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कच्चे मकानों की गौंखा-बड़ेर वाली यादें, कभी अलमारी का करते थे काम, लकड़ी के टोटा और बिलनी से बनते थे दरवाजे

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कच्चे मकानों की गौंखा-बड़ेर वाली यादें, कभी अलमारी का करते थे काम

 

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Gaukha of Mud houses: भारत में प्रधानमंत्री आवास योजना के चलते पक्के मकानों का सपना साकार हुआ है. लेकिन पुराने कच्चे मकानों की परंपरा भी बेहद खास रही है. इन घरों में उपयोगी और सुंदर आकृतियां बनाई जाती थीं. कच्चे मकानों में गौंखा एक दीवारनुमा जगह होती थी. जहां घरेलू सामान रखा जाता था. मंदिरनुमा और त्रिकोणीय गौंखे खास डिजाइन के होते थे. जिनमें दीपक आदि सुरक्षित रखे जाते थे. टोटा लकड़ी से बना छज्जा होता था जो खपरैल छत को सहारा देता था. दरवाजों में कुंडी की जगह बिलनी लगाई जाती थी. वहीं, बड़ेर लकड़ी का मजबूत पट्टा होता था जो मिट्टी के खंभों पर रखकर छत को टिकाने में अहम भूमिका निभाता था. ये घर स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान का बेहतरीन उदाहरण थे.



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