्ड हैडली ने शानदार शतक जड़ा, लेकिन वह टेस्ट मैच कभी भी अपने स्कोरकार्ड के लिए याद नहीं किया गया. उसे याद किया गया खिलाड़ियों के उस अभद्र व्यवहार के लिए जिसने क्रिकेट को शर्मसार कर दिया था. उस समय वेस्टइंडीज के कप्तान क्लाइव लॉयड थे, जिन्होंने बाद में स्वीकार किया था कि वह उनके करियर का सबसे कठिन दौरा था. 1980 की वह सीरीज हमें याद दिलाती है कि जब खेल में जुनून, अनुशासन की सीमा लांघ जाता है, तो वह केवल बदनामी लेकर आता है. माइकल होल्डिंग की लात और कॉलिन क्राफ्ट का वह धक्का आज भी आधुनिक क्रिकेट के लिए एक चेतावनी की तरह है कि मैदान पर अंपायर का सम्मान सर्वोपरि है.
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें


