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पंत अपील वापस लेकर महान बन सकते थे, धोनी और विश्वनाथ के साथ दर्ज करा लेते अपना नाम, जीत की जिद् ने रोक दिया

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रिप्ले में स्पष्ट था कि जब गेंद रघुवंशी की पीठ पर लगी, तो वे क्रीज की ओर डाइव लगा रहे थे और गेंद की दिशा नहीं देख रहे थे. एमसीसी के नियमों के अनुसार, फील्डिंग कप्तान के पास अंपायर के निर्णय से पहले या तुरंत बाद अपील वापस लेने का अधिकार होता है.  पंत चाहते तो खेल भावना दिखाते हुए इसे वापस ले सकते थे. 

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अंगकृश रघुवंशी के खिलाफ अपील वापस लेकर ऋषभ पंत कर सकते थे बड़ा काम

नई दिल्ली. आईपीएल 2026 के मैदान पर जब लखनऊ सुपर जायंट्स और कोलकाता नाइट राइडर्स की टीमें आपस में टकराईं, तो मुकाबला सिर्फ बल्ले और गेंद का नहीं रहा, बल्कि नैतिकता और नियमों के बीच जंग बन गया. लखनऊ के कप्तान ऋषभ पंत ने अंगकृष रघुवंशी के खिलाफ ‘ऑब्सट्रक्टिंग द फील्ड’ (फील्डिंग में बाधा) की जो अपील की, उसने क्रिकेट जगत को दो हिस्सों में बांट दिया है. एक तरफ क्रिकेट की ‘रूल बुक’ थी जो पंत को सही ठहरा रही थी, तो दूसरी तरफ खेल की वो ‘आत्मा’ जिसे गुंडप्पा विश्वनाथ और एमएस धोनी जैसे कप्तानों ने सालों तक सींचा था.

जब रघुवंशी अपनी क्रीज बचाने के लिए डाइव लगा रहे थे और गेंद उनकी पीठ पर लगी, तो उनकी आँखों में बेईमानी नहीं बल्कि सिर्फ डेंजर एंड से बचने की छटपटाहट थी लेकिन पंत के एक इशारे ने खेल भावना को कटघरे में खड़ा कर दिया.  यहाँ शायद ‘जीत की भूख’ ने पंत के विवेक पर पर्दा डाल दिया.  सोशल मीडिया पर अब ‘कर्मा’ की गूँज है लोग कह रहे हैं कि सुपर ओवर में लखनऊ की करारी हार उसी ‘बेईमानी’ का नतीजा है. क्या वाकई लखनऊ ‘जैसी करनी वैसी भरनी’ का शिकार हुआ?

क्या पंत को अपील वापस लेनी चाहिए थी?

क्रिकेट के मैदान पर तकनीक और नियमों का दबदबा बढ़ रहा है, लेकिन खेल भावना हमेशा सर्वोपरि रही है.  रघुवंशी के मामले में कई तर्क पंत के खिलाफ जाते हैं. रिप्ले में स्पष्ट था कि जब गेंद रघुवंशी की पीठ पर लगी, तो वे क्रीज की ओर डाइव लगा रहे थे और गेंद की दिशा नहीं देख रहे थे. एमसीसी के नियमों के अनुसार, फील्डिंग कप्तान के पास अंपायर के निर्णय से पहले या तुरंत बाद अपील वापस लेने का अधिकार होता है.  पंत चाहते तो खेल भावना दिखाते हुए इसे वापस ले सकते थे.

इतिहास के सुनहरे पन्ने

1980 के गोल्डन जुबली टेस्ट में गुंडप्पा विश्वनाथ ने बॉब टेलर के खिलाफ अपनी अपील वापस ली थी.  इसी तरह, 2011 में एमएस धोनी ने इयान बेल को ‘रन आउट’ दिए जाने के बाद वापस बुलाकर एक मिसाल पेश की थी पंत के पास भी ऐसा ही ‘धोनी मोमेंट’ बनाने का मौका था. इन दोनों मौकों पर विरोधी बल्लेबाजों ने वापस आकर शतक लगाया और भारत मैच हार गया पर आज भी लोग धोनी और विश्वनाथ को उनके फैसले के लिए याद करते है.

क्या ‘बेईमानी’ की सजा मिली लखनऊ को?

सोशल मीडिया पर ‘जैसी करनी वैसी भरनी’ जैसे जुमले तब वायरल हुए जब लखनऊ यह मुकाबला सुपर ओवर में हार गई.  लखनऊ सुपर जायंट्स को इस विवादित विकेट का फायदा तो मिला, लेकिन अंत में KKR ने सुपर ओवर में जीत दर्ज की. लखनऊ की यह लगातार पांचवीं हार थी. विशेषज्ञों का मानना है कि जब टीम मुश्किल दौर में होती है, तो कप्तान अक्सर खेल भावना के बजाय जीत के लिए नियमों का सहारा लेता है.
थर्ड अंपायर रोहन पंडित ने नियमों (Clasue 37.1.4) के तहत रघुवंशी को आउट करार दिया, क्योंकि उनका मानना था कि बल्लेबाज ने दिशा बदली थी.  क्रिकेट नियमों से चलता है, लेकिन यादें खेल भावना से बनती हैं.  पंत ने नियम तो जीते, लेकिन शायद कई प्रशंसकों का दिल और मैच दोनों हार गए.

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राजीव मिश्रAssociate editor

मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें



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