18.5 C
Munich

नाती-पोता खिलाने की उम्र में डेब्यू, वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने वाले जिम लेकर को मारा चौका, 1950 में बना रिकॉर्ड आज भी अटूट है

Must read


होमखेलक्रिकेट

नाती-पोता खिलाने की उम्र में डेब्यू, , 1950 में बना रिकॉर्ड आज भी अटूट है

Last Updated:

नवंबर 1950 में, बॉम्बे के ऐतिहासिक ब्रेबॉर्न स्टेडियम में एक फर्स्ट-क्लास मैच (Commonweath XI बनाम Governor’s XI) खेला जा रहा था.  इस मैच में गवर्नर इलेवन की कप्तानी खुद राजा महाराज सिंह कर रहे थे.  जब वह बल्लेबाजी करने उतरे, तो पूरा स्टेडियम हैरान था क्योंकि तब उनकी उम्र 72 साल थी.

Zoom

1950 में उस समय बॉम्बे के गवर्नर राजा महाराज सिंह ने 72 साल की उम्र मे किया फर्स्ट क्लास डेब्यू, आज तक रिकॉर्ड है बरकरार

नई दिल्ली. “सपनों को जीने की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती” यह बात सुनने में जितनी फ़िल्मी लगती है, इसे असल जिंदगी में सच कर दिखाया था राजा महाराज सिंह ने.  1950 की एक सुनहरी दोपहर ने क्रिकेट के इतिहास में एक ऐसा पन्ना जोड़ दिया, जिसे आज भी ‘सबसे अनोखा रिकॉर्ड’ माना जाता है. यह कहानी है उस जुनून की, जिसे न उम्र की बेड़ियाँ बांध पाईं और न ही पद की गरिमा.

राजा महाराज सिंह स्वतंत्र भारत में बॉम्बे (अब मुंबई) के पहले भारतीय गवर्नर थे.  वह एक मंझे हुए राजनीतिज्ञ और कुलीन व्यक्तित्व के धनी थे लेकिन उनके भीतर एक क्रिकेटर हमेशा से जीवित था, जिसे मैदान पर उतरने का मौका तब मिला जब लोग आमतौर पर रिटायरमेंट के बाद आराम की योजना बनाते हैं. आजादी के बाद वो मैदान पर उतरे और वो रिकॉर्ड बना गए जो आज भी सबको हैरान करता है .

इतिहास रचने वाला वो मैच

नवंबर 1950 में, बॉम्बे के ऐतिहासिक ब्रेबॉर्न स्टेडियम में एक फर्स्ट-क्लास मैच (Commonweath XI बनाम Governor’s XI) खेला जा रहा था.  इस मैच में गवर्नर इलेवन की कप्तानी खुद राजा महाराज सिंह कर रहे थे.
जब वह बल्लेबाजी करने उतरे, तो पूरा स्टेडियम हैरान था क्योंकि तब उनकी उम्र 72 साल थी. उन्होंने अपने पूरे जीवन में एक भी पेशेवर (Professional) मैच नहीं खेला था और उनका सामना उस वक्त के दुनिया के सबसे घातक स्पिनर जिम लेकर से था. दिल में जोश और अपनी टीम के लिए कुछ कर गुजरने का मद्दा महाराज सिंह को क्रीज तक खीच लाया.

चार रन और एक अमर रिकॉर्ड

मैदान पर उतरते ही उन्होंने दुनिया के सबसे उम्रदराज ‘डेब्यूटेंट’ (पहली बार मैच खेलने वाले खिलाड़ी) का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. उन्होंने अपनी पारी में 4 रन बनाए, लेकिन ये महज चार रन नहीं थे ये प्रतीक थे उस साहस के जो एक 72 साल के व्यक्ति को दुनिया के महानतम गेंदबाजों के सामने खड़ा होने की हिम्मत देता है. कहा जाता है कि जिम लेकर की एक गेंद उनके शरीर पर भी लगी, लेकिन राजा महाराज सिंह विचलित नहीं हुए.  अंततः वह स्लिप में कैच आउट हुए, पर तब तक वह क्रिकेट इतिहास के सबसे अनोखे रिकॉर्ड धारक बन चुके थे.
राजा महाराज सिंह की यह छोटी सी पारी हमें सिखाती है कि हमारी महत्वाकांक्षाएं समय की मोहताज नहीं होतीं चाहे आप किसी भी पद पर हों या आपकी उम्र कुछ भी हो, अगर दिल में कुछ कर गुजरने की तमन्ना है, तो आसमान भी छोटा पड़ जाता है.

About the Author

authorimg

राजीव मिश्रAssociate editor

मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें



Source link

- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest article