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अमेठी के राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान में कचरे को बोझ नहीं, संसाधन बनाया जा रहा है. यहां जैविक और अन्य कचरे से बायोगैस, ईंट, टाइल्स और जैविक खाद तैयार की जा रही है. ‘जीरो वेस्ट’ मॉडल के तहत न तो कचरा बाहर जाता है और न ही प्रदूषण फैलाता है, बल्कि रोज़ाना इससे गैस सिलेंडर तक तैयार हो रहा है, जो भोजनालय में उपयोग हो रहा है.
अमेठी. कचरा और गंदगी हमारे दैनिक दिनचर्या और हमारे शुद्ध वातावरण में बेहद हानिकारक होता है. कचरे से तरह-तरह के दुष्प्रभाव हमारे पर्यावरण पर पढ़ते हैं, लेकिन अगर इसी कचरे का हम सदुपयोग करें तो कितना बेहतर होगा. अमेठी में इसका सदुपयोग हो रहा है अमेठी में पहले इकलौते संस्थान में कचरा का ऐसा सदुपयोग हो रहा है कि उसे उपयोगी सामान से लेकर गैस तक तैयार की जा रही है. संस्थान से निकलने वाला कचरा ना तो नगर पालिका जाता है ना ही सड़कों पर फेंका जाता है. बल्कि उसका सदुपयोग होता है और उससे गैस से लेकर ईंट तक और उपयोगी सामान तक तैयार किए जा रहे हैं.
अमेठी जिले के तिलोई तहसील के बहादुरपुर ब्लॉक में बने राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान में यह अनोखा प्रयोग हो रहा है. जहां कागज, पॉलीथिन, प्लास्टिक या फिर अन्य उपयोगी कचरे से बायोगैस तैयार की जा रही है. संस्थान में जीरो वेस्ट पदार्थ का जमकर सदुपयोग हो रहा है. हैरान कर देने वाली बात यह है कि इसी कचरे से प्रतिदिन संस्थान को एक सिलेंडर संस्थान के भोजनालय में उपयोग के लिए दिया जा रहा है. इतना ही नहीं इसी कचरे से सिलेंडर के अलावा फर्श पर लगने वाली ईट और टाइल्स तक का निर्माण किया जाता है.
क्या है प्रकिया कचरे का एक एक कण हो रहा उपयोगी
राजीव गांधी पेट्रोलियम संस्थान के मुताबिक जीरो वेस्ट मटेरियल की उपयोग के लिए लगाई गई मशीन में कचरे को डाला जाता है, फिर जैविक कचरा धीरे-धीरे बड़ी मशीन में जाता है. जहां पर उपयोगी वाली चीज लेकर उसे टैंक में डाला जाता है. टैंक के जरिए फिर उसको अच्छे से रीसायकल किया जाता है. फिर साइकिल के बाद दूसरे बड़े टैंक में जाकर उसको इस्तेमाल कर उसे बायोगैस तैयार की जाती है. इसके साथ ही जो भी चीज इस प्रक्रिया के बाद बच जाती हैं उसे पौधों के लिए जैविक खाद और बचे हुए पानी का उपयोग मछली पालन और सिंचाई तक के लिए किया जाता है.
भविष्य के लिए और बेहतर प्लान
संस्थान के प्रभारी निर्देशक प्रो. हरीश हिरानी ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि भविष्य के लिए हम और बड़ी तैयारी कर रहे हैं, जिससे एक नहीं कई गैस सिलेंडर तैयार हो सकेंगे. इसके साथ ही बच्चों को और आधुनिक तकनीक सीखने का मौका मिले, उन्होंने कहा कि संस्थान परिसर में प्रतिदिन निकलने वाला जैविक कचरा अब सीधे संयंत्र में डाला जा रहा है. इस प्रक्रिया में कचरे से गैस तैयार होगी, जिसका उपयोग ऊर्जा के रूप में किया जाएगा. इससे भोजन बनाने सहित अन्य कार्यों में सहूलियत मिलेगी. कचरे से बचा अवशेष जैविक खाद में बदल रहा है, जो पौधों की वृद्धि के लिए उपयोगी रहेगा. उन्होंने कहा की संयंत्र में जल शोधन की व्यवस्था भी की गई है. शोधन के बाद प्राप्त जल का उपयोग मछली पालन और परिसर की हरियाली बनाए रखने में किया जाएगा. इस व्यवस्था से जल की बचत के साथ उसका सही उपयोग सुनिश्चित होगा. उनका मानना है कि इस पहल से कचरे के निस्तारण की समस्या कम होगी और परिसर को स्वच्छ रखने में मदद मिलेगी.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें


